बादाम केस का वीडियो वायरल, हाउसिंग बोर्ड में फाइल गुम करने पर दो अधिकारियों पर गाज, मुख्यालय से अटैच, महिला अफसर ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप

Video of Badam case goes viral, two officers in trouble for losing Housing Board file, attached to headquarters, female officer alleges blackmailing

बादाम केस का वीडियो वायरल, हाउसिंग बोर्ड में फाइल गुम करने पर दो अधिकारियों पर गाज, मुख्यालय से अटैच, महिला अफसर ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में 'बादाम मामले' को लेकर कार्रवाई की गई है. संबंधित अधिकारी को बादाम देने और नत्थी दबाने के आरोप वाला वीडियो प्रसारित हुआ था. इसके बाद संपदा अधिकारी एल.पी बंजारे और सहायक पुन्नम बंजारे पर कार्रवाई की गई है.
दो अधिकारी मुख्यालय से अटैच
सामाजिक माध्यम पर युवक की समस्या बताते हुए वीडियो प्रसारित होते ही प्रशासन हरकत में आया. नत्थी दबाने के आरोप पर कार्रवाई करते हुए संपदा अधिकारी एल.पी. बंजारे और सहायक पुन्नम बंजारे को मुख्यालय संलग्न कर दिया गया. बिलासपुर में गृह निर्माण मंडल के कार्य से परेशान एक युवक ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया था. 
उसने आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया था। युवक ने करीब एक साल पहले ईडब्ल्यूएस श्रेणी का एक फ्लैट पुनर्विक्रय में खरीदा था. उसने विधिवत रजिस्ट्री करवाकर नामांतरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज गृह निर्माण मंडल कार्यालय में जमा किए थे. आम तौर पर नामांतरण की प्रक्रिया दो से तीन महीने में पूरी हो जाती है.
बादाम देने वाले युवक का आरोप, 7 माह तक आवेदन पर कार्रवाई नहीं
युवक तरुण का आरोप है कि सात महीने तक उसके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब वह कार्यालय पहुंचा तो संबंधित अधिकारी ने बताया कि नामांतरण तो हो चुका है. लेकिन नत्थी नहीं मिल रही है. पीड़ित ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहा था. हर बार उसे यही जवाब मिलता था कि नत्थी खो गई है या उसकी तलाश की जा रही है. इस दौरान वह पचास से ज्यादा बार दफ्तर गया. जिससे उसका समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ.
बादाम देकर जताया था विरोध
बार-बार एक ही जवाब मिलने पर तरुण ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. वह पांच सौ ग्राम बादाम खरीदकर कार्यालय पहुंचा. उसने अधिकारी को बादाम देते हुए कहा कि इसे खाने से उनकी याददाश्त तेज हो जाएगी. शायद उन्हें उसकी नत्थी का पता चल जाए और उसे बुलाकर नत्थी सौंप दी जाए. इस घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की.
इस मामले में छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड में पदस्थ एक महिला अधिकारी ने अपने ही कार्यालय में घुसकर अपमान, मानसिक उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और सोशल मीडिया के जरिए छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया है. मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.
शिकायतकर्ता पूनम बंजारे, सहायक स्टेट मैनेजर (संपत्ति प्रबंधन), के मुताबिक 17 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1 बजे वह अपने कार्यालय में नियमित कार्य कर रही थीं. तभी एक व्यक्ति बिना अनुमति उनके कक्ष में घुस आया. आरोप है कि उसने न सिर्फ शासकीय कार्य में हस्तक्षेप किया बल्कि फाइलों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की और अभद्र व्यवहार किया. स्थिति तब और अपमानजनक हो गई जब उसने उनकी टेबल पर बादाम फेंकते हुए तंज कसा—“इन्हें खाओ, याददाश्त बढ़ेगी”, जिससे अधिकारी को गहरा मानसिक आघात और अपमान महसूस हुआ.
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बिना अनुमति रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी. बाद में इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर महिला अधिकारी पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए. जिन्हें उन्होंने पूरी तरह झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया है.
उनका कहना है कि यह न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, बल्कि डिजिटल माध्यम से दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने का प्रयास भी है. महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में साफ किया कि आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी, मानहानि, महिला की गरिमा भंग करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत निजता के उल्लंघन जैसे गंभीर प्रावधान लागू होते हैं. उन्होंने इस पूरे मामले को ‘डिजिटल ट्रायल’ की संज्ञा देते हुए कहा कि बिना किसी जांच के सोशल मीडिया पर एकतरफा आरोप प्रसारित कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है.
इस मामले में उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, सोशल मीडिया से मानहानिकारक वीडियो हटवाने और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनके पास वीडियो और फोटो सहित सभी जरुरी सबूत मौजूद हैं. जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा.
इस पूरे घटनाक्रम ने विरोध जताने के तरीके पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसी भी व्यक्ति को अपनी शिकायत या असहमति दर्ज कराने का अधिकार है. लेकिन उसका तरीका कानून और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए. किसी महिला अधिकारी के कार्यालय में घुसकर अभद्र व्यवहार करना, अपमानजनक टिप्पणी करना या इस तरह की हरकतों से विरोध जताना न सिर्फ असंवैधानिक है. बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को भी ठेस पहुंचाता है. अगर किसी को कार्यप्रणाली या भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत है तो उसके लिए शासन-प्रशासन में निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाएं मौजूद हैं. जिनके तहत उच्च अधिकारियों या संबंधित विभाग में विधिवत शिकायत की जा सकती है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपेक्षा होती है. ताकि कानून का पालन हो और किसी की गरिमा भी आहत न हो.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?mode=gi_t