13 वर्षीय नाबालिग बालिका से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, छात्रा बरामद, पुलिस ने आरोपी अरुण को गिरफ्तार कर भेजा सलाखों के पीछे
A 13-year-old girl was raped on the pretext of marriage; the student was recovered. The police arrested the accused, Arun, and sent him behind bars.
जशपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर की चौकी पंडरा पाठ क्षेत्र में 13 साल की नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर भगाने और दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने आरोपी अरुण यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान अरुण यादव उम्र 19 साल निवासी पंडरा पाठ के रुप में हुई है.
मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता की मां ने चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि उसकी 13 साल की नाबालिग बेटी 13 सितम्बर को घर से स्कूल जा रही हूं. कहकर घर से निकली थी. लेकिन वापस नहीं लौटी. आसपास रिश्तेदारों में पतासाजी किए. कहीं पता नहीं चला. उसे शक है कि उसकी नाबालिग बेटी को कोई व्यक्ति बहला फुसलाकर भगाकर ले गया है,
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रार्थिया की रिपोर्ट पर चौकी में बी एन एस की धारा 137(2) के तहत जुर्म दर्ज कर मामला जांच में लिया गया और नाबालिग बालिका की पातासाजी की जा रही थी. इसी दौरान पुलिस को मुखबिर और परिजनों की मदद से पता चला कि नाबालिग बालिका आरोपी युवक चौकी पंडरा पाठ क्षेत्रांतर्गत ही आरोपी युवक के घर पर है. जिस पर पुलिस ने आरोपी अरुण यादव के घर से नाबालिग बालिका को बरामद किया. और आरोपी अरुण यादव को हिरासत में लेकर वापस लाया.
पुलिस की पूछताछ पर नाबालिग बालिका ने बताया कि आरोपी अरुण यादव के द्वारा, तुमसे प्यार करता हूं, शादी करूंगा कहकर, बहला फुसलाकर कर घर से भगाकर ले जाया गया था. इस दौरान उसे दो दिनों तक राजपुरी जंगल में रखा. फिर अपने गृह ग्राम में ले आया. इस दौरान आरोपी के द्वारा नाबालिग बालिका से दुष्कर्म भी किया गया है.
जिस पर पुलिस के ने मामले में दुष्कर्म के लिए बी एन एस की धारा 64(2-M),65(1) व 5, 6पॉस्को एक्ट के तहत जुर्म दर्ज किया. पूछताछ पर आरोपी अरुण यादव ने जुर्म करना कबूल किया. और जुर्म का पुख्ता सबूत पाए जाने पर आरोपी अरुण यादव को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया.
इस मामले की कार्यवाही और आरोपी की गिरफ्तारी में चौकी प्रभारी पंडरा पाठ उप निरीक्षक सतीश सोनवानी, सहायक उप निरीक्षक राज कुमार पैंकरा, आरक्षक बिलचियूस व दिनेश्वर भगत की अहम भूमिका रही.
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