महिला से 30 हजार लेकर दर्ज की एफआईआर, आरोपी से 20000 लेकर छोड़ा, एसएसपी ने थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर लौटवाए रुपए

An FIR was lodged after taking 30,000 rupees from a woman, the accused was released after taking 20,000 rupees from him, the SSP attached the station in-charge to the line and got the money returned.

महिला से 30 हजार लेकर दर्ज की एफआईआर, आरोपी से 20000 लेकर छोड़ा, एसएसपी ने थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर लौटवाए रुपए

बिलासपुर/तखतपुर : न्यायधानी बिलासपुर में एसएसपी की सख्ती का असर थानेदारों पर नजर नहीं आ रहा है. आलम ये है कि पीड़ित पक्ष का जुर्म दर्ज करने और अपराधी को मुचलका पर छोड़ने के नाम पर पैसों की वसूली की जा रही है. ऐसा ही मामला तखतपुर थाना में सामने आया है. यहां पदस्थ थानेदार अनिल अग्रवाल पर महिला से 30 हजार रुपए लेकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को मुचलका देने के लिए भी 20 हजार रुपए लेने का गंभीर आरोप लगा है. मामला सामने आने पर नाराज एसएसपी ने टीआई को फटकार लगाते हुए जहां पीड़ित महिला का न सिर्फ पैसे वापस करवाए। बल्कि थानेदार को तत्काल लाइन अटैच कर दिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक तखतपुर क्षेत्र में रहने वाली महिला छेड़खानी और लूटपाट की शिकायत करने थाने पहुंची थी. महिला के पति ने आरोप लगाया कि जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचे. तो टीआई अनिल अग्रवाल ने पहले एफआईआर करने से मना कर दिया.
इसके बाद पीड़ित महिला ने एक युवक के जरिए से संपर्क किया। तब केस दर्ज कराने के लिए टीआई अग्रवाल के नाम पर 30 हजार रुपए की डिमांड की गई. पीड़ित ने एडवांस में 10 हजार रुपए भी दिए. इसके बाद जाकर थाने में एफआईआर दर्ज हुआ और फिर बाकी के रुपए दिए गए. वहीं आरोप ये भी है कि एफआईआर में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ लूट की धारा दर्ज न कर सिर्फ छेड़खानी का जुर्म दर्ज किया गया.
दूसरी तरफ पुलिस ने जब आरोपी को गिरफ्तार किया। तब टीआई ने मुचलका देने के लिए आरोपी से 20 हजार रुपए ले लिया. पीड़ित पक्ष ने इस मामले की शिकायत एसएसपी रजनेश सिंह के कार्यालय पहुंचकर कर दी. जिसके बाद एसएसपी ने थानेदार अनिल अग्रवाल को जमकर फटकार लगाते हुए फौरन महिला को पैसे वापस करने के निर्देश दिया. जिसके बाद थानेदार ने महिला को पैसे वापस लौटा दिया. वहीं एसएसपी ने इस मामले की जांच के बाद चर्चित थानेदार अनिल अग्रवाल को तत्काल लाइन अटैच कर दिया है.
प्रार्थी ने अपनी शिकायत में कहा है कि थाना प्रभारी ने कथित पत्रकार के जरिए उससे एफआईआर दर्ज करने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की. शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाने में दलाल प्रवृत्ति के लोगों का लगातार आना-जाना रहता है और उन्हीं के जरिए पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता है. और मामला दर्ज करने के लिए पैसे की मांग की जाती है.
प्रार्थी ने अपने लिखित आवेदन और मीडिया में दिए गए बयान से बिलासपुर पुलिस कप्तान रजनेश  सिंह से इस पर रोक लगाने की मांग की है. ताकि आम लोगों को इंसाफ मिल सके और थाने की कार्यप्रणाली पर भरोसा बना रहे. उसने यह भी कहा कि पुलिस की छवि ऐसे मामलों से धूमिल हो रही है. और दलाल थाने में अक्सर सक्रिय नजर आते है.
महिला संबंधित अपराध में कथित पत्रकार के जरिए पैसा लेने के बाद भी थाना प्रभारी अनिल अग्रवाल ने कार्यवाही नहीं की. जिसके बाद महिला के पति ने एसपी दफ्तर पहुंचकर थानेदार और पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए तखतपुर थाना प्रभारी को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया है. और तखतपुर थाना का प्रभार विवेक पांडे को सौंप दिया गया है.
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर एस एसपी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी हाल में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल शिकायत पर जांच टीम गठित कर दी गई है. इस मामले के सामने आने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं. लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर खाकी सवालों के घेरे में है.
निरीक्षक अनिल अग्रवाल का यह पहला काला अध्याय नहीं है. इससे पहले वे सिविल लाइन्स थाने में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) थे. जहां मिट्टी तेल चोरी के आरोपी को थाने से छोड़ने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा था. उस मामले में विभागीय जांच चली. जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया.
निरीक्षक बनने के बाद उनकी पोस्टिंग फिर बिलासपुर जिले में हुई. पहले बेलगहना चौकी, फिर कोटा थाने का प्रभार मिला। कोटा थाने में भी अवैध वसूली के आरोप लगे. जिस पर एसएसपी ने उन्हें हटा दिया था. अब तखतपुर में दोहराए गए इस कृत्य से विभाग में हड़कंप मच गया है.
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