हाईकोर्ट में साय सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दायर की याचिका, पंद्रह करोड़ का भ्रष्टाचार के मामले में कठघरे में किया खड़ा
BJP MP Brijmohan Agrawal filed a petition in the High Court against the Saurashtra government, accusing it of corruption worth Rs 15 crore.
रायपुर : छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के दो साल बाद ही पार्टी के भीतर पहली बार सबसे बड़ा, खुला झगड़ा सामने आया है. छत्तीसगढ़ भाजपा के दिग्गज नेता और रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भ्रष्टाचार के एक ऐसे मामले में अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है जिसमें पंद्रह करोड़ रुपयों का एक ऐसा टेंडर हुआ है जिसके काम पहले ही हो चुके हैं. बृजमोहन अग्रवाल ने इस मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट में अपनी ही सरकार के खिलाफ एक याचिका भी दायर कर दी है.
जिस मामले में बृजमोहन अग्रवाल अपनी ही सरकार के खिलाफ आक्रामक मुद्रा में मोर्चा संभाले हुए है उसका मंच सरकार या संगठन नहीं बल्कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी बन गया है.
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब एक कनिष्ठ मंत्री गजेंद्र यादव को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहमति से राज्य स्काउट गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष बना दिया गया और इसी दौरान इस परिषद से जुड़े 15 करोड़ के एक टेंडर पर सवाल उठे. आरोप लगा कि काम हो गया,चेहरों से काम करवा लिया और फिर टेंडर किया गया.
आरोप लगा कि स्काउट गाइड की जंबूरी के जिस आयोजन के नाम पर यह अनियमितता हुई उसके लिए राज्य शासन से मिली 10 करोड़ की राशि स्काउट गाइड के बजाए आयोजन के जिले बालोद के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में जमा कर दी गई.
अब बृजमोहन अग्रवाल ने हाईकोर्ट से निवेदन किया कि गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष के पद से हटाया जाए और 9 जनवरी से होने जा रही जंबूरी को स्थगित किया जाए.
इस मामले में बृजमोहन अग्रवाल जो राज्य स्काउट और गाइड परिषद के मनोनीत नहीं बल्कि पांच साल के लिए निर्वाचित अध्यक्ष हैं. दूसरी तरफ साय सरकार है. जिसके स्कूल शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री के अनुमोदन से बृजमोहन अग्रवाल के सामने एक बेहद कनिष्ठ मंत्री गजेंद्र यादव को महज एक सरकारी आदेश से राज्य स्काउट-गाइड परिषद का पदेन अध्यक्ष बना दिया. जानकार इस नियुक्ति की वैधानिकता पर उंगली उठा रहे हैं.
लेकिन इस नियुक्ति के साथ ही जो बात सतह पर आई वो थी छत्तीसगढ़ भाजपा में पिछले दो सालों की सबसे बड़ी लड़ाई. रोवर-रेंजर जंबूरी एक ऐसा आयोजन है. जो सामान्यतः विवादों से दूर रहता है. लेकिन इस बार आयोजन स्थल अचानक ही नया रायपुर से बदल कर बालोद कर दिया गया.
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि आयोजन के लिए राज्य शासन ने 10 करोड़ रुपए स्काउट गाइड के खाते के बजाए जिला शिक्षा अधिकारी बालोद के खाते में जमा करवा दिए.
यहां से शुरु हुई भ्रष्टाचार के आरोपों की कहानी.. जो अब पार्टी के भीतर एक ऐसे बड़े झगड़े का रुप ले चुकी है. जिसमें भाजपा सरकार को उसके ही एक वरिष्ठ सांसद ने भ्रष्टाचार के ऐसे आरोपों पर कठघरे में खड़ा कर दिया. जो दस्तावेजों से लेकर मैदान तक सामने साफ नजर आ रहा है.
एक अधिकारी के मुताबिक बालोद में इस जंबूरी के लिए बिना टेंडर के जेम पोर्टल के जरिए टेंट से लेकर खाने पीने के इंतजाम तक का सारा काम करवा दिया गया हुआ. जब भ्रष्टाचार की कहानियां सामने आने लगीं तो स्काउट गाइड की निर्वाचित परिषद यानि बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली परिषद ने इस जंबूरी को स्थगित करने का फैसला किया.
इधर यह फैसला हुआ उधर साय सरकार इसके खिलाफ मैदान में आ गई. सबसे पहले तो गजेंद्र यादव को प्रदेश स्काउट गाइड परिषद का मनोनीत पदेन अध्यक्ष नियुक्त किया गया. यह नियुक्ति विष्णुदेव साय के अनुमोदन से हुई. इसके बाद स्काउट गाइड कमिश्नर ने कहा जंबूरी स्थगित नहीं हुई है. इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना आ गई. निर्वाचित अध्यक्ष के फैसले के विपरीत राज्य आयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि आयोजन होगा.
भ्रम इस बात को लेकर कि आयोजन होगा या नहीं.
आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की X पर पोस्ट आती है. फिर उसे डिलीट कर दिया जाता है. इस बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल दोहराते हैं कि वे राज्य स्काउट गाइड परिषद के विधिवत अध्यक्ष हैं.
इस पूरे विवाद पर द लेंस से बातचीत में बृजमोहन अग्रवाल ने बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा, ‘पदेन अध्यक्ष की बात ही नहीं है. भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के छत्तीसगढ़ राज्य परिषद का अध्यक्ष मैं ही हूं. मैं निर्वाचित अध्यक्ष हूं और संगठन के संविधान के मुताबिक मेरा कार्यकाल पांच साल का होता है. जब तक मैं खुद इस्तीफा नहीं दूंगा. तब तक मैं इस पद पर बना रहूंगा.’
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से 13 दिसंबर को यह आदेश जारी किया गया था कि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पदेन अध्यक्ष होंगे.
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक गजेंद्र यादव राष्ट्रीय खुद सेवक संघ के एक बड़े पदाधिकारी के बेटे हैं. इस नाते सरकार में उन पर रोक टोक भी कम होती है.
बृजमोहन अग्रवाल ने इस विवाद के बीच स्काउट गाइड के एजेंडा क्रमांक 4 और रुल बुक के नियम 64.2 का हवाला भी दिया. उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 साल का होगा और वह इस अवधि तक लगातार पद पर रहेंगे. यानी उनके मुताबिक संवैधानिक रुप से उनका अध्यक्ष बने रहना पूरी तरह वैध है.
बृजमोहन अग्रवाल गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आयोजन स्थगित करने की घोषणा कर देते हैं. वहीं सरकार आयोजन कराने को लेकर अडिग नजर आती है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t
मामला इतना बढ़ गया है कि अब विपक्ष कांग्रेस को भाजपा पर सीधा हमला बोलने का खुला मौका मिल गया है.
मुख्यमंत्री की डिलीटेड पोस्ट: असमंजस का सबसे बड़ा संकेत
इस विवाद में सबसे अहम संकेत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के उस सोशल मीडिया पोस्ट से मिला. जिसे उन्होंने देर रात पोस्ट किया और कुछ समय बाद डिलीट भी कर दिया. मुख्यमंत्री ने लिखा था ‘राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी का आयोजन और मेजबानी करना राज्य के लिए गर्व की बात है.’
लेकिन कुछ ही देर बाद यह पोस्ट हटा ली गई.
राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सवाल उठा रहा ही कि क्या मुख्यमंत्री को भी भ्रम में रखने की कोशिशें की गईं? अगर ऐसा है तो क्या ऐसी कोशिश करने वाले लोग सरकार में ही बैठे हैं?
कांग्रेस का हमला: भाजपा में गुटबाजी उजागर
भाजपा की इस अंदरुनी लड़ाई पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘भाजपा अब एक पार्टी नहीं, बल्कि तीन गुटों में बंटी हुई है. पहला गुट शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का, दूसरा रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का और तीसरा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का.’
कांग्रेस का आरोप है कि पहले आयोजन नया रायपुर में होना था. लेकिन शिक्षा मंत्री ने इसे बालोद स्थानांतरित कर दिया और इसी बदलाव के बाद वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं.
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में राज्यपाल से हस्तक्षेप कर आयोजन रद्द करने की मांग तक कर दी है.
गजेंद्र यादव का पद अवैध : डॉ. राकेश गुप्ता
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि स्काउट-गाइड्स में उनका अध्यक्ष पद अवैध है. पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और बालोद जिला कलेक्टर की भूमिका भी शक के घेरे में है.
कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल ने इस विवाद पर तंज कसते हुए कहा, ‘जंबूरी को लेकर सरकार खुद भ्रम में है. कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए EOW में शिकायत दर्ज कराई है और जल्द ही पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा.
5 हजार रेंजर रोवर पहुंचे आयोजन स्थल
स्काउट-गाइड्स के राज्य आयुक्त ने विज्ञप्ति जारी कर सभी आरोपों को खारिज किया है.
बालोद जिले के दुधली गांव स्थित आयोजन स्थल पर देशभर से 5 हजार से ज्यादा बच्चे पहुंच चुके हैं. आने वाले दिनों में करीब 8 हजार प्रतिभागियों और विदेशों से 500 मेहमानों के पहुंचने की संभावना है. आयोजकों का साफ कहना है. ‘कार्यक्रम किसी भी हाल में स्थगित नहीं होगा.’
इस मामले में फिलहाल नजरें हाईकोर्ट पर हैं. बृजमोहन अग्रवाल की याचिका पर हाईकोर्ट के रुख से गजेंद्र यादव के स्काउट गाइड के पद और जंबूरी के आयोजन का भविष्य तय होगा. इस याचिका में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पार्टी बनाया गया है. लेकिन राजनीतिक तौर पर प्रदेश सरकार के लिए तो यह एक बड़ा झटका है जिसमें भाजपा के एक दिग्गज नेता अपनी ही सरकार भ्रष्टाचार के मामले में कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.
पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मामला भी दिल्ली जा पहुंचा है. लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अभी तक पार्टी आलाकमान ने हस्तक्षेप नहीं किया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार बृजमोहन अग्रवाल ने इस मुद्दे को उठाने से पहले पार्टी से लेकर सरकार तक सभी महत्वपूर्ण लोगों को अवगत करा दिया था.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि यह जंबूरी कार्यक्रम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार की आकंठ में डूबी हुई है. बघेल ने कहा था कि बालोद जिले के मालीघोरी में 9 जनवरी से 13 जनवरी तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के नाम पर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के पहले ही करा दिए गए हैं. जो नियमों का खुला उल्लंघन है. उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन ने पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है. अगर निष्पक्ष जांच होती है तो कई बड़े नाम सामने आएंगे.
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जेम पोर्टल के जरिए होने वाली निविदा प्रक्रिया की जानकारी पहले ही लीक होना और काम शुरु हो जाना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने मांग किया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. प्रतिनिधिमंडल में पीसीसी महामंत्री सुबोध हरितवाल, महामंत्री कन्हैया अग्रवाल , शहर अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, एजाज ढेबर, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी, प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा, अजीत कुकरेजा, प्रभजोत सिंह लाड़ी, अमित तिवारी, मो सिद्धिक, नरेश गढ़पाल शामिल थे.
छत्तीसगढ़ भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ने लिया ये फैसला
राष्ट्रीय जंबूरी को लेकर विवादों के बीच स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने बैठक की. सांसद एवं परिषद के वैधानिक अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में 5 जनवरी को हुई पदाधिकारियों की बैठक में सर्वसम्मति से 9 जनवरी से बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी को स्थगित करने का फैसला लिया गया है. यह फैसला लगातार सामने आ रहे प्रशासनिक विवादों और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को ध्यान में रखते हुए लिया गया. सांसद बृजमोहन ने कहा कि सभी तथ्यों, विवादों और आरोपों पर गहन विचार विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया कि बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है. यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर इसके बावजूद जंबूरी का आयोजन किया जाता है तो उसकी समस्त प्रशासनिक, वित्तीय एवं नैतिक जिम्मेदारी राज्य स्कूल शिक्षा विभाग की होगी.
शिक्षा विभाग ने जंबूरी के स्थगन की खबर को बताया भ्रामक
वहीं आयोजन के स्थगित होने की खबर को शिक्षा विभाग ने भ्रामक बताया. शिक्षा विभाग ने कहा, सोशल मीडिया एवं कुछ समाचार माध्यमों में यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को स्थगित कर दिया गया है. इस बारे में स्पष्ट किया जाता है कि यह सूचना पूरी तरह असत्य और निराधार है. राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी अपने निर्धारित तिथि एवं कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जा रही है. आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस 8 जनवरी को दोपहर 1 बजे जंबूरी स्थल दुधली, जिला बालोद में आयोजित की जाएगी.
आरोप और विवादों पर शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
आरोप और विवाद के बीच शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने पलटवार करते हुए बड़ा बयान दिया. उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के बालोद में प्रस्तावित राष्ट्रीय जम्बूरी में 5 करोड़ का काम जैम पोर्टल से हो रहा है. विपक्ष मिथ्या आरोप लगा रहा है. जब बिना टेंडर के पेमेंट होता या बिना टेंडर के कोई काम होता तो भ्रष्टाचार माना जाता है. शिक्षा मंत्री यादव ने कहा, कांग्रेसी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. देशभर के बच्चे छत्तीसगढ़ आएंगे और यह हमारी जिम्मेदारी है कि व्यवस्था सुचारु रुप से हो. बाकि पूरा शिविर नेशनल लेवल के डिप्टी डायरेक्टर और अन्य अधिकारियों के देखरेख में हो रहा है.
प्रेसवार्ता का इंतजार करिए, सब विषय साफ हो जाएंगे : सीएम
जंबूरी विवाद मामले में सीएम विष्णु देव साय का बयान भी सामने आया है. गरियाबंद रवाना होने से पहले सीएम ने कहा कि जंबूरी विषय में प्रेस वार्ता है. स्काउट गाइड की कमिश्नर आज प्रेस वार्ता करेंगे. प्रेसवार्ता का इंतजार करिए. सब विषय साफ हो जाएंगे.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



