राजधानी रायपुर में भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को मिली सरकारी नौकरी, सियासी विवाद गहराया, कांग्रेस का आरोप- भांग खा के चल रही सरकार

BJP councilor Kailash Behera gets a government job in Raipur, political controversy deepens, Congress alleges – the government is running on cannabis

राजधानी रायपुर में भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को मिली सरकारी नौकरी, सियासी विवाद गहराया, कांग्रेस का आरोप- भांग खा के चल रही सरकार

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है. रायपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को उनकी मां की मौत के बाद भृत्य (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली है. जिसे कांग्रेस ने असंवैधानिक और शर्मनाक करार दिया है. कांग्रेस ने राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है.
रायपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा की मां, मुन्नीबाई बेहरा, नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं. उनके निधन के बाद 16 सितंबर 2025 को जारी आदेश के मुताबिक उनकी मां के निधन के बाद पार्षद बेटे कैलाश बेहरा को अनुकंपा आधार पर मां की जगह नौकरी देने का आदेश जारी किया गया. इस फैसले को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस ने इस नियुक्ति पत्र सार्वजनिक होने के बाद सरकार और नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “विष्णु देव साय की सरकार ने ऐसी मिसाल कायम की है जो संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है. एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सरकारी नौकरी देना पूरी तरह नियम और संविधान का उल्लंघन है. यह हितों के टकराव का मामला है.”
फैसला रद्द करने की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह फैसला लगता है कि भांग खाकर लिया गया है. कोई भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि अनुकंपा नियुक्ति नहीं पा सकता. यह सीधा नियमों की अवहेलना है. कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला सत्ता का दुरुपयोग है और इससे सरकारी सेवा की मर्यादा को ठेस पहुंची है.
दीपक बैज ने मांग किया कि पार्षद को दी गई अनुकंपा नियुक्ति तत्काल रद्द की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो. इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है. अब सबकी नजर है कि नगर निगम प्रशासन इस विवादित नियुक्ति का क्या फैसला करता है आदेश रद्द करता है या पार्षद नौकरी ज्वाइन करते हैं.
दोहरी भूमिका पर उठे सवाल
कैलाश बेहरा वर्तमान में रायपुर नगर निगम के पार्षद हैं. यानी वे पहले से ही एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की भूमिका में हैं. अब उन्हें सरकारी कर्मचारी के रुप में नियुक्त किया गया है. जो संविधान और सेवा नियमों की दृष्टि से संघर्षशील पद माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में बेहरा को या तो पार्षद पद छोड़ना होगा या नियुक्ति रद्द करनी होगी. क्योंकि एक साथ दोनों पदों पर बने रहना नियम के खिलाफ है.
क्या है अनुकंपा नियुक्ति का नियम?
अनुकंपा नियुक्ति उस स्थिति में दी जाती है जब किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा काल में मृत्यु हो जाए और उसके परिजनों को आर्थिक सहायता देने के मकसद से एक योग्य सदस्य को सरकारी सेवा में लिया जाए. लेकिन यह सुविधा सिर्फ उन लोगों के लिए है जो किसी भी सरकारी पद पर पहले से कार्यरत न हों. इस मामले में चूंकि कैलाश बेहरा एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं. उनकी पात्रता पर बड़ा सवाल खड़ा होता है.
कैलाश बेहरा ने नहीं दिया जवाब
इस विवाद पर जब मिडिया ने कैलाश बेहरा से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. कई बार कॉल करने के बावजूद उन्होंने इस मसले पर अपना पक्ष नहीं रखा है. भाजपा पार्षद को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक और संवैधानिक सवालों को जन्म दे रहा है. कांग्रेस ने इसे नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला फैसला बताया है, वहीं भाजपा की तरफ से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है. नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है.
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