दुकान आवंटन में भ्रष्टाचार, भारी गड़बड़ी के कारण अवर सचिव ने लिया एक्शन, एक साथ 2 CMO सस्पेंड, आयुष्मान योजना में भी फर्जीवाड़ा उजागर
Corruption in shop allotment, Under Secretary took action due to huge irregularities, 2 CMOs suspended simultaneously, fraud exposed in Ayushman Yojana too
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बड़ी खबर है. यहां के नगरीय निकाय के दो पूर्व सीएमओ पर कड़ा एक्शन लेते हुए विभाग ने सस्पेंड कर दिया है. दो पूर्व सीएमओ पर हुई इस कार्रवाई के बाद जिले में हड़कंप मच गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व सीएमओ बसंत बुनकर और मुक्ता सिंह चौहान दोनों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नगर पालिका की संपत्ति से हाईटेक बस स्टैंड में दुकानों का निर्माण करवाया था. जिसमें निर्माण एजेंसी को स्वीकृत राशि से ज्यादा का भुगतान किया था. जो गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है.
स्वावलंबन योजना के तहत दुकानों के निर्माण और आवंटन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई. जांच में पाया गया कि इन दोनों अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान आवंटन प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया.
दुकान आवंटन में हुई धांधली के चलते दो मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को निलंबित कर दिया गया है. नगरीय प्रशासन विभाग ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है. जारी आदेश के मुताबिक पूर्व सीएमओ बसंत बुनकर और मुक्ता सिंह चौहान के खिलाफ ये कार्रवाई की गई है. इन दोनों ने सूरजपुर नगरपालिका में पदस्थापना के दौरान भारी गड़बड़ी की थी.
निलंबन अवधि में बसंत बुनकर संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन क्षेत्रीय कार्यालय अंबिकापुर में पदस्थ किया गया है. मुक्ता सिंह को भी संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन क्षेत्रीय कार्यालय अंबिकापुर में पदस्थ किया गया है.
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वहीं, बलौदाबाजार जिले के सिमगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े पैमाने पर हो रहे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है. जिसमें स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं.
ग्राम पंचायत मांढर के पंच सनत कुमार घृतलहरे ने इस बारे में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से शिकायत की थी. जिसके बाद मामले की जांच शुरु हुई. शिकायत में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं. जिनसे स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं:
फर्जी मरीज भर्ती: अस्पताल में झूठे मरीज दिखाकर योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था.
फर्जी लैब रिपोर्ट: मरीजों के नाम पर फर्जी लैब रिपोर्ट तैयार की जा रही थीं।
अवैध वसूली: ब्लड जांच के नाम पर मरीजों से 300 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली हो रही थी.
नकली बिल: मरीजों को 100 रुपये का फर्जी बिल थमाया जा रहा था.
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिमगा क्षेत्र के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को मौका देने के बजाय बाहरी लोगों को नौकरी पर रखा गया. जो सरकारी नियमों का उल्लंघन है. इसके अलावा सीएमएचओ द्वारा जिले में वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर सैकड़ों कर्मचारियों का नियम विरुद्ध संलग्निकरण करने का भी आरोप है.
इन मामलों के सामने आने के बाद प्रदेश में प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है. सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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