17 गांवों में बिजली समेत बुनियादी सुविधाओं को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन, पारसनाथ- लड़ाई विकास और अधिकार की, रोशनी की राह देख रहे लोग
Indefinite agitation for basic amenities including electricity in 17 villages, three including the president are ill, people are waiting for light.
कोरिया/सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के विकास के दावों के बीच छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों की सच्चाई एक बार फिर सामने आ गई है. कोरिया जिला और सूरजपुर जिला की सीमा से लगे 17 गांवों में बिजली, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन आंदोलन पांचवें दिन भी जारी है. कड़ाके की ठंड में 24 घंटे चल रहे इस धरने में ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक बिजली गांवों तक नहीं पहुंचेगी. आंदोलन नहीं रुकेगा. विकास के दावों के बीच कोरिया-सूरजपुर सीमा के ये गांव आज भी अंधेरे, कच्चे रास्तों और असुरक्षित नदी पार करने को मजबूर हैं,सवाल सीधा है क्या अब बुनियादी सुविधाएं जमीन पर उतरेंगी या आंदोलन की आग और तेज होगी?
ओड़गी विकासखंड के बिहारपुर तहसील अंतर्गत सीमावर्ती इलाकों में आज भी बिजली नहीं पहुंच पाई है. डिजिटलीकरण के दौर में इन गांवों में न तो नियमित विद्युत आपूर्ति है. न ही पक्की सड़कें और न ही सुरक्षित पेयजल. सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए तो गए. लेकिन अपर्याप्त बैकअप और खराब रखरखाव के कारण वे ग्रामीणों की जरुरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. कई गांवों तक पहुंचने का रास्ता इतना दुर्गम है कि चार पहिया वाहन तो दूर, बाइक से भी पगडंडियों के सहारे जोखिम उठाकर जाना पड़ता है. आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें ये है कि कोरिया सीमा से लगे सूरजपुर जिले के रसौकी,लुल्ह, खोहिर,महुली, उमझर, रामगढ़, कच्छवारी, मोहरशोप, बसनारा, जुड़वनिया, बैजनपाठ, दुधनिया, कैलाशनगर, भुसकी, छतरंग, वनगवां समेत अन्य आश्रित ग्रामों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है,
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
विद्युत विस्तार (ग्रिड कनेक्शन)
पक्की सड़कें
शुद्ध पेयजल व्यवस्था
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूर्णतः गैर-राजनीतिक है और सभी पंचायतों की सर्वसम्मति से चलाया जा रहा है.
पढ़ाई से लेकर शादियों तक प्रभावित
बिजली के अभाव का असर बच्चों की पढ़ाई, संचार सुविधाओं और युवाओं के वैवाहिक जीवन तक पर पड़ रहा है. मोबाइल नेटवर्क कमजोर है, ऑनलाइन पढ़ाई असंभव है और अंधेरे के कारण सुरक्षा की चिंता अलग.. ग्रामीण बताते हैं कि बिजली न होने के कारण कई शादियां टल चुकी हैं.
रसौकी की त्रासदीः नदी,सड़क और पुल, तीनों का अभाव
सूरजपुर जिले की ग्राम पंचायत रसौकी (कोरिया की सीमा पर) से गुजरने वाली बरंगा नदी इतनी घुमावदार है कि रसौकी-उमझर मार्ग पर तीन बार नदी पार करनी पड़ती है. पुल न होने से ग्रामीण रोज जान जोखिम में डालते हैं,ग्रामीण महेश यादव और अवध यादव के मुताबिक हाल ही में एक बीमार ग्रामीण को अस्पताल ले जाने के लिए पीठ पर बैठाकर नदी पार कराई गई., फिर बाइक को कंधे पर उठाकर दूसरी तरफ ले जाया गया. यह मार्ग कोरिया-सूरजपुर (बिहारपुर) मुख्य संपर्क माना जाता है. लेकिन करीब 20 किमी कच्ची सड़क, पुल का अभाव और बिजली नहीं—यही आज की हकीकत है.
यह लड़ाई विकास और अधिकार की है…
पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने कहा यह लड़ाई विकास और अधिकार की है, अंतिम गांव तक बिजली पहुंचेगी. तभी यह आवाज थमेगी.
राजनीतिक समर्थन भटगांव विधानसभा के चांदनी
बिहारपुर क्षेत्र में चल रहे धरने को पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े सहित कांग्रेस नेताओं का समर्थन मिला, जिला अध्यक्ष शशि सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष भगवती राजवाड़े, जिला महामंत्री राजू सिंह, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष आशीष यादव, जनपद सदस्य संतोष सिंह, लवकेश गुर्जर, विनय सिंह,नीरज सिंह समेत अन्य नेता अलग-अलग दिनों में धरनास्थल पहुंचे, मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में गांव रसौकी, उमझर, बैजनपाठ, मोहरशोप, भुसकी, कैलाशनगर सहित कई गांव भटगांव विधानसभा में आते हैं. जो मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का क्षेत्र है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि बचे हुए करीब 12 किमी कच्चे मार्ग का पक्कीकरण और विद्युत विस्तार अब पूरा होगा, रसौकी से बिहारपुर की दूरी करीब 30 किमी बताई जाती है. जिसमें आंशिक सड़क निर्माण पूर्व सरकारों में हुआ. लेकिन अधूरा है.
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