कविता वासनिक की सुरमयी प्रस्तुति, छत्तीसगढ़ी लोक धुन पर झूम उठा राजिम कुंभ, टेलीस्कोप से ग्रह नक्षत्रों को देख सकेंगे लाइव

Kavita Vasnik's melodious performance, Rajim Kumbh danced to Chhattisgarhi folk tunes, planets and stars can be seen live through telescope.

कविता वासनिक की सुरमयी प्रस्तुति, छत्तीसगढ़ी लोक धुन पर झूम उठा राजिम कुंभ, टेलीस्कोप से ग्रह नक्षत्रों को देख सकेंगे लाइव

9000 फीट की ऊंचाई पर राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का प्रमोशन, पोंड़ के खेमराज साहू ने लहराया तिरंगा
गरियाबंद : पर्वतारोहण और ट्रैकिंग के क्षेत्र में सक्रिय ग्राम पोंड़ जिला गरियाबंद के युवा खेमराज साहू ने हिमाचल प्रदेश की बर्फीली वादियों में राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का प्रचार-प्रसार कर जिले और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. उन्होंने कुल्लू जिले की सोलंग वैली से पतालसू पीक ट्रैक के दौरान करीब 9000 फीट की ऊंचाई पर माइनस 6 डिग्री तापमान में तिरंगा एवं छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर के साथ राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का संदेश दिया.

राजिम कुंभ में खगोलीय दर्शन 13 और 14 फरवरी को
विद्यार्थी और श्रद्धालु अत्याधुनिक टेलीस्कोप से ग्रह नक्षत्रों को देख सकेंगे लाइव

गरियाबंद : स्कूल शिक्षा विभाग समग्र शिक्षा एवं अटल टिंकरिंग लैब कौन्दकेरा गरियाबंद की अनूठी पहल पर 13 एवं 14 फरवरी की शाम 6:30 बजे से रात 9 बजे तक विभागीय प्रदर्शनी स्टाल के पास नवीन मेला परिसर क्षेत्र राजिम मेले में कॉस्मिक दर्शन (आकाशीय दर्शन) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है.
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पी एम सेजेस बसना (महासमुंद) तथा शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद से लाए गए उच्च क्षमता वाले अत्याधुनिक टेलीस्कोप होंगे. नक्षत्रों की कहानियों से जुड़ेगा विज्ञान और अध्यात्म एवं आयोजन की एक और विशेषता नक्षत्र कथा भी होगी जिसमें केवल वैज्ञानिक तथ्य ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और नक्षत्रों से जुड़ी रोचक सवाल जवाब भी होंगे जिससे जनमानस को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे हमारे पूर्वजों ने प्राचीन काल से ही सितारों और नक्षत्रों का सूक्ष्म अध्ययन किया था.
साथ ही अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मिलेगा मार्गदर्शन जिसके लिए विशेष रूप से खगोल विज्ञान के विशेषज्ञ और भौतिकी के व्याख्याता बी एन योगी ए टी एल प्रभारी एवं अजय कुमार भोई प्रभारी, एस्ट्रोनॉमी लैब, बसना महासमुन्द उपस्थित रहकर आकाश दर्शन में शामिल होने वाले जन-समुदाय को अंतरिक्ष की बारीकियों से अवगत कराएंगे.

कविता वासनिक की सुरमयी प्रस्तुति, छत्तीसगढ़ी लोकधुनों पर झूम उठा राजिम कुंभ

गरियाबंद : राजिम कुंभ कल्प के 11वें दिन लोककला मंच पर रिंकू एवं आस्था भट्ट की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा. कार्यक्रम की शुरुआत भक्तिमय गीत शिवनाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाए” से हुई. इसके बाद छत्तीसगढ़ी गीत “ मै होगेव दिवानी रे”, “तैं का मोहनी खवाय रे”, “बही बना दिए रे बुंदेला पगली बना दिए ना”, “देख के संगी मोला का हो जाथे रे” जैसे गीतों से मनोरंजन का तड़का लगाया। 1965 की पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म “कहीं देबे संदेश” के अमर गीत “सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे” की प्रस्तुति ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। दर्शकों को ऐसा आभास हुआ मानो आकाशवाणी रायपुर से यह गीत प्रसारित हो रहा हो। वहीं “मोर मृगनयनी” और जसगीत “ऐ चंडी दाई वो बिरकोनी वाली” ने वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया.
कार्यक्रम के अगले चरण में किशोर साहू और अनुप श्रीवास्तव के लाफ्टर शो ने समां बांध दिया। दोनों कलाकारों ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समेत कई राजनेताओं, विभिन्न जीव-जंतुओं और प्रसिद्ध हस्तियों की आवाजों की सटीक नकल कर दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया. कुछ क्षणों तक दर्शक भ्रमित हो उठे कि मानो वास्तविक हस्तियां मंच पर उपस्थित हों.
कविता वासनिक की सुरमयी प्रस्तुति ने बांधा समां
मंच पर अंतिम प्रस्तुति के रूप में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध रेडियो एवं छत्तीसगढ़ी गायिका कविता वासनिक ने अपनी सुरमयी आवाज से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल देर रात तक तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने देवी गीत “नवदुर्गा ते कहाय वो” से की. गीत की प्रस्तुति देख दर्शक उत्साह से भर उठे. कविता वासनिक ने गीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राचीन ‘नाचा’ विधा का भी सजीव परिचय कराया. इससे युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं की गहराई और गौरव का एहसास हुआ. इसके बाद अनुराग धारा के कलाकारों ने “मोला दिखाय दे न भोला” गीत की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं. “ददरिया बिन पानी के मछरी” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं “मनभावन हरेली तिहार आ गे” गीत के माध्यम से फुगड़ी, खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों की झलक दिखाकर दर्शकों को बचपन की यादों में लौटा दिया.लक्ष्मण मस्तुरिया की अमर रचना “बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमे ” गूंजते ही पुरानी यादें ताजा हो उठीं। आदिवासी गीत “महुआ झरे रे” पर मंच के बाहर भी लोग थिरकते नजर आए. “चौरा म गोंदा” और “पता ले जा रे गाड़ी वाला” जैसे गीतों ने माहौल को चरम पर पहुंचा दिया. कार्यक्रम के अंत में कलाकारों का सम्मान एसडीएम, तहसीलदार व जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर किया. मंच संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन, दुर्गेश तिवारी एवं किशोर निर्मलकर ने किया.

आज राजिम कुंभ में सजेगा लोक संस्कृति का रंग, पूनम विराट के रंग छत्तीसा से बिखरेगी छटा

गरियाबंद : राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच पर 13 फरवरी शुक्रवार को लोक और भक्ति संगीत का भव्य संगम देखने को मिलेगा। राजनांदगांव की सुप्रसिद्ध लोक गायिका पूनम विराट ‘रंग छत्तीसा’ छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सुगंध बिखेरेंगी. अन्य कार्यक्रमों में रायपुर के मनोज सेन लोक अंचल और मनेन्द्रगढ़ की जसमीत कौर जगराता प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर करेंगी. मुख्य मंच के अलावा स्थानीय मंच पर भी विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक श्रृंखला रहेगी. बागबाहरा के विजय नायक भजन संध्या प्रस्तुत करेंगे. वहीं मांढर रायपुर की रेखा जलक्षत्री भरथरी गायन से समां बांधेंगी. सुरसाबांधा के धर्मेन्द्र साहू जगराता, डूमरपाली के खेलावन पटेल रामधुनी तथा दुर्ग के दिलीप सिन्हा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देंगे. दुलना के श्रवण कुमार सार्वा जस झांकी, रायपुर के यशवंत धीवर सुगम गायन और जी जामगांव के सोमेश साहू लोककला मंच की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। बागबाहरा की आरती शेट्ठी सुगम भजन और परसट्टी महासमुंद के चुम्मन साहू जगराता से भक्ति की धारा प्रवाहित होगी.
इसी तरह पूर्व महोत्सव स्थल नदी मंच पर छुईया के मनेश्वर ध्रुव मानस गायन, धमनी के गोविंद साहू रामायण, नायकबांधा की गीता राम ओगरे मंगलभजन तथा पोखरा के मोहित गंधर्व जसगीत के साथ किशोरा खुमेश्वर सेवा मंडली की प्रस्तुति होगी.
राजिम कुंभ कल्प 2026 आस्था, संस्कृति और स्वच्छता की भव्य झलक
पंचकोशी धाम की झलक, जगमग घाट और संतों के संगम से राजिम कुंभ बना आकर्षक
राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच को इस बार अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा आकर्षक रुप दिया गया है. करीब 60 फीट चौड़े और 80 फीट लंबा यह भव्य मंच और बैकग्राउंड में पंचकोशी धाम के मंदिरों की झलक लोगों को आकर्षित कर रही है 
राजिम कुंभ मेले में स्वच्छता बनाए रखने पूरे मेला क्षेत्र में जगह-जगह डस्टबीन की व्यवस्था की गई है जिससे कागज के टुकड़े, रैपर, पॉलीथीन और पानी की बोतलें इधर-उधर न फैलें. कचरा पेटियां भरने से पहले ही कर्मचारियों द्वारा नियमित रुप से साफ कर दी जाती हैं. जिससे मेला परिसर स्वच्छ और सुव्यवस्थित नजर आ रहा है. ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ की परिकल्पना का प्रभाव यहां स्पष्ट दिखाई देता है. धार्मिक नगरी राजिम में बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु भी स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं.
’घाटों पर हाईमास्ट लाइट से जगमगाहट’
क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू के प्रयासों से नवीन मेला मैदान चौबेबांधा में नदी किनारे घाट का निर्माण कार्य जारी है वहीँ मेला प्रारंभ होने से पूर्व ऊंचे खंभों पर हाईमास्ट लाइटें लगाई गई हैं, जिनकी रोशनी से रात में भी दिन जैसा दृश्य दिखाई देता है. मेला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था की सराहना की. मेला घुमने पहुंचे विराट, सुकचंद, गिरधारी, बिहारीलाल ने बताया कि अभी इतना सुदर लग रहा हैं जब नदी के किनारे फोर लाइन सड़क निर्माण होगा, तो दृष्य और भी विहंगम लगेगा.
’मंच पर कलाकारों का हो रहा सम्मान’
कुंभ कल्प में प्रतिदिन सैकड़ों कलाकार मुख्य मंच, स्थानीय मंच और नदी मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं. राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय कलाकारों की झमाझम प्रस्तुतियों के बाद उन्हें प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जा रहा है. शिक्षा विभाग ने सांस्कृतिक रुचि रखने वाले शिक्षकों को भी मंच संचालन और अन्य जिम्मेदारियों से जोड़कर आयोजन में सहभागिता दी है.
’संत समागम से देशभर के संतों को सहज दर्शन’
राजिम कुंभ के संत समागम परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं. विभिन्न अखाड़ों के संत, महामंडलेश्वर और आचार्य यहां यज्ञ, प्रवचन और धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन दे रहे हैं. देशभर से पहुंचे संतों के सानिध्य में राजिम कुंभ की पवित्रता और भी निखर उठी है.