कोपरा नगर पंचायत चुनाव, अध्यक्ष पद में निर्दलीय गोरेलाल सिन्हा की दहाड़ से बीजेपी-कांग्रेस की राह मुश्किल, त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ा सियासी पारा
Kopra Nagar Panchayat elections, the roar of independent Gorelal Sinha for the post of president made the path of BJP and Congress difficult, political temperature increased due to triangular contest
कोपरा : गरियाबंद जिले की कोपरा नगर पंचायत चुनाव में इस बार सियासी समीकरण दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच होने वाली पारंपरिक जंग में अब निर्दलीय उम्मीदवार गोरेलाल सिन्हा की एंट्री ने मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है. मिलनसार, समाजसेवी और पत्रकार के रुप में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले गोरेलाल सिन्हा ने समर्थकों के भारी जनसमर्थन के साथ नामांकन दाखिल कर दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौती पेश कर दी है.
कोपरा नगर पंचायत में 2025 के नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन का आखरी दिन राजनीतिक गहमागहमी से भरपूर रहा. जहां बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद और पार्षद सीटों के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. वहीं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर समाजसेवी और पत्रकार गोरेलाल सिन्हा ने अपनी दावेदारी पेश कर माहौल में नई जान फूंक दी है. गोरेलाल सिन्हा ने अपने समर्थकों के साथ रिटर्निंग ऑफिसर नवीन भगत के सामने नामांकन दाखिल किया.
नगर में उनकी मजबूत पकड़ और समाज सेवा में सक्रिय भूमिका के चलते उनका नामांकन दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौती बन गया है. पत्रकारिता और समाजसेवा के जरिए उन्होंने नगरवासियों के बीच विश्वास और सम्मान हासिल किया है.
वहीँ नगरवासियों का कहना है कि बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों का कोपरा के विकास में अब तक कोई विशेष योगदान नहीं रहा है. इन हालत में गोरेलाल सिन्हा का मैदान में उतरना बड़े दलों के लिए सिरदर्द बन गया है. गोरेलाल सिन्हा की लोकप्रियता और उनकी जमीन से जुड़ी छवि उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाती है. चुनाव में उनकी मौजूदगी नगर पंचायत कोपरा में एक त्रिकोणीय मुकाबले की तरफ साफ इशारा कर रही है.
गोरेलाल सिन्हा सिर्फ एक उम्मीदवार ही नहीं. बल्कि जनता की आवाज बनकर हमेशा मैदान में उतरे हैं. उन्होंने सालों नगर की बुनियादी समस्याओं-पेयजल संकट, आवासीय पट्टे, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को लेकर संघर्ष किया है. पत्रकारिता और समाजसेवा में उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच एक भरोसेमंद चेहरा बना दिया है.
बता दें कि नगर पंचायत चुनाव में बीजेपी से रुपनारायण साहू और कांग्रेस से नंद कुमार साहू ने अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोकी है. लेकिन नगरवासियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि सालों से सत्ता में रही इन पार्टियों ने अब तक कोपरा के विकास के लिए क्या किया??? क्या जनता इस बार किसी राजनीतिक दल की बजाय एक जनता के नेता को चुनने का मन बना रही है?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो गोरेलाल सिन्हा की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी जमीन से जुड़ी छवि ने कोपरा में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिया है. पारंपरिक मुकाबले को त्रिकोणीय बना चुके गोरेलाल सिन्हा, भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए सिरदर्द साबित होने की पूरी संभावना है.
नगर पंचायत कोपरा में निर्दलीय प्रत्याशी गोरेलाल सिन्हा अपनी समाजसेवा और जनसरोकार के मुद्दों के लिए पहचाने जाते हैं. बुजुर्गों की सेवा हो या महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई, वे हमेशा मोर्चे पर आगे रहे हैं. गरीब परिवारों को आवासीय पट्टा दिलाने, विधवा महिलाओं को पेंशन दिलाने और जरुरतमंदों की मदद करने में उनकी हमेशा अहम भूमिका रही है. उनकी बढ़ती लोकप्रियता से राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है. जनता के बीच उनका जनसेवी चेहरा चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता दल के उम्मीदवारों को चुनती है या अपने लिए एक सेवक को जो हमेशा हर दुःख सुख में साथ खड़ा रहा. क्या कोपरा में इस बार राजनीति की नई इबारत लिखी जाएगी. या फिर सत्ता की बागडोर किसी पुराने हाथ में ही जाएगी? चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि जनता किसके साथ खड़ी है...
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