जिंदगी लेने आए मरीज को सिस्टम ने ही सुला दिया मौत की नींद, हार्ट अटैक के सवा घंटे बाद तक नहीं मिला इलाज, कांग्रेस ने ज्ञापन सौंप की दोषियों पर कार्यवाही की मांग

Mismanagement took the life of a middle-aged man he did not get treatment till one and a quarter hour after the heart attack anger among the family members Congress submitted a memorandum demanding action against the culprits

जिंदगी लेने आए मरीज को सिस्टम ने ही सुला दिया मौत की नींद, हार्ट अटैक के सवा घंटे बाद तक नहीं मिला इलाज, कांग्रेस ने ज्ञापन सौंप की दोषियों पर कार्यवाही की मांग

बिलासपुर : बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स के डाक्टर की लापरवाही और सिस्टम के चलते इलाज करवाने आए मरीज की लाइन में खड़े खड़े मौत हो गई. जिसका लाइव विडियो भी जमकर वायरल हो रहा है. मृतक अपने इलाज की बजाए MRD में पर्ची कटवाने के लिए अस्पताल में चक्कर लगाता रहा या फिर या कहें कि डाक्टर साहब इलाज की जगह मरीज के पर्ची के लिए चक्कर कटवाते रहे? और आखिरकार खड़े मरीज की हार्ट अटैक से मौत की दुखद खबर सामने आई.
सिम्स में एक मरीज के पर्ची काटने के दौरान अटैक से हुई मौत मामले के बाद कांग्रेस कमेटी ने इस पर विरोध जताया है. इसके बाद शनिवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी क्रमांक एक के द्वारा सिम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एस के नायक को ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.
दरअसल शुक्रवार को तालापारा निवासी ऑटो चालक मोहम्मद शमशाद हुसैन उम्र 53 साल को बेचैनी के साथ सीने में जलन हो रही थी. वह अपने बेटे के साथ सुबह 8:21 बजे सिम्स के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने इलाज करने की बजाय उन्हें ओपीडी पर्ची बनवाने एमआरडी हॉल भेज दिया. वहां लाइन में लगकर 10 रुपए की पर्ची कटाई. वापस इमरजेंसी पहुंचे तो उसे दूसरी मंजिल में मेडिसिन ओपीडी के डॉक्टर के पास भेज दिया. वे जैसे तैसे वहां पहुंचे तो डॉक्टर ने ईसीजी कराने की सलाह देते हुए 50 रुपए की पर्ची बनवाने दोबारा एमआरडी हॉल भेज दिया
शमशाद हुसैन 9:14 बजे एमआरडी हॉल पहुंचे. पर्ची बनवाने फिर से लाइन में लगे. इस बीच 9:16 बजे वे वहीं गिर गए. देखते-देखते वह बदहवास होने लगे और 9:19 बजे उन्होंने एमआरडी हॉल ही में दम तोड़ दिया.
डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो हार्ट अटैक बताया
एमआरडी हॉल में शमशाद को जमीन पर लेटे हुए एमआरडी प्रभारी शैलेंद्र रावत ने देखा तो उन्होंने वहां मौजूद गार्ड लक्ष्मी दुबे को आवाज लगाई. लक्ष्मी एक व्हीलचेयर लाया. लाइन में खड़े अन्य लोगों ने शमशाद को उठाकर व्हीलचेयर पर रखा. डॉक्टर के पास पहुंचे तो उनके शरीर में ईसीजी करने वाले उपकरण लगा दिए. चंद मिनट बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित करते हुए मौत का कारण हार्ट अटैक बताया.
परिजनों ने लापरवाही बताकर किया विरोध
परिजनों ने रोते हुए बताया कि वे घर से हंसते हुए ये कहकर ऑटो चलाते हुए निकले थे कि सीने में हल्की जलन हो रही है. डॉक्टर को दिखाकर घंटे भर में आता हूं. उनके साथ बेटा भी गया था.
उसके बेटे ने बताया कि अब्बू ने इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर से पहले सीने में जलन की बात कही. बीपी और पल्स जांच करने के बजाए बिना देखे हमें सीधा 10 रुपए की पर्ची कटवाने भेज दिया. ओपीडी के डॉक्टर ने भी कह दिया कि ईसीजी रिपोर्ट आएगी तो दवा लिख दूंगा. जांच से पहले 50 रुपए वाली पर्ची कटवाने आए थे. लेकिन अब्बू इसी दौरान लाइन में लगे-लगे ही गिर गए और हमें छोड़ गए.
कांग्रेस ने कार्रवाई की मांग
इस पूरी घटनाक्रम में कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सिम्स में सीनियर डॉक्टरों की बजाए ट्रेनिंग कर रहे चिकित्सकों को इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है. जिसकी वजह से सिम्स में बेहतर इलाज नहीं हो रहा है. जिसकी वजह से एक घर में मातम पसर गया है. ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
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अस्पताल में भर्ती कई मरीजों के परिजनों ने भी पुष्टि की है की नीचे तल से ऊपर डाक्टर चेंबर तक जाने के लिए 36 सीढ़ी चढ़कर जाना पड़ता है. क्योंकि इमरजेंसी से MRD वार्ड तक जाने वाले रास्ते की बंद करने की वजह से लिफ्ट का भी इस्तेमाल भी मरीज नही कर पाते हैं. इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं कि सीने में हो रहे दर्द से तड़फ रहे मरीज की तकलीफ को डाक्टर ने गंभीरता से क्यों नही लिया? आखिर सीने में दर्द के बाद भी मृतक शमसाद को जांच के लिए सीढ़ियों से आने-जाने के लिए क्यों मजबूर किया गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिस्टम का नियम जिसमे पर्ची जरुरी है. क्या यही नियम ही मृतक की मौत के लिए जिम्मेदार बन गया?  खैर वजह जो भी हो लेकिन सच तो यही है कि जिंदगी लेने सिम्स अस्पताल गए शमसाद को सिस्टम ने ही मौत की नींद सुला दिया.