बर्खास्तगी के बाद NHM कर्मचारियों का जेल भरो आंदोलन, 32 दिनों से हड़ताल कर रहे हजारों स्वास्थ्यकर्मियों ने झूमाझटकी के बीच दी गिरफ्तारी
NHM employees launch jail-filling protest after dismissal; thousands of healthcare workers, who have been on strike for 32 days, surrender amid scuffles and arrests.
रायपुर : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो चुका है. 18 अगस्त से शुरु हुई इस हड़ताल ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया है. अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं. ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और प्रसव सेवाएं बंद हैं. और टीकाकरण, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे जैसी जरुरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं. इस बीच नवा रायपुर के तूता में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के करीब 10 हजार NHM कर्मचारियों ने जेल भरो आंदोलन किया.
NHM कर्मचारियों ने जेल भरो आंदोलन का आगाज किया. जहां सभी कर्मचारियों ने पुलिस प्रशासन के सामने अपनी गिरफ्तारी दी. इस जेल भरो आंदोलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश के तमाम एचएम कर्मचारी शामिल होने पहुंचे. ये एनएचएम कर्मचारियों का सबसे बड़ा आंदोलन रहा. क्योंकि इसके पूर्व सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, भूख हड़ताल, बेरोजगारी, रोजगार मेला इस सब तरह के प्रदर्शन कर चुके हैं. आज की जेल भरो आंदोलन में रायपुर से लेकर सरगुजा और जगदलपुर के एचएम कर्मचारी शामिल हुए.
हड़ताल खत्म करने के लिए सरकार ने 16 सितंबर तक कर्मचारियों को काम पर लौटने का अंतिम अल्टीमेटम दिया था. लेकिन कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखी. इसके जवाब में सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए सूरजपुर में 594 कर्मचारियों की सेवाएं खत्म कर दीं. इससे पहले 16 सितंबर को बलौदाबाजार में 160 और कोरबा में 21 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया था. हालांकि कई कर्मचारी सरकार के इस कदम से पहले ही सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं.
NHM कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से 5 मांगों पर सरकार ने मौखिक सहमति दी है लेकिन बाकी 5 मांगों पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. कर्मचारियों का कहना है कि मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा. सभी मांगें लिखित रुप में पूरी होनी चाहिए. इन मांगों में सबसे प्रमुख है संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, जिसका वादा बीजेपी ने अपने “मोदी की गारंटी” मेनिफेस्टो में 100 दिनों के भीतर पूरा करने का दावा किया था. लेकिन 20 महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने 160 से ज्यादा बार नियमितीकरण के लिए ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
इन प्रदर्शनों में कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन किया. कभी खून से पत्र लिखकर, कभी पीपीई किट पहनकर, तो कभी बादाम खिलाकर सरकार को “मोदी की गारंटी” की याद दिलाने की कोशिश की। कर्मचारियों के गाने और डांस के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.
लेकिन जेल भरो आंदोलन के दौरान नवा रायपुर में एक ट्रेन को आपातकालीन ब्रेक लगाना पड़ा. क्योंकि कुछ लोग रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे. हालांकि हॉर्न बजाने के बाद ट्रेन आगे बढ़ गई और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.
दूसरी तरफ हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. संस्थागत प्रसव, ऑपरेशन, एक्स-रे, सोनोग्राफी और टीकाकरण जैसी सेवाएं पूरी तरह बंद हैं. रात के समय प्रसव और ऑपरेशन थिएटर की सेवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. हालात को संभालने के लिए सरकार ने नियमित कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने का आदेश दिया है फिर भी सिर्फ आपातकालीन सेवाएं ही उपलब्ध हो पा रही हैं.
हड़ताल को बीजेपी के दो बड़े सांसदों, बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल ने जायज ठहराया है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी कर्मचारियों के समर्थन में उतर आई हैं.
NHM कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें लिखित रुप में पूरी नहीं होंगी. तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रदेश भर में धरना, प्रदर्शन और रैलियां चल रही हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के लिए हर संभव तरीके से सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश करेंगे.
हड़ताल के कारण मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. कई अस्पतालों में ताले लटके हुए हैं. गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हैं. जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है.
NHM कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रही यह तनातनी कब खत्म होगी. यह कहना मुश्किल है. लेकिन इतना तय है कि इस हड़ताल का सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है. अब देखना यह होगा कि एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन और कितने दिन चलता है.
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