ननों की गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत, दुर्ग जेल के बाहर सांसदों का धरना, दिल्ली तक हंगामा, परिजन- लड़कियां खुद की मर्जी से जा रही थीं आगरा

Politics heated up over the arrest of nuns, MPs staged a sit-in outside Durg jail, uproar in Delhi, family said girls were going to Agra on their own will

ननों की गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत, दुर्ग जेल के बाहर सांसदों का धरना, दिल्ली तक हंगामा, परिजन- लड़कियां खुद की मर्जी से जा रही थीं आगरा

दुर्ग : मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप में केरल की दो कैथोलिक ननों और छत्तीसगढ़ के एक आदिवासी व्यक्ति की गिरफ्तारी ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिए हैं. और राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानूनों के उपयोग पर सवाल उठाए हैं. 3 आदिवासी महिलाओं में से 2 के परिवारों ने पुलिस के आरोपों का खंडन किया है और गिरफ्तारियों को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया है.
यह घटना 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई, जहां स्थानीय बजरंग दल सदस्य रवि निगम की शिकायत के बाद नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के साथ-साथ नारायणपुर के सुकमन मंडावी को पुलिस ने गिरफ्तार किया.
निगम ने आरोप लगाया कि तीनों नौकरी के बहाने तीन आदिवासी लड़कियों को जबरन धर्मांतरण के लिए आगरा ले जा रहे थे. aajtak से बातचीत में, परिवार के सदस्यों ने जबरन धर्मांतरण के आरोपों का खंडन किया.
एक महिला की बड़ी बहन ने कहा, "हमारे माता-पिता अब जीवित नहीं हैं. मैंने अपनी बहन को ननों के साथ भेजा था ताकि वह आगरा में नर्सिंग की नौकरी कर सके. मैंने पहले लखनऊ में उनके साथ काम किया था. यह मौका उसे आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा."
एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि उनके परिवार ने पांच साल पहले ईसाई धर्म स्वीकार किया था और उनकी बहन 24 जुलाई को स्वेच्छा से गई थी. उन्होंने ननों और मंडावी की तत्काल रिहाई की मांग की और गिरफ्तारियों को 'अन्यायपूर्ण और छलपूर्ण' करार दिया.
नारायणपुर एसपी रॉबिन्सन गुरिया ने पुष्टि की कि तीनों परिवारों ने 26 जुलाई को स्थानीय पुलिस को लिखित बयान सौंपे, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी बेटियों को स्वेच्छा से ननों के साथ रोजगार के लिए भेजा था. इन बयानों के बावजूद सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) अधिकारी ने aajtak को बताया कि जांच जारी है और पुष्टि के लिए सबूत अभी भी एकत्र किए जा रहे हैं.
इन गिरफ्तारियों पर पूरे भारत में ईसाई संगठनों, मानवाधिकार समूहों, चर्च नेताओं और राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. दिल्ली और केरल के तमाम जिलों सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए.
बिशप एसोसिएशन ने एक कड़ा बयान जारी कर 'राजनीतिक दबाव में निर्दोष ननों के उत्पीड़न' की निंदा की और उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग की. फादर सेबेस्टियन पूमट्टम ने कहा, "यह स्पष्ट रूप से निशाना बनाने का मामला है. ये लड़कियां नौकरी के लिए सहमति से आई थीं. धर्मांतरण विरोधी कानून वाले सभी भाजपा शासित राज्य धर्मांतरण का एक भी मामला साबित करने में विफल रहे हैं.
शिकायतकर्ता ज्योति शर्मा ने 2021 में एक चर्च को नष्ट किया था. वह मामला अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है, जहां अभियोजक ने कहा था कि वह फरार है, फिर भी वह राज्य के समर्थन से खुलेआम काम कर रही है."
आरोपियों पर मानव तस्करी और गैरकानूनी धर्मांतरण से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और इस हफ्ते के अंत में उनकी जमानत पर सुनवाई होने की उम्मीद है. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पिछले मामलों का भी संज्ञान लिया है. जहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर धर्मांतरण विरोधी कानूनों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था. जिससे ऐसी गिरफ्तारियों के कानूनी आधार पर और सवाल उठ रहे हैं.
वहीं, इंडिया गठबंधन के सांसद ननों से मिलने के लिए दुर्ग जेल पहुंचे. जहां भारी हंगामा हुआ. आरोप है कि जेल प्रशासन ने सांसदों को मिलने से रोक दिया. इसके बाद सांसदों ने धरना शुरु कर दिया.
मंगलवार को दुर्ग सेंट्रल जेल में बंद ननों से मिलने इंडिया गठबंधन के कई सांसद पहुंचे. जिनमें केरल के सांसद एनके प्रेमचंद्रन, बेनी बेहनान, फ्रांसिस जॉर्ज, कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उल्का, छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सचिव जरिता लेतफलांग, अल्पसंख्यक नेता अनिल ए थॉमस शामिल रहे. जेल परिसर के बाहर शुरुआत में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल और सांसदों को रोका गया. कहा गया कि मिलने का समय खत्म हो चुका है. इस पर सांसदों ने विरोध किया.
सांसदों ने कहा कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. जेल अधिकारियों के साथ बहस और धरने के बाद आखिरकार जेल का गेट खोला गया. सांसदों को दोबारा मिलने की अनुमति मिली. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी दुर्ग सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां वे जेल के बाहर खड़े रहे.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ननों के मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उनकी रिहाई की जानी चाहिए. ननों के साथ जाने वाली महिलाएं रोजी-रोटी के लिए स्वेच्छा से जा रही थी. बिना पूरी पड़ताल के बजरंग दल, भाजपा, आरएसएस के लोगों ने उनके साथ मारपीट किया और दबावपूर्वक उनकी गिरफ्तारी करवाई गयी. यह भाजपा की सरकार का अतिवादी अलोकतांत्रिक चरित्र है. भाजपा धर्मांतरण के नाम पर अफवाह फैलाने की राजनीति करती है और भाजपा की सरकार आरएसएस, बजरंग दल के इशारे पर गलत कार्यवाहियां करती है. भाजपा खुद धर्मांतरण को बढ़ावा देती है.
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छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों में दो ननों की गिरफ्तारी के बाद कैथोलिक समुदाय में भय व्याप्त है. इस घटना ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है और देश भर के ईसाई नेताओं और राजनेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की है. असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट (एएसएमआई) कॉन्वेंट की दो ननों को आगरा के एक कॉन्वेंट में तीन युवतियों को घरेलू कामों के लिए ले जाते समय गिरफ्तार किया गया था.
उसी कॉन्वेंट में रहने वाली एक और नन ने टीएनएम को बताया कि वहां डर का माहौल है. "हम कुछ भी कहने से डरती हैं. अगर हम बोलेंगे, तो दो चीज़ें हो सकती हैं—या तो ननों को लंबे समय तक जेल में रखा जा सकता है. या हम पर हमला हो सकता है. इस राज्य में ईसाइयों पर कई हमले हो चुके हैं. हम सुरक्षित नहीं हैं. इसलिए अभी कुछ नहीं कह सकते," उन्होंने कहा.
उन्होंने आरोप लगाया कि बजरंग दल की नेता ज्योति शर्मा ने ननों के साथ मौजूद एक युवती पर हमला किया और उसे अपनी गवाही बदलने के लिए मजबूर किया. उन्होंने कहा, "युवती ने पुलिस को बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से आई थी. लेकिन हमले के बाद उसने अपना बयान बदलकर कहा कि उसे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ लाया गया था. हालाँकि दो अन्य महिलाएँ अपने बयानों पर अड़ी रहीं कि वे अपनी मर्ज़ी से आई थीं."
कॉल खत्म करने से पहले काँपती आवाज़ में बोलते हुए नन ने बताया कि उन्हें इकट्ठा होने या खुलकर मिलने की इजाज़त नहीं है यहां तक कि साथी ईसाइयों के साथ निजी प्रार्थना के दौरान भी उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा, "हमने कम से कम एक दशक में इस क्षेत्र के एक भी व्यक्ति का धर्मांतरण नहीं कराया है. फिर भी, हम डर के साये में जी रहे हैं." 
बहनें प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस वर्तमान में दुर्ग स्थित केंद्रीय जेल में बंद हैं. पुलिस ने उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143 के तहत मानव तस्करी और छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4 के तहत आरोप लगाए हैं. इन आरोपों में 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
रायपुर डायोसीज़ को कथित तौर पर ननों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है और उसने अभी तक जमानत याचिका दायर नहीं की है.
रायपुर आर्चडायोसिस के विकर जनरल फादर सेबेस्टियन पूमट्टम ने कहा, "हम आज कुछ जटिलताओं के कारण जमानत याचिका दायर नहीं कर सके. चूँकि आरोप गंभीर हैं. इसलिए हमें सारे सबूत इकट्ठा करने थे. हम तीनों युवतियों के माता-पिता से मिलने की योजना बना रहे थे. लेकिन पुलिस ने उनसे बात करने से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया."
उन्होंने आगे बताया कि युवतियों ने शुरु में पुलिस को बताया था कि वे काम के लिए अपने माता-पिता की सहमति से आई थीं. उन्होंने कहा, "बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने थाने में एक लड़की के साथ मारपीट की और उसे अपना बयान बदलने के लिए मजबूर किया." उन्होंने आगे कहा, "युवतियों को अपनी गवाही बदलने के लिए साफ तौर पर धमकाया गया."
बजरंग दल की नेता ज्योति शर्मा को ननों को धमकी देते हुए सुना गया. जिसमें उन्होंने कहा, "अगर तुम नहीं बोलोगी तो मैं तुम्हारा चेहरा तोड़ दूंगी."
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में बजरंग दल की नेता ज्योति शर्मा पुलिस थाने के अंदर हिरासत में लिए गए लोगों को धमकाती और उन पर हमला करती दिख रही हैं. 
28 जुलाई को केरल के सांसदों ने दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाने की अनुमति न मिलने पर संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने X पर लिखा, "नारायणपुर की तीन बेटियों को नर्सिंग प्रशिक्षण और नौकरी दिलाने का वादा किया गया था. दुर्ग स्टेशन पर उन्हें दो ननों को सौंप दिया गया. जो उन्हें आगरा ले जा रही थीं. प्रलोभन देकर मानव तस्करी और धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा था. यह महिला सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला है. जांच जारी है और मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन है. कानून अपना काम करेगा. छत्तीसगढ़ एक शांतिपूर्ण राज्य है. जहाँ सभी समुदायों के लोग सद्भावना से रहते हैं। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना दुर्भाग्यपूर्ण है."
यह घटना शनिवार, 26 जुलाई को घटी, जब दो ननों और एक युवक सुखमन मंडावी को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया, जब वे नारायणपुर जिले की 18 से 19 साल की तीन महिलाओं के साथ थे. 
रायपुर डायोसीज़ ने कहा है कि नन इन महिलाओं को घरेलू काम के लिए आगरा के कॉन्वेंट ले जा रही थीं. 18 साल से ज़्यादा उम्र की इन सभी महिलाओं को 8,000 से 10,000 रुपये मासिक वेतन पर रसोई सहायक के रुप में नौकरी की पेशकश की गई थी. और उनके माता-पिता ने इसके लिए लिखित सहमति भी ली थी.
इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि तस्करी और धर्मांतरण कानूनों के तहत गिरफ्तारियां उचित थीं.
केरल से कैथोलिक चर्च की चुप्पी और कुछ लोगों द्वारा भाजपा के साथ गठबंधन कहे जाने की आलोचना सामने आई है. मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के त्रिशूर डायोसीज़ के बिशप गीवर्गीस मार कूरिलोस ने कहा कि "कुछ ईसाई समूह जानबूझकर इस विडंबना को नज़रअंदाह करते हैं. वे यहाँ मिठाइयाँ खाते हैं जबकि उत्तर में संतों की मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं. इस पाखंड को समझने के लिए बस सामान्य बुद्धि की जरुरत है."
केरल में भाजपा ने हाल के वर्षों में ईसाइयों तक पहुँचने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है. जिसमें क्रिसमस के दौरान कैथोलिक घरों का दौरा भी शामिल है. इस पर तंज कसते हुए कांग्रेस सांसद शफी परमबिल ने मीडिया से कहा कि "केरल में भाजपा पहले से ही बिशप घरों में बाँटने के लिए क्रिसमस केक मिक्स तैयार कर रही है. लेकिन धार्मिक वेशभूषा में दो ननों की गिरफ्तारी के बाद वे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं. जैसे कुछ हुआ ही न हो. दोहरा मापदंड साफ है. इस साल, जब वे केक लाएँगे, तो लोग सवाल पूछेंगे.
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