ननों की गिरफ्तारी के बीच युवती का सनसनीखेज खुलासा, कोई धर्मांतरण नहीं, अपनी मर्जी से जा रही थी आगरा, धमकी देकर ननों के खिलाफ दिलाया बयान

Sensational disclosure by a young woman amidst the arrest of nuns, there was no conversion, she was going to Agra on her own will, she was forced to give a statement against the nuns by threatening them

ननों की गिरफ्तारी के बीच युवती का सनसनीखेज खुलासा, कोई धर्मांतरण नहीं, अपनी मर्जी से जा रही थी आगरा, धमकी देकर ननों के खिलाफ दिलाया बयान

दुर्ग : छत्तीसगढ़ में केरल की दो ननों को कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद तीन युवतियों में से एक ने आरोप लगाया है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसे झूठा बयान देने के लिए मजबूर किया और उसके साथ मारपीट की. युवती ने पुलिस पर भी उनका बयान ठीक से दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया. दोनों नन और सुखमन मंडावी निर्दोष हैं.
उसने कहा कि मामले में गिरफ्तार दोनों नन व एक अन्य व्यक्ति निर्दोष हैं. और उन्हें जेल से रिहा किया जाना चाहिए. केरल की नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को सुखमन मंडावी के साथ 25 जुलाई को राज्य के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने स्थानीय बजरंग दल के एक पदाधिकारी की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया था. बजरंगदल कार्यकर्ता ने उन पर आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले की तीन युवतियों का जबरन धर्मांतरण और उनकी तस्करी करने का आरोप लगाया था.
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र के कुकराझोर गांव में पीटीआई-भाषा से बात करते हुए कमलेश्वरी प्रधान उम्र 21 साल ने कहा कि उनकी तस्करी नहीं की जा रही थी. क्योंकि वह अपनी इच्छा और अपने माता-पिता की मंजूरी से उनके साथ जा रही थीं. प्रधान ने कहा कि ‘मैं अपने माता-पिता की रजामंदी से ननों के साथ आगरा जा रही थी. वहां से हम भोपाल जाने वाले थे. जहां हमें एक ईसाई अस्पताल में काम दिया जाना था. हमें 10 हजार रुपये हर महिना वेतन के साथ-साथ भोजन, कपड़े और आवास देने का वादा किया गया था.’

उन्होंने बताया कि वह, मंडावी और जिले के ओरछा क्षेत्र की दो अन्य युवतियां 25 जुलाई की सुबह दुर्ग स्टेशन पहुंचीं. प्रधान ने कहा कि ‘नन, जिनसे मैं पहले कभी नहीं मिली थी. कुछ घंटों बाद वहां पहुंचीं. इसी बीच हमारा एक व्यक्ति से सामना हुआ. बाद में बजरंग दल के अन्य लोग भी उसके साथ आ गए. उन्होंने हमें धमकाना, गाली देना और मारपीट करना शुरु कर दिया.’
उन्होंने कहा कि “तभी रेलवे पुलिस आ गई और हमें (जीआरपी) पुलिस स्टेशन ले जाया गया. जहां एक महिला, ज्योति शर्मा, जिसने खुद को दक्षिणपंथी कार्यकर्ता बताया, उसने मुझे थप्पड़ मारा और बयान बदलने की धमकी दी.” प्रधान ने बताया कि ‘उसने मुझसे कहा कि मैं कहूं कि मुझे जबरदस्ती ले जाया जा रहा था. उसने कहा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया, तो मेरे भाई को जेल होगी और उसे पीटा जाएगा.’
उसने बताया कि “यहां तक कि पुलिस ने भी मेरा असली बयान नहीं लिया – वे ऐसी बातें लिख रहे थे जो मैंने कभी नहीं कही थीं. जब मैंने बोलने की कोशिश की. तो उन्होंने मुझे चुप रहने को कहा और पूछा कि क्या मैं घर जाना चाहती हूं.’
दसवीं कक्षा तक पढ़ी प्रधान ने कहा कि वह दिहाड़ी मजदूर के रुप में काम करती थी और 250 रुपये रोजाना कमाने के लिए नारायणपुर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए रोजाना करीब 10 किलोमीटर साइकिल चलाती थी.
उन्होंने बताया कि ‘सुखमन मंडावी, जिन्होंने मुझे नौकरी के बारे में बताया, मेरे लिए एक भाई की तरह हैं. हमारी मुलाकात चर्च के जरिए हुई थी. इससे पहले, इलाके की कई महिलाएं अस्पतालों में काम करने भी गई थीं. सुकमन की एक बहन भी बाहर एक ईसाई अस्पताल में काम करती थी और बाद में वापस आ गई.’
प्रधान ने बताया कि उनके माता-पिता किसान हैं. और गांव में खेती-बाड़ी का काम करते हैं. प्रधान ने धर्मांतरण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘मेरा परिवार पिछले चार-पांच साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है. मेरी मां बीमार रहती थीं. हम उन्हें ‘चंगाई’ सभा में ले गए. जहां से उनकी तबियत ठीक होने लगी. जिसके बाद हमने ईसाई धर्म का पालन करना शुरु कर दिया.’
प्रधान ने राज्य सरकार से तीनों आरोपियों – दो कैथोलिक नन और सुखमन मंडावी को निर्दोष बताते हुए रिहा करने की अपील की. हालांकि बजरंग दल ने प्रधान के आरोपों का खंडन किया है। बजरंग दल ने बताया, ‘हमने न तो किसी को धमकाया है और न ही पीटा है. रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरा लगा है. उनसे सच्चाई सामने आ जाएगी.”
भाजपा शासित छत्तीसगढ़ में केरल की दो कैथोलिक ननों की गिरफ़्तारी से राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. कांग्रेस और माकपा ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. हालांकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष पर ‘मामले का राजनीतिकरण’ करने का आरोप लगाया.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले की एक सत्र अदालत ने बुधवार को कहा कि कथित मानव तस्करी और अवैध धर्मांतरण के मामले में दो ननों सहित तीन लोगों की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करने का उसे अधिकार नहीं है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीश दुबे ने ज़मानत याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि उन्हें राहत के लिए विशेष एनआईए अदालत का रुख करना होगा.
वहीं आरोपियों ने दावा किया कि उनके साथ आगरा जाने वाली तीन आदिवासी लड़कियां पहले से ही ईसाई धर्म का अनुसरण कर रही थीं. इसलिए उनके धर्मांतरण का सवाल ही नहीं उठता.

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क्या है पूरा मामला?
मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का है. 25 जुलाई 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कंवर्जन (धर्मांतरण) की आशंका जताते हुए जमकर प्रदर्शन किया था. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप था कि दो नन सिस्टर और एक युवक ने छत्तीसगढ़ की तीन आदिवासी युवतियों को बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश के आगरा ले जा रहे थे. जहां उनके कंवर्जन की योजना थी. इस हंगामे की जानकारी मिलते ही GRP मौके पर पहुंची. इस दौरान पुलिस ने मौके से दो नन और युवक को धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.
2 नन की गिरफ्तारी से सियासी बवाल
दुर्ग में GRP द्वारा गिरफ्तार की गईं दोनों नन मलयाली हैं. वह ग्रीन गार्डन्स धार्मिक समुदाय की नन हैं. दोनों की गिरफ्तारी को लेकर सियासी बवाल मच गया है. इस मामले में केरल के CM पिनाराई विजयन ने दोनों नन की रिहाई के बारे में PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. वहीं, AICC महासचिव ने वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ के CM विष्णु देव साय को पत्र लिखा है. इसके अलावा 28 जुलाई को लोकसभा के बाहर इसे लेकर UDF के सांसदों ने विरोध किया. वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

वहीं इस मामले में दो ननों और एक आदिवासी युवक की गिरफ्तारी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल खड़े किए हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि ये सरकार अपने वोट बैंक के लिए अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है. प्रदेश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है. ननों की गिरफ्तारी के बाद जमानत के मामले में दुर्ग सेशन कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी उनके क्षेत्राधिकार का मामला नहीं है. एनआईए कोर्ट जाईये। ऐसे में सवाल यह खड़े हा रहा है कि राज्य की पुलिस को यह पता नहीं है कि जो धाराएं उन्होंने लगाई है वह एनआईए कोर्ट का है. ऐसे में यह पूरी प्रक्रिया ही गलत है. जब दुर्ग कोर्ट का अधिकार ही नहीं है तो कोर्ट में पेशग कर न्यायिक रिमांड पर जेल कैसे भेज दिया गया. बिना एनआईए कोर्ट में पेश किए कथित मानव तस्करी के केस में जेल कैसे भेजा जा सकता है.

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