जहरीली शराब से फिर हुई मौत!, बिना पोस्टमार्टम किए अंतिम संस्कार पर उठ रहे सवाल, कांग्रेस ने जांच और पीड़ितों को मुआवजे की रखी मांग

Uproar over deaths due to poisonous liquor, questions being raised on cremation without post-mortem, Congress demands investigation and compensation to the victims.

जहरीली शराब से फिर हुई मौत!, बिना पोस्टमार्टम किए अंतिम संस्कार पर उठ रहे सवाल, कांग्रेस ने जांच और पीड़ितों को मुआवजे की रखी मांग

बिलासपुर : बिलासपुर जिले के ग्राम लोफंदी में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन मौतों की सही तादाद और असली वजह को छिपाने की कोशिश कर रहा है.  जांच व प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग शासन प्रशासन से की है.

लोफंदी निवासी पवन कश्यप, जिसने शराब का सेवन किया था. अचानक तबीयत बिगड़ने पर 8 फरवरी को लोफंदी के हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया. जहां से उसे सिम्स रेफर किया गया. जिसकी अब मौत हो गई है.
डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी मौत हृदयगति रुकने की वजह से हुई. लेकिन असली वजह का पता बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. चुनाव के दौरान आसानी से शराब उपलब्ध होने को लेकर मृतक के परिजनों ने प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर मामले को दबाने का प्रयास किया गया तो वे चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन करेंगे.
इस घटना से क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। जहरीली शराब के कारण अभी चार अन्य लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है. जिनमें से एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया है.
ग्रामीणों का प्रशासन पर आरोप
ग्राम लोफंदी में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि प्रशासन का कहना है कि यह तादाद 7 से 8 के बीच है. प्रशासन का यह भी दावा है कि इन मौतों की वजह जहरीली शराब नहीं बल्कि शादी समारोह में परोसी गई मछली हो सकती है. जिससे फूड पॉइजनिंग हुई होगी.
लेकिन इस दावे पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. ग्रामीण राकेश्वर पटेल का कहना है कि अगर मौतें मछली खाने से हुई होती. तो शादी में शामिल महिलाओं और बच्चों की भी तबीयत खराब होती या मौत होती. लेकिन अब तक जितनी भी मौतें हुई हैं. वे सभी जहरीली शराब पीने वालों की ही हुई हैं. इससे साफ है कि प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है.
जांच समिति करेगी पड़ताल
इस गंभीर मामले को लेकर कांग्रेस ने जांच की मांग की है. कांग्रेस की तरफ से गठित जांच समिति आज दोपहर 12 बजे ग्राम लोफंदी पहुंचेगी. यह समिति अवैध शराब की स्मगलिंग और मौत के कारणों की गहराई से पड़ताल करेगी. इसके अलावा, मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना भी देगी.
पोस्टमार्टम न कराए जाने पर सवाल
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मौतें सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में होने के बावजूद मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया. इससे यह शक गहराता है कि प्रशासन किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश कर रहा है. जिनका पोस्टमार्टम हुआ है. उनकी भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है.
कांग्रेस की मांगें
जिला कांग्रेस कमेटी ने इस घटना को प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया है और सरकार से मांग की है कि:
पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.
दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
अवैध शराब तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए.
जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और मौतों के सही कारणों को उजागर किया जाए.
सरकार की चुप्पी पर सवाल
इस मामले में अब तक प्रशासन की तरफ से कोई ठोस बयान नहीं आया है. जांच के बाद ही साफ होगा कि मौतों का असल वजह क्या थी—जहरीली शराब या फूड पॉइजनिंग? लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन इस मामले को दबाने में जुटा है और अवैध शराब माफिया को बचाने की कोशिश कर रहा है.
बिलासपुर के ग्राम लोफंदी में हुई इन मौतों ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है. यह मामला केवल कुछ लोगों की मौत का नहीं. बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अवैध शराब माफिया की साजिश का प्रतीत हो रहा है. अब देखना होगा कि कांग्रेस की मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है और जांच समिति की रिपोर्ट में क्या खुलासा होता है.
इधर, घटना के बाद पीड़ित परिजन भी अब सामने आए हैं. पीड़ित परिजनों का कहना है कि गांव में बड़े पैमाने पर लोग शराब का सेवन करते हैं. आबकारी विभाग से अधिकारीयों की शह पर गांव में अवैध शराब का कारोबार चलता है. जिस पर शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है. यही वजह है बड़ी तादाद में ग्रामीणों की मौत हुई है. मृतकों में ज्यादातर शराब का रोजाना सेवन करने वाले हैं. ग्रामीणों व पीड़ित परिजनों ने इसके साथ ही फूड पॉइजनिंग से इंकार किया है.
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