रेलवे स्टेशन के बाहर मासूम बच्चा महिला की बेरहमी का शिकार, खबर पर पुलिस ने बचाई जान, बच्चे को कराया अस्पताल में भर्ती, पति ने बताई असलियत

An innocent child was brutally assaulted by a woman outside a railway station. Police rescued the child, hospitalized, and the child was later revealed by the husband.

रेलवे स्टेशन के बाहर मासूम बच्चा महिला की बेरहमी का शिकार, खबर पर पुलिस ने बचाई जान, बच्चे को कराया अस्पताल में भर्ती, पति ने बताई असलियत

रायगढ़ : रेलवे स्टेशन के बाहर 19 मई की शाम एक ऐसा नजारा सामने आया जिसने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया. करीब डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे को एक महिला की बेरहमी का शिकार हो रहा था. महिला बच्चे को लगातार मार रही थी और उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग उसे बचाने के लिए आगे आए. लेकिन महिला किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी. आखिरकार लोगों ने कोतवाली पुलिस को खबर दी. खबर मिलते ही पुलिस पेट्रोलिंग में एएसआई गौतम ठाकुर, आरक्षक गणेश पैंकरा और पेट्रोलिंग टीम रेलवे स्टेशन पहुंची और बच्चे को महिला के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकालकर अपने संरक्षण में लिया.
महिला से पूछताछ में उसने बच्चे को खरसिया से ट्रेन में लेकर आने की बात कही. उसकी बातों और व्यवहार से पुलिस को शक हुआ कि मामला सामान्य नहीं है. हालात की गंभीरता को देखते हुए महिला को थाने लाया गया. वहीं घायल और डरे हुए बच्चे को इलाज के लिए केजीएच अस्पताल पहुंचाया गया. थाना कोतवाली की महिला आरक्षक अनिता बेक ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को मातृ शिशु वार्ड (एमसीएच) में भर्ती कराया गया.
इधर थाने में महिला से पूछताछ के दौरान वह लगातार असंगत और उटपटांग बातें करती रही. जिससे उसकी दिमागी हालत सामान्य नहीं होने का अंदेशा हुआ. कोतवाली पुलिस ने महिला को सखी सेंटर में रखवाया गया. कोतवाली पुलिस ने महिला की पहचान और उसके परिजनों का पता लगाया.
जानकारी मिली कि महिला इंदिरा नगर क्षेत्र की रहने वाली है. इसके बाद उसके पति को थाने बुलाकर पूछताछ की गई. पति ने बताया कि उसकी पत्नी की दिमागी हालत समय-समय पर बिगड़ जाती है. बच्चों के बारे में पूछताछ करने पर उसने बच्चे को अपना ही बेटा बताया.
पुलिस ने बच्चे के इलाज और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसे अस्पताल में भर्ती रखा. 26 मई को जब बच्चे को डिस्चार्ज किया जाना था. तब उसके परिजन अस्पताल पहुंचे. इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को उस महिला आरक्षक अनिता बेक के सुपुर्द किया. जिन्होंने भर्ती से लेकर इलाज तक उसकी देखभाल की थी. थाना प्रभारी सुखनंदन पटेल के निर्देशन पर महिला आरक्षक ने बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया. समिति द्वारा बच्चे के माता-पिता, दादी और नानी को बुलाकर काउंसलिंग की गई और पूरे मामले की समीक्षा के बाद बच्चे को अस्थायी रूप से उसके पिता के सुपुर्द किया गया.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल कल्याण समिति ने 29 मई को फिर माता-पिता को काउंसलिंग और अन्य जरुरी प्रक्रियाओं के लिए बुलाया है. कोतवाली पुलिस भी बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है. एक तरफ जहां पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर मासूम को संभावित गंभीर नुकसान से बचाया.
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