रायपुर नकटी गांव में कोर्ट की छुट्टी के दिन पीएम आवासों पर चला बुलडोजर, 77 अवैध निर्माण ध्वस्त, अब कोलियारी में भी अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व टीम

Bulldozers razed PM Awas houses in Raipur's Nakti village on a court holiday, demolishing 77 illegal structures; a revenue team has now arrived in Koliari as well to remove encroachments.

रायपुर नकटी गांव में कोर्ट की छुट्टी के दिन पीएम आवासों पर चला बुलडोजर, 77 अवैध निर्माण ध्वस्त, अब कोलियारी में भी अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व टीम

रायपुर : राजधानी रायपुर से लगे नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई. 12 से ज्यादा जेसीबी और बुलडोजर तीन दिशाओं से गांव में दाखिल हुए. वार्ड 16 और 17 में कुल 77 अतिक्रमण हटाए गए. जिनमें करीब 60 मकान शामिल थे. ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया. पथराव हुआ. महिलाएं रोती-गिड़गिड़ाती रहीं. लेकिन सुबह 4 बजे से शाम 5 बजे तक चली इस कार्रवाई को रोका नहीं जा सका. प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी रूप से बसाया गया.
रात भर धरना, सुबह से बुलडोजर
रविवार रात से ही ग्रामीण पीपल के पेड़ के नीचे धरने पर बैठे रहे। सोमवार सुबह करीब 4 से 6 बजे के बीच जेसीबी और भारी पुलिस बल प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गया. सुबह 7 बजे लोगों ने जेसीबी के सामने बैठकर नारेबाजी की और पत्थर भी फेंके. पुलिस ने सुबह 8 बजे लोगों को हटाया और पहले मकान पर बुलडोजर चलाया.
सुबह 9 बजे मनवा यादव के घर से महिलाओं को बाहर निकालने के बाद तोड़फोड़ शुरू हुई. 9:30 बजे भूषण नाम का एक युवक छत पर ईंट लेकर विरोध करता रहा. जिसे पुलिस ने नीचे उतारा. 10 बजे साहू परिवार अपने नए मकान के दरवाजे-खिड़कियाँ खुद निकालकर बचाने में जुटा रहा. दोपहर 12 बजे से सामान काऊ कैचर वाहनों से नवा रायपुर भेजा जाने लगा. 12:30 बजे फिर पत्थरबाजी हुई जिसे पुलिस ने संभाला. दोपहर 1 बजे कार्रवाई में लगे कर्मचारियों ने भोजन किया जबकि प्रभावित परिवारों के बच्चे भूखे रहे. दोपहर 3 बजे तक तोड़फोड़ और सामान शिफ्टिंग लगातार जारी रही. शाम 4 बजे बल लौटने लगा और शाम 5 बजे कार्रवाई पूरी हुई.
प्रशासन बनाम ग्रामीण 
प्रशासन का कहना है कि 9 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर 77 अतिक्रमण थे। वहीं भारती साहू, सोनी यादव, मुकुंद साहू समेत सैकड़ों ग्रामीणों का कहना है कि वे सालों से यहाँ रह रहे हैं. ग्रामीणों के मुताबिक यह जमीन पहले चारागाह थी जो समय के साथ आबादी क्षेत्र बन गई और बाद में गांव में शामिल कर ली गई.
यहाँ बिजली, पानी जैसी सरकारी सुविधाएं भी मिलीं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 22 मकान बने और पाँच नए हितग्राहियों के नाम भी स्वीकृत हुए थे. ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल चुका था, तो अब इसे अवैध अतिक्रमण कैसे बताया जा रहा है.
तीन स्तरीय बैरिकेडिंग — ड्रोन से निगरानी
बाहरी लोगों और राजनीतिक संगठनों को रोकने के लिए गांव के तीनों प्रवेश मार्गों पर तीन स्तरीय बैरिकेडिंग की गई. माना एयरपोर्ट मार्ग से मुख्य बस्ती तक पुलिस तैनात रही.
पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी हुई और ड्रोन से भी निगरानी रखी गई। टीम प्रहरी, कोटवार और नगर निगम के काऊ कैचर वाहनों से लोगों का सामान नवा रायपुर के सेक्टर-30 तक पहुँचाया गया.
छुट्टी के दिन क्यों हुई कार्रवाई
प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए जानबूझकर ऐसा समय चुना ताकि कोई कोर्ट जाकर स्टे ऑर्डर न ला सके. गुरुवार रात सभी अतिक्रमण वाले मकानों पर अंतिम नोटिस चस्पा किया गया. इसके बाद शुक्रवार को मोहर्रम की छुट्टी थी और सोमवार को कबीर जयंती की छुट्टी. प्रशासन ने कार्रवाई के लिए इस विशेष समय का चुनाव किया ताकि अदालत से रोक न लग सके.
जिस जमीन पर बुलडोजर — वहां था विधायक निवास का प्रस्ताव
चर्चा है कि जो रायपुर नकटी गांव खाली कराया गया. वहां पहले विधायकों के लिए निवास बनाने का प्रस्ताव था. प्रशासन ने इस जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराकर खाली करा लिया है.
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कोलियारी में भी नकटी गांव जैसे हालात
धमतरी : रायपुर के नकटी गांव के बाद धमतरी के कोलियारी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर मंगलवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया. 50 से ज्यादा मकानों को खाली करने के लिए राजस्व विभाग द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने के बाद ग्रामीणों और राजस्व टीम के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई. मौके पर कुछ समय के लिए स्थिति गर्मा गई.
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की यह कार्रवाई पूरी तरह गलत है. उनका कहना है कि एक निजी संस्थान को जमीन उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग दबाव बनाकर लोगों को उनके घरों से हटाने की कोशिश कर रहा है. धमतरी में भी रायपुर के नकटी गांव जैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है.
वहीं राजस्व विभाग का कहना है कि संबंधित जमीन पर 50 से ज्यादा मकान अतिक्रमण कर बनाए गए हैं. नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत संबंधित लोगों को घर खाली करने का नोटिस और अल्टीमेटम दिया गया है. नोटिस मिलने के बाद बड़ी तादाद में ग्रामीण मौके पर इकठ्ठा हो गए और कार्रवाई का विरोध जताने लगे. इस दौरान राजस्व अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई.
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