बिजली कर्मचारी की करंट से मौत पर बवाल, शव रखकर परिजनों ने कार्यालय के सामने दो घंटे तक दिया धरना, नौकरी, मुआवजा और FIR की मांग
Chaos over the death of an electricity employee due to electric shock, family members staged a dharna in front of the office for two hours by keeping the body, demanding job, compensation and FIR
बिलासपुर/सीपत : विद्युत सब स्टेशन खम्हरिया में करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाले ठेका कर्मचारी मुंशी राम कांगो की मौत हो गई. जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा. गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर परिजन सीपत के बिजली विभाग कार्यालय के सामने पहुंच गए. और वाहन में शव रखकर दो घंटे तक धरना प्रदर्शन किया.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम मड़ई निवासी मुंशी राम कांगो उम्र 55 साल बीते 15 साल से खम्हरिया विद्युत सब स्टेशन में ठेका कर्मचारी के रुप में कार्यरत था. बुधवार दोपहर वह दादी अम्मा तालाब के पास पूर्व सरपंच के ट्यूबवेल कनेक्शन का टूटा सर्विस तार जोड़ने गया था. इसी दौरान चालू लाइन में करंट आ गया. और उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
मौत से गुस्साए लोगों ने प्रदर्शन किया. मृतक के बेटे सुनील कुमार कांगो ने पिता की मौत के लिए लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए विभाग से तीन प्रमुख मांगें रखीं जिसमे मृतक के एक परिजन को नौकरी, उचित मुआवजा और दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई. इस दौरान मृतक के परिजन, ग्राम सरपंच फिरत अनंत और विद्युत ठेका कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
धरना दो घंटे तक चला लेकिन न तो ठेकेदार और न ही विभाग का कोई बड़ा अधिकारी मौके पर पहुंचा. सिर्फ प्रभारी जेई रंजना देवांगन ही धरना स्थल पर पहुंचीं और परिजनों को समझाइश दी. उन्होंने आश्वासन दिया कि विभागीय मुआवजा जल्द दिलवाया जाएगा और अन्य जरुरी प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाएगी. इसके बाद जाकर परिजन और ग्रामीण शांत हुए.
धरना प्रदर्शन के दौरान विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों ने आपस में मदद कर 10 हजार रुपये की राशि मृतक परिवार को अंतिम संस्कार के लिए दी. लेकिन विडंबना यह रही कि सीपत एई प्रमोद चौबे तक मौके पर नहीं पहुंचे. जबकि परिजन व कर्मचारी संघ किसी बड़े अधिकारी की उपस्थिति की मांग करते रहे.
विद्युत ठेका कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश मरावी ने आंदोलन स्थल से साफ कहा कि अगर अधिकारियों को ठेका कर्मियों से विद्युत पोल या तार जोड़ने का काम कराना है. तो लिखित आदेश दें. साथ ही उन्होंने मांग किया कि मृतक परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए.
जेई रंजना देवांगन ने बताया कि विभाग सरकारी मुआवजा, अकाउंट से कटने वाली राशि, पीएफ और मृतक की विधवा को पेंशन के रूप में प्रतिमाह 7 से 8 हजार रुपए मिलेंगे. वही ठेकेदार से तत्काल 15 हजार रुपये सरपंच के खाते में दिलाया गया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके.
हालांकि परिजनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द मुआवजा और नौकरी की मांग पूरी नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे. इस पूरे मामले को लेकर विद्युत ठेका कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश मरावी ने कहा कि अगर ठेकेदारों को ठेका कर्मचारियों से खतरनाक काम कराना है तो उन्हें पहले लिखित जिम्मेदारी लेनी होगी.
यह घटना एक बार फिर इस बात की तरफ इशारा करती है कि कैसे बिना सुरक्षा मानकों और लिखित आदेश के ठेका कर्मचारियों से जोखिम भरे काम कराए जा रहे हैं और हादसे के बाद जिम्मेदार पीछे हट जाते हैं.
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