जमीन कारोबारियों पर लाठीचार्ज का विरोध:भूख हड़ताल पर बैठे MLA देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक अरुण वोरा समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद

Protest against lathicharge on land dealers: MLA Devendra Yadav, former MLA Arun Vora and several Congress leaders present on hunger strike

जमीन कारोबारियों पर लाठीचार्ज का विरोध:भूख हड़ताल पर बैठे MLA देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक अरुण वोरा समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद

दुर्ग : भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव ने जमीन की खरीदी बिक्री के लिए जारी नई गाइडलाइन में बेहतहाशा वृद्धि को लेकर उपवास रखकर विरोध जताया. विधायक ने महात्मा गांधी चौक दुर्ग में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं के साथ दिन भर विरोध प्रदर्शन कर सरकार के तुगलकी फरमान के खिलाफ आवाज उठाने वाले आम नागरिक और व्यापारियों पर पुलिस प्रशासन द्वारा की गई लाठी चार्ज एवं कार्रवाई की निंदा की.
विधायक यादव ने साय सरकार की निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो साल के कार्यकाल में इस सरकार ने सिर्फ और सिर्फ जनता की जेब से पैसा निकालने की योजना बनाई है. पहले इन्होंने बिजली बिल में 50% की छूट को बंद कर आम लोगों की जेब से पैसा निकालने की नीति बनाई. फिर जमीन की कलेक्टर गाइड लाइन की दर में 10% से लेकर 800 गुणा तक वृद्धि कर जमीन के व्यापार को खत्म करने का प्रयास किया गया है.
भाजपा सरकार के इस फैसले से न सिर्फ जमीन का कारोबार खत्म हो जाएगा. बल्कि गरीब किसानों और मध्यमवर्गीय परिवार की जमीन खरीदकर मकान बनाने का सपना भी टूट जाएगा. मंहगाई में जनता 500, 1000 से लेकर मुश्किल से 1200 वर्ग फीट का भूखंड खरीद पाती है. लेकिन नई गाइडलाइन से दरों में वृद्धि से उनका जमीन खरीदना मुश्किल हो जाएगा. किसान न तो खेती के लिए जमीन खरीद पाएगा और न ही जरुरत पड़ने पर उसे बेच पाएगा.
विधायक यादव ने कहा कि प्रदेश में जब कांग्रेस सरकार थी, तब वर्ष 2018-19 में आम जनता को राहत देने के लिए स्टांप, ड्यूटी शुल्क और पंजीयन शुल्क में 30% की कटौती कर राहत दिया था. 5 डिसमिल से कम क्षेत्रफल की जमीन की रजिस्ट्री शुरु किया गया था. जिससे गरीब किसान वर्ग अपनी जरुरत के मुताबिक अपने जमीन की कुछ हिस्से की जमीन को बेच कर मकान, विवाह, बच्चों की पढ़ाई जैसे बड़े काम कर लेते थे. आम नागरिक, जिसके पास आवास नहीं है वह छोटे भू-खण्ड का टुकड़ा खरीदकर अपना मकान बना लेते थे. लेकिन भाजपा की सरकार को आम लोगों की यह खुशी रास नहीं आई.
कलेक्टर गाईडलाइन की दरों में 100 से 800% तक की वृद्धि और 30% की छूट को खत्म कर स्टांप व पंजीयन शुल्क को 100% कर दिया गया है. पहले कलेक्टर गाइडलाइन में भिलाई के प्रमुख सड़कों से लगी जमीन 1500/- प्रति वर्गफीट थी. जो अब बढ़कर 3253 से 18500 वर्गफीट हो गया है. जिसके खिलाफ आम नागरिकों का रोष और आक्रोश सड़क पर दिखाई दे रहा है.
विरोध प्रदर्शन में पूर्व विधायक अरुण वोरा, पूर्व महापौर आरएन वर्मा, नीता लोधी, सभापति गिरवर बंटी साहू, एमआईसी सदस्य सीजू एंथोनी, लक्ष्मीपति राजू, संदीप निरंकारी, साकेत चंद्राकर, एकांश बंछोर, लालचंद वर्मा, आदित्य सिंह, सुमीत पवार,अभिषेक मिश्रा, के जगदीश, शुभम झा, इमाम, ब्लाॅक अध्यक्ष प्रमोद प्रभाकर, कलाम खान, वायके सिंह सौरभ दत्ता, सौरभ मिश्रा, शरद मिश्रा, विभोर दुरुगकर, अर्जुन शर्मा, पलाश, जुल्फीकार सिद्दीकी, आमिर सिद्दीकी, आकाश कनोजिया, शिखा राय, राजश्री उपलोवार, इंद्रजीत सिंह सैनी, अमन साव, सोनू साहू समेत अन्य मौजूद रहे.
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दुर्ग ग्रामीण अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि रजिस्ट्री दरों में बढ़ोतरी का सीधा नुकसान उन परिवारों को होगा. जो सालों की जमा‐पूंजी से छोटा प्लॉट लेकर घर बनाने का सपना देखते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उरला क्षेत्र में पहले 300-400 रुपए प्रति वर्गफीट वाली जमीन का रजिस्ट्री खर्च 30-40 हजार रुपए तक आता था.
लेकिन अब गाइडलाइन दर 2200 रुपए प्रति वर्गफीट होने से उसी जमीन की रजिस्ट्री फीस 2 से 2.5 लाख रुपए तक पहुंच गई है. ऐसे में 3 लाख का प्लॉट खरीदने वाले को 2 लाख रुपए सिर्फ रजिस्ट्री में देने होंगे। यह बोझ किसी भी आम नागरिक की क्षमता से बाहर है.