महासमुंद धान फर्जीवाड़ा : कागजों में 18 करोड़ का स्टॉक, हकीकत में फड़ खाली, 54 में से सिर्फ 2 पर FIR, बाकी 52 प्रभारियों को मिली छूट!

Stock on paper, empty depots in reality; records show stock worth ₹18 crore, yet inspections reveal empty depots—FIRs lodged against only 2 out of 54, while 52 in-charges were let off the hook.

महासमुंद धान फर्जीवाड़ा : कागजों में 18 करोड़ का स्टॉक, हकीकत में फड़ खाली, 54 में से सिर्फ 2 पर FIR, बाकी 52 प्रभारियों को मिली छूट!

महासमुंद : महासमुंद जिले में धान खरीदी को लेकर एक‎ बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. वर्ष 2025-26‎ के धान उपार्जन सीजन में जिले के केंद्रों से‎ तकरीबन 18 करोड़ रुपए से अधिक का‎ धान गायब हो गया है.
हैरानी की बात यह है कि‎ कागजों में धान का स्टॉक तो दिख रहा है. लेकिन हकीकत में फड़ों पर एक दाना भी‎ मौजूद नहीं है. इस बड़े घोटाले के बावजूद जिला प्रशासन‎ की कार्रवाई अभी तक सिर्फ दो केंद्रों तक ही‎ सीमित रही है. इससे 52 अन्य संदिग्ध केंद्र‎ प्रभारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं.
कागजों में धान, फड़ पर खाली मैदान खरीदी‎ सीजन खत्म होने के बाद जब जिला प्रशासन ने‎ भौतिक सत्यापन कराया, तो सच्चाई सामने‎ आई। आंकड़ों के मुताबिक जिले के 182 केंद्रों‎ में 1,01,95,681.20 मैट्रिक टन धान की‎ खरीदी दिखाई गई थी.
मिलर्स द्वारा उठाव के बाद भी 57,860.47 क्विंटल धान का‎ स्टॉक केंद्रों पर होना चाहिए था. लेकिन मौके‎ पर जाकर देखने पर पता चला कि 54 केंद्रों पर‎ धान का नामो-निशान नहीं है. समर्थन मूल्य‎ 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से इस‎ गायब धान की कुल कीमत 17,93,67,457‎ रुपए आंकी गई है.
प्रशासन ने खानापूर्ति करते‎ हुए अब तक सिर्फ आरंगी और बम्हनी‎ सहकारी समिति के प्रभारियों पर एफआईआर‎ दर्ज की है. बाकी 52 केंद्रों के प्रभारियों पर अब‎ तक कोई ठोस कार्रवाई न होना पूरे जिले में‎ चर्चा का विषय बना हुआ है.
निगरानी पर सवाल
नोडल अफसर पर संदेह‎ धान खरीदी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए हर केंद्र पर नोडल‎ अधिकारी और मॉनिटरिंग अधिकारी तैनात किए जाते हैं. भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य होता है. इसके बावजूद करोड़ों का धान गायब हो जाना प्रशासनिक‎ लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है. अगर समय रहते इन दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो न सिर्फ सहकारी समितियों को भारी वित्तीय नुकसान होगा.
घोटाले के टॉप 10 केंद्र
जहां से धान गायब‎ आरंगी‎ सहकारी समिति में 4437‎ क्विंटल धान गायब हुआ है. बम्हनी में 4365‎ क्विंटल धान गायब है. यहां दोनों‎ जगहों पर एफआईआर दर्ज हुई है. तोषगांव सहकारी समिति से 85 लाख 58 हजार 480 रुपए के‎ 2760.80 क्विंटल‎ धान, बढ़ईपाली सहकारी समिति से‎ 66 लाख 88 हजार 808 रुपए के 2157.68 क्विंटल‎ धान, मोंगरापाली सहकारी समिति से‎ 60 लाख 52 हजार 404 रुपए के 1952.40 क्विंटल धान‎ गायब हुआ है.
सबसे ज्यादा तोषगांव में 85 लाख का धान गायब‎ हुआ है.
सम्हर सहकारी समिति से 56.44 लाख, कोटद्वारी सहकारी‎ समिति से 55.20 लाख रुपए का 1780.65 क्विंटल, मल्दामाल‎ सहकारी समिति से 53.11 लाख रुपए का 1713.25 क्विंटल,‎ बेलसोंडा सहकारी समिति से 52 लाख 09 हजार 271 रुपए का‎ 1680.41 क्विंटल, खेमड़ा सहकारी समिति से 48 लाख 9 हजार‎ 960 रुपए का 1551.60 क्विंटल धान गायब हुआ है.
मामले में जांच पूरी हो चुकी है:पंडा सभी केंद्रों की रिपोर्ट आ चुकी है. तहसीलदार सरायपाली श्रीधर‎ पंडा और फूड इंस्पेक्टर अविनाश दुबे ने अब तक तोषगांव के‎ भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट कलेक्टर को नहीं भेजी है. जबकि बाकी जगहों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट कलेक्टर को एक महीने पहले ही भेजी जा चुकी है. श्रीधर पंडा का कहना है कि‎ मामले में जांच पूरी हो चुकी है.
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घोटाले के टॉप 10 केंद्र, जहां से गायब हुआ धान..
आरंगी : 4437 क्विंटल धान गायब (एफआईआर दर्ज)
बम्हनी : 4365 क्विंटल धान गायब (एफआईआर दर्ज)
तोषगांव : 85 लाख 58 हजार 480 रुपए का 2760.80 क्विंटल धान गायब (सबसे ज्यादा)
बढ़ईपाली : 66 लाख 88 हजार 808 रुपए का 2157.68 क्विंटल धान गायब
मोंगरापाली : 60 लाख 52 हजार 404 रुपए का 1952.40 क्विंटल धान गायब।
सम्हर : 56.44 लाख रुपए का धान गायब।
कोटद्वारी : 55.20 लाख रुपए का 1780.65 क्विंटल धान गायब।
मल्दामाल : 53.11 लाख रुपए का 1713.25 क्विंटल धान गायब।
बेलसोंडा : 52 लाख 09 हजार 271 रुपए का 1680.41 क्विंटल धान गायब।
खेमड़ा : 48 लाख 9 हजार 960 रुपए का 1551.60 क्विंटल धान गायब।