हमले के बाद इलाज के दौरान युवक की मौत पर बवाल, बहन ने पुलिस अधीक्षक से लगाई इंसाफ की गुहार, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

Uproar over youth's death during treatment following an attack; sister appeals to the Superintendent of Police for justice, demanding an impartial investigation and strict action.

हमले के बाद इलाज के दौरान युवक की मौत पर बवाल, बहन ने पुलिस अधीक्षक से लगाई इंसाफ की गुहार, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

गरियाबंद : मैनपुर थाना क्षेत्र में युवक आकाश कश्यप की संदिग्ध मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. मृतक की बहन ने मैनपुर संदिग्ध मौत मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक गरियाबंद को विस्तृत आवेदन सौंपा है. आवेदन में आरोप लगाया गया कि संज्ञेय अपराध की खबर देने के बावजूद थाना मैनपुर ने एफआईआर दर्ज नहीं की. उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(4) के तहत फौरन दर्ज कर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है.
हमले के बाद इलाज के दौरान हुई युवक की मौत
आवेदन के मुताबिक मैनपुर संदिग्ध मौत मामले में 29 जून 2026 की रात आकाश कश्यप के साथ कथित रूप से जानलेवा हमला किया गया. जिसमें उसकी बेरहमी से पिटाई हुई. नाजुक हालत में उसे गरियाबंद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान 1 जुलाई 2026 को उसकी मौत हो गई. परिजनों का कहना है कि आकाश अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से था. इसलिए इस घटना ने समुदाय की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप
मृतक की बहन आकांक्षा कश्यप का आरोप है कि घटना के बाद जब परिवार थाना मैनपुर पहुंचा और संज्ञेय अपराध की खबर देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की. तब पुलिस ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया। परिजनों का दावा है कि उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। मैनपुर संदिग्ध मौत मामले में इसी आरोप को लेकर अब पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है.
BNSS की धाराओं का दिया हवाला
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के मुताबिक संज्ञेय अपराध की खबर मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का वैधानिक दायित्व है. वहीं धारा 173(4) के तहत पीड़ित को पुलिस अधीक्षक के सामने आवेदन देकर जुर्म दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है. परिजनों का कहना है कि संदिग्ध मौत मामले में इन कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया.
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
आवेदन में मांग की गई है कि मामले में फौरन एफआईआर दर्ज कर किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए. सभी सबूतों को सुरक्षित रखा जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही यह भी मांग की गई है कि पीड़ित अनुसूचित जाति समुदाय से होने की वजह से मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए न्याय सुनिश्चित किया जाए.इस मामले के बाद अब सभी की नजर पुलिस अधीक्षक गरियाबंद की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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