अंधेर नगरी-चौपट राजा, नई नवेली दुल्हन निकली बुढ़िया, नवनिर्मित सड़क क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों मे जमकर आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग
A chaotic state with an incompetent ruler: an elderly woman turned out to be the 'newlywed bride,' a newly constructed road is already damaged, villagers are furious, and demands for an impartial inquiry are being raised.
गरियाबंद/छुरा : प्रदेश में मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है. छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जरगांव से मडेली को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्माणाधीन सड़क एवं पुलिया पहली ही बारिश का दबाव भी नहीं झेल सकी. बारिश के बाद सड़क के कई हिस्सों में भारी कटाव हो गया. जबकि पुलिया के दोनों तरफ किया गया मिट्टी का भराव बह जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क की मौजूदा स्थिति देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूरी भी नहीं हुआ था कि पहली ही तेज बारिश ने निर्माण की असली हालात सामने ला दी. कई स्थानों पर सड़क की साइड धंस गई है और पुलिया के आसपास मिट्टी बह जाने से आवागमन प्रभावित हो गया है. मार्ग पर दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को काफी सावधानी के साथ गुजरना पड़ रहा है. अगर लगातार बारिश होती रही तो सड़क के और ज्यादा क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई जा रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि अगर निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप किया गया होता तो पहली ही बारिश में सड़क इस तरह क्षतिग्रस्त नहीं होती. उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. जिसकी वजह से सड़क और पुलिया के आसपास का भराव बारिश का दबाव सहन नहीं कर सका. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता एवं कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके.
ग्रामवासियों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग किया कि क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुलिया की तत्काल मरम्मत कराई जाए. ताकि आवागमन सुचारु हो सके. इसके साथ ही पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराकर यह पता लगाया जाए कि कहीं निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया. अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए.
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को सर्वकालिक और सुरक्षित सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है. जिससे गांवों का संपर्क बेहतर हो सके. लेकिन अगर निर्माण कार्य की गुणवत्ता ही कमजोर होगी तो योजना का मकसद अधूरा रह जाएगा. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होना गंभीर चिंता का विषय है.
मिली जानकारी के मुताबिक उक्त सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, गरियाबंद के अंतर्गत कराया जा रहा है. पहली ही बारिश में निर्माणाधीन सड़क की हालत खराब होने से क्षेत्र में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किया गया तो आगामी बारिश में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है. जिससे जरगांव, मडेली सहित आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा. निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी और अगर निर्माण कार्य में किसी तरह की तकनीकी कमी या गुणवत्ता संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
अब लोगों की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं. ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा. ताकि भविष्य में सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो और ग्रामीणों को सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़क सुविधा मिल सके.
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