बिजली की मांग को लेकर 10 हजार गुसाए ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे 130C में कर दिया चक्काजाम, बोले- आश्वासन नहीं समस्या का करो निदान

Ten thousand angry villagers blocked National Highway 130C demanding electricity, saying, "Don't ask for assurances, address the problem."

बिजली की मांग को लेकर 10 हजार गुसाए ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे 130C में कर दिया चक्काजाम, बोले- आश्वासन नहीं समस्या का करो निदान

गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र के करीब 10,000  महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चों समेत ग्रामीणों ने सुबह 7 बजे से नेशनल हाईवे 130 सी मैनपुर देवभोग गरियाबंद नेशनल हाईवे मार्ग में बैठकर चक्काजाम कर दिया. जिसके चलते सड़क के दोनों तरफ दस किलोमीटर तक वाहनों की लंबी काफिला लग गई. ओड़ीसा से लेकर रायपुर तक के यात्री परेशान होते रहे.
चक्काजाम का असर कुछ ही मिनटों में दिखने लगा. हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई, यात्री पैदल सफर करते नजर आए. कई स्कूली बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सके. एंबुलेंस और जरुरी सेवाओं को भी परेशानी उठानी पड़ी. जंगल से गुजरने वाले इस मार्ग पर सन्नाटा और तनाव दोनों साफ महसूस किया गया.
चक्काजाम कर रहे ग्रामीणों का कहना है जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी तब तक वह सड़क से नहीं हटेंगे. राशन पानी लेकर चक्काजाम के लिए बैठे ग्रामीणों ने अब अंधेरे में नहीं जीना” का नारा बुलंद कर लगातार शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. स्थानीय अफसर एसडीएम, एसडीओपी और बिजली विभाग के अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को समझने की कोशिश की. लेकिन इसका ग्रामीणों पर कोई असर नहीं पड़ा. ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, लोकेश्वरी नेताम पूरन मेश्राम और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने बताया जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा चक्काजाम जारी रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ज्ञापन, आवेदन और आश्वासन के बाद भी जमीनी काम नहीं हुआ. इसी आक्रोश ने आज सड़क पर जनसैलाब खड़ा कर दिया.
उन्होंने कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहिए.. जब तक पांचो पंचायतों के हर पारा-टोले में स्थायी बिजली आपूर्ति का लिखित और समयबद्ध आश्वासन नहीं मिलता. आंदोलन और तेज किया जाएगा. राजापड़ाव का यह चक्काजाम न सिर्फ बिजली की मांग है. बल्कि प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ जनआक्रोश का बड़ा संदेश भी है कि अंधेरे में जीने को मजबूर जनता अब चुप नहीं बैठेगी.
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