जैम पोर्टल पर आधी रात को निकला समग्र शिक्षा का टेंडर, टेबल खरीदने कमाल का कारनामा, फर्नीचर खरीदी में गड़बड़ी, डुप्लीकेट बिड और ‘गायब’ टेंडर का मामला
The Samagra Shiksha Abhiyan tender was published at midnight on the JAM portal, revealing a remarkable feat in the purchase of tables, irregularities in the purchase of furniture, duplicate bids, and a case of a 'missing' tender.
रायपुर : छत्तीसगढ़ में जैम पोर्टल से खरीदी कई तरह के गेम पहले भी उजागर हो चुके हैं. सरकारी विभाग का एक और नया कारनामा सामने आया है. सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के तहत टेबल खरीदने का टेंडर कॉल किया है. यह टेंडर 27 मार्च को कॉल किया गया और इसकी आखिरी तारीख 4 मई है. यानी टेंडर भरने के लिए एक महीने से ज्यादा का समय है. तो फिर 27 मार्च को आधी रात यानी 11.52 PM पर टेंडर कॉल क्यों किया गया.
वैसे भी सरकारी विभागों की खरीदी सवालों के घेरे में रहती है तो फिर आखिर ऐसा काम क्यों किया गया. सवाल यही है कि क्या आधी रात तक सरकारी दफ्तर खुला था वो भी सिर्फ उस टेंडर के लिए जिसमें एक महीने से ज्यादा का समय दिया गया है. या फिर किसी निजी व्यक्ति के यहां से यह टेंडर निकाला गया.
यह है टेंडर का विवरण :
Bid No.: GEM/2026/B/7398617
Items: Composite Office Tables conforming to IS 8126 (V2) (and likely other related furniture items based on similar tenders)
Quantity: 42,858
Department: School Education Department, Chhattisgarh
Bid Start Date: 27-03-2026 11:52 PM
Bid End Date: 04-05-2026 1:00 PM
टेंडर को लेकर उठे सवाल :
इस टेंडर में साफ लिखा है कि बिड स्टार्ट डेट 27 मार्च 2026 11 बजकर 52 मिनट है. जबकि इसकी आखिरी तारीख 4 मई 2026 को दोपहर 1 बजे तक है. यानी ये टेंडर 27 मार्च को रात 11 बजकर 52 मिनट को जैम पोर्टल में कॉल किया गया. जब इसके लिए निविदाकारों को 38 दिन का समय दिया गया तो फिर आधी रात को टेंडर कॉल क्यों किया गया. क्या आधी रात तक स्कूल एजुकेशन का दफ्तर इस टेंडर के लिए खोला गया. क्या सक्षम अधिकारियों की अनुमति से यह दफ्तर खोला गया.
अगर सरकारी दफ्तर नहीं खोला गया तो क्या ये किसी निजी फर्म या ठेकेदार के घर से या ऑफिस से इस टेंडर को जैम पोर्टल पर देने का काम किया गया. क्या यह किसी खास को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया. सवाल यह भी है कि स्कूल शिक्षा विभाग के इतने कर्तव्यनिष्ठ वे कौन लोग हैं जो आधी रात तक इस तरह का काम करते हैं. विसिल ब्लोअर नरेश गुप्ता कहते हैं कि इस पूरे मामले की जांच होना चाहिए कि आखिर यह सब कैसे हुआ और किसने किया.
सवालों के घेरे में जैम से खरीदारी :
-छत्तीसगढ़ में जैम से खरीदारी वैसे भी कई बार सवालों के घेरे में रही है। कई बार इस तरह की खरीदी को निरस्त कर जांच भी बैठाई गई.
-आदिवासी विकास विभाग द्वारा स्टील का एक जग 32,000 रुपए में खरीदा गया, जबकि बाजार में इसकी सामान्य कीमत 400 से 1000 के बीच होती है.
-उच्च शिक्षा विभाग में महासमुंद के कॉलेज में खरीदी में करीब 1.06 करोड़ रुपये की अनियमितता का मामला सामने आया.
-सरगुजा में अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग द्वारा 1 लाख से अधिक की दर पर टीवी खरीदी गई.
-जग की सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट श्रीराम सेल्स को मिला, जिसके पते पर पड़ताल में ऐसी कोई एजेंसी नहीं मिली और दिया गया मोबाइल नंबर किराए की दुकान चलाने वाले का निकला.
-स्वास्थ्य विभाग में 104 दवाओं की खरीदी में 75 करोड़ रुपये के कथित महंगे सौदे पर विवाद चल रहा है, जहाँ सीजीएमएससी ने जेम से खरीदी को महंगा बताया है.
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