छत्तीसगढ़ में स्कूलों की हालत दयनीय, परीक्षा के दौरान शासकीय हाईस्कूल में बच्चों पर गिरा छत का प्लास्टर, 3 बच्चे घायल, छात्रा के सिर में लगे 3 टांके
The condition of schools in Chhattisgarh is deplorable; during an examination at a government high school, ceiling plaster fell on students, injuring three of them and requiring a female student to receive three stitches on her head.
दुर्ग/भिलाई : दुर्ग जिला में रसमड़ा के पास ग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाइ स्कूल में मंगलवार दोपहर त्रैमासिक परीक्षा के दौरान छत का प्लास्टर भरभराकर नीचे गिर गया. तीन बच्चे प्लास्टर की चपेट में आ गए. छात्रा द्रोपती ठाकुर के सिर में गंभीर चोट आई है. उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल रेफर किया गया. जहां सिर में चार टांके लगाए गए. अन्य दो बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया. घटना दोपहर करीब 12 बजे की आसपास की बताई जा रही है.
मिली जानकारी के मुताबिक कक्षा नवमीं के कमरे में नवमीं और दसवीं के विद्यार्थी बैठकर परीक्षा दे रहे थे. इसी दौरान तेज आवाज के साथ छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा. मलबा इतना भारी था कि नीचे रखा बेंच भी टूट गया. अचानक मलबा गिरने से बच्चों में अफरा-तफरी मच गई. स्कूल के शिक्षकों ने ग्रामीणों की मदद से घायल बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. बाद में गंभीर रूप से घायल छात्रा को जिला अस्पताल ले जाया गया.
तीन दशक पुराना भवन
बताया जताया है कि स्कूल का भवन करीब 25 से 30 साल पुराना है. फिलहाल मिडिल स्कूल के पुराने भवन में ही हाई स्कूल की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. दो साल पहले स्कूल को हाई स्कूल के रूप में उन्नयन किया गया था. कक्षा नवमीं और दसवीं में करीब 100 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं.
दो साल बाद भी भवन नहीं
स्कूल भवन करीब 25 से 30 साल पुराना है. हाई स्कूल के रूप में उन्नयन के बाद नए भवन के लिए करीब 75 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद राशि वापस चली गई. दो साल से हाई स्कूल की कक्षाएं मिडिल स्कूल के पुराने भवन में ही लग रही हैं. -रोहित साहू, पूर्व सरपंच
हादसे में तीन बच्चे घायल
संबंधित भवन की स्थिति जर्जर जैसी नहीं है. इसी वजह से उस कक्ष में बच्चों को बैठाकर परीक्षा ली जा रही थी. हादसे में तीन बच्चे घायल हुए हैं. इनमें एक को जिला अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया. सभी स्कूलों को जर्जर भवन अथवा कक्ष में बच्चों को नहीं बिठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. -विनोद सिंह, डीएमसी, समग्र शिक्षा
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