एक साल से इंसाफ की गुहार लगा रही युवती, रायपुर पुलिस की लापरवाही से आरोपी आजाद और सक्रिय -मेघा तिवारी की रिपोर्ट
The girl has been pleading for justice for a year, the accused is free and active due to the negligence of Raipur police - Megha Tiwari's report
रायपुर : मेघा तिवारी की रिपोर्ट- राजधानी रायपुर में एक युवती बीते एक साल से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है. लेकिन स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता के चलते आरोपी अब भी खुलेआम सोशल मीडिया पर सक्रिय है और पीड़िता को मानसिक और सामाजिक रुप से प्रताड़ित कर रहा है. मामला पंडरी-मोवा थाने का है.
मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता ने आरोपी विजय कुमार (निवासी राजस्थान, कार्यरत बेंगलुरु) के खिलाफ रेप और अश्लील वीडियो और फोटो वायरल करने का गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाई थी. जिसके बाद एफआईआर के बावजूद थाने द्वारा सिर्फ खानापूर्ति की गई और आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि पीड़िता द्वारा कई बार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने और सबूत पेश करने के बावजूद अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.
सूत्रों के मुताबिक आरोपी विजय कुमार ने पीड़िता को सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाया। शारीरिक शोषण किया और बाद में शादी का दबाव बनाया। जब पीड़िता ने इंकार किया तो आरोपी ने बदले की भावना से उसके और उसके परिजनों की एडिटेड अश्लील तस्वीरें और वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म पर वायरल कर दिया.
आज की हालत यह है कि आरोपी सोशल मीडिया पर अब भी सक्रिय है और पीड़िता की छवि धूमिल करने का सिलसिला जारी है. लगातार हो रही मानसिक प्रताड़ना के चलते पीड़िता खुदकुशी जैसा कदम उठाने को मजबूर हो गई है. एक संवेदनशील समाज और जिम्मेदार प्रशासन के लिए यह बेहद चिंताजनक स्थिति है.
सवाल यह है कि जब इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित है. तो आम महिलाओं की सुरक्षा की क्या गारंटी है? इस घटना ने रायपुर पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशील मामलों में निष्क्रियता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
इस पूरे मामले ने यह साबित कर दिया है कि महिला सुरक्षा कानूनों की जमीन पर क्या हालत है. वे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं. आरोपी के खुलेआम घूमते रहने से समाज में डर का माहौल है और पीड़िताओं के मन में यह धारणा गहराने लगी है कि उन्हें इंसाफ मिलना लगभग असंभव है.
अब देखना यह है कि क्या छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा?
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