हाथियों के आतंक से परेशान हजारों ग्रामीणों ने मैनपुर में जंगी रैली निकाल वन विभाग का किया घेराव, पुलिस के साथ जमकर झुमाझटकी

Thousands of villagers, troubled by the elephant menace, staged a protest rally in Mainpur, encircled the forest department, and clashed with the police.

हाथियों के आतंक से परेशान हजारों ग्रामीणों ने मैनपुर में जंगी रैली निकाल वन विभाग का किया घेराव, पुलिस के साथ जमकर झुमाझटकी

गरियाबंद/मैनपुर : मैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से परेशान हो चुके हैं. हाथियों के दल के द्वारा सैकड़ों एकड़ धान, मक्का और दलहन तिलहन की फसल को रौंदकर बुरी तरह बर्बाद किया जा चुका है. हाथी के हमले से तीन दिन पहले मैनपुर क्षेत्र के कोदोमाली निवासी एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत हो गई. हाथियों से परेशान क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने गुरूवार को मैनपुर पहुंच प्राथमिक शाला मैदान के सामने 6 घंटे तक लगातार धरना प्रदर्शन करने के बाद आदिवासी महिला प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमति लोकेश्वरी नेताम और जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, किसान संघर्ष समिति अध्यक्ष टीकम कपिल के नेतृत्व में जंगी रैली निकाल नारेबाजी करते हुए वन विभाग कार्यालय का घेराव किय.  
इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच करीबएक घंटे तक भारी झुमाझटकी हुई. बावजूद इसके प्रदर्शनकारी बेरिकेट तोड़ते हुए गेट के उपर चढ़कर जमकर नारेबाजी करने लगे. एसडीएम मैनपुर डाॅ तुलसीदास मरकाम, डीएफओ वरूण जैन, एसडीओ मनोज चंद्राकर को ज्ञापन सौपने के बाद उनके द्वारा कई समस्याओं के समाधान की बात कहने पर घंटो चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित किया गया. साथ ही यह चेतावनी दी गई कि जल्द सभी मांगो को नही पूरा किया गया तो फिर उग्र आंदोलन किया जाएगा. जिसकी सारी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी.  
मैनपुर क्षेत्र के करीब 50 से ज्यादा ग्रामो के लोगो ने पहले ही धरना प्रदर्शन रैली और वन विभाग के घेराव की चेतावनी दे दी थी. जिसके चलते जिला मुख्यालय से भारी तादाद में पुलिस के बल तैनात थे. और सुबह 11 बजे विधिवत पूजा अर्चना कर धरना प्रदर्शन शुरु किया गया.
इस दौरान आदिवासी महिला जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लोकेश्वरी नेताम ने राज्य और केन्द्र के भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा बड़े-बड़े उद्योगपतियो को फायदा पहुंचाने के लिए हसदेव, रायगढ़ और प्रदेश के कीमती जंगलो को काटा जा रहा है. जिसके चलते जंगली हाथी अब इस क्षेत्र में पहुच रहा है और इसका खामियाजा क्षेत्र के आदिवासी भुगत रहे है. आज हजारो एकड़ धान मक्का की फसल बर्बाद हो गई है. किसानो को वन विभाग और सरकार मुआवजा भी नही दे पा रही है.
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा भाजपा सरकार आदिवासी गरीब मजदूर किसान विरोधी सरकार है. इस सरकार को क्षेत्र के लोगो की समस्याओ से कोई लेना देना नहीं है. किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष टीकम कपिल ने कहा हाथियो के द्वारा नुकसान पहुंचाये जा रहे किसानो को प्रति एकड़ 75 हजार रूपये मुआवजा दिया जाना चाहिए.
धरना प्रदर्शन में बड़ी तादाद में महिलाएं अपने छोटे -छोटे दूधमुंहे बच्चे को लेकर शामिल हुए भारी गर्मी और धूप के बावजूद हजारो की तादाद में ग्रामीण पहुंचे थे. वही सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसडीओपी पुलिस विकास पाटले एवं थाना प्रभारी शिवशंकर हुर्रा दल बल के साथ मौजूद थे.
इस दौरान क्षेत्र के कई बड़े आदिवासी नेताओ ने धरना प्रदर्शन को संबोधित किया. इस मौके पर प्रमुख रुप से आदिवासी नेता महेन्द्र नेताम, टीकम नागवंशी, ब्लाॅक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, गेंदु यादव, प्रेमसाय जगत, एलियाल बाघमार, बलिराम ठाकुर, जनपद सदस्य प्रतापसिंह मरकाम, सुकचंद ध्रुव, सरपंच हनिता नायक, उपासीन नागेश, मुकेश कपिल, जन्मजय नेताम, सियाराम ठाकुर, छबि दीवान, सोहन नागेश, तनवीर राजपूत, दुलेन्द्र नेगी, नेयाल नेताम, गुजेश कपिल, पतंग सिंह, गज्जु नेगी, पुरन मेश्राम, डोमार साहू, रेवती यादव, रोहन मरकाम, कामकिशन मरकाम, युवराज नेताम, हरिश्वर पटेल, विरेन्द्र राजपूत, भानु सिन्हा, हरिशचंद नेगी, जमुना नेगी, खेलन दीवान, सुंदर कपिल, गगन नेगी, गुजरात कमलेश, कन्हैया ठाकुर, शाहिद मेमन, लोकनाथ साहू, कल्याण कपिल एवं हजारो की संख्या में क्षेत्रभर से लोग पहुंचकर जंगली रैली धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन आदिवासी नेता महेन्द्र नेताम ने किया.
प्रमुख मांगे- धरना प्रदर्शन के बाद जो ज्ञापन सौपा गया उसमें प्रमुख मांगे हाथियो के द्वारा फसल क्षति पर प्रति एकड़ 75 हजार रूपये, किसी व्यक्ति के हाथी के द्वारा जनहानि पर 50 लाख रूपये एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिया जाए. हाथियों को उनके मूल निवास क्षेत्र में वापस भेजा जाए, सालों से लंबित फसल और मकान क्षति राशि तत्काल प्रदान किया जाए, हाथी प्रभावित गांवो में सौर पेनल एवं स्ट्रीट लाईज तत्काल लगाया जाए, सभी हाथी प्रभावित ग्रामो के किसानो को हाईपावर टार्च उपलब्ध कराई जाये और हाथी आने से पहले वन विभाग इसकी सूचना ग्रामीणों को दे यह मांगे प्रमुख रुप से रही.
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