गैरहाजिर टीचर ने डाल दी हाजिरी, शराब सेवन का भी आरोप, DEO ने किया सस्पेंड, इधर जिला शिक्षा अधिकारी टांडे-बाबू सुनील यादव पर जांच के आदेश

An absent teacher marked his attendance, was also accused of consuming alcohol, and was suspended by the DEO. Meanwhile, an inquiry has been ordered against District Education Officer Tanda Babu Sunil Yadav.

गैरहाजिर टीचर ने डाल दी हाजिरी, शराब सेवन का भी आरोप, DEO ने किया सस्पेंड, इधर जिला शिक्षा अधिकारी टांडे-बाबू सुनील यादव पर जांच के आदेश

जशपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर में लगातार 5 दिनों से गैरहाजिर प्रधान पाठक ने गलत तरीके से अपनी हाजिरी लगाने के कारण DEO ने सस्पेंड कर दिया है. प्रधान पाठक पर स्कूल में शराब सेवन का भी आरोप है.
बताया गया है कि अक्सर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने वाले प्रधान पाठक 5 दिनों तक गैरहाजिर रहे और बाद में उन्होंने रजिस्टर पर पूरी हाजिरी दर्शा दी. इस मामले की शिकायत के बाद जांच हुई और रिपोर्ट सही मिलने के बाद DEO द्वारा सस्पेंड की कार्यवाही की गई.
मिली जानकारी के मुताबिक जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला ढोढापानी के प्रधान पाठक सुनील कुजूर को सस्पेंड कर दिया गया है. बिना सूचना के पांच दिनों तक स्कूल से गैरहाजिर रहने, हाजिरी रजिस्टर में गलत एंट्री करने और शराब सेवन के आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.
जांच में यह आरोप भी सामने आया कि प्रधान पाठक अक्सर शराब का सेवन करते थे और इसी वजह कई बार विद्यालय नहीं पहुंचते थे. ग्रामीणों का कहना था कि शिक्षक की इस आदत की वजह से स्कूल का माहौल भी प्रभावित हो रहा था और बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा था.
जांच टीम ने विद्यालय के छात्रों से भी बातचीत की. छात्रों के बयान में भी यह बात सामने आई कि कई बार प्रधान पाठक स्कूल नहीं आते थे. जिससे पढ़ाई बाधित होती थी. इन सभी तथ्यों और बयानों को आधार बनाकर जांच प्रतिवेदन तैयार किया जांच पूरी होने के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी पत्थलगांव द्वारा विस्तृत प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर को भेजा गया. रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधान पाठक सुनील कुजूर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई कर दी.
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जिला शिक्षा अधिकारी टांडे-बाबू सुनील यादव पर जांच के आदेश

बिलासपुर : जिला शिक्षा विभाग में नियुक्ति, अटैचमेंट और प्रमोशन में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने अब नया मोड़ ले लिया है. कांग्रेस नेता अंकित गौराहा की शिकायत के बाद संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा आर.पी.आदित्य ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए हैं. इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है. जिसे सात दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है.
संयुक्त संचालक कार्यालय से जारी पत्र के मुताबिक जांच समिति में जांजगीर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा,सहायक संचालक जे.के.शास्त्री और बिल्हा विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक को शामिल किया गया है. आदेश जारी होते ही शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है और इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
अंकित गौराहा ने शिक्षा विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति प्रक्रिया,अटैचमेंट,युक्ति युक्तकरण और प्रमोशन में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए संभागायुक्त और संभागीय संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा विभाग में नियमों को दरकिनार कर कई फैसले लिए गए. जिनसे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं.
गौरहा का कहना है कि शिकायत के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई. उन्होंने सीधे संयुक्त संचालक से मुलाकात कर अपने पत्र पर कार्रवाई की मांग की और यह भी आरोप लगाया कि संभागायुक्त के निर्देशों की अनदेखी करते हुए जिला स्तर पर जांच शुरू करने में जानबूझकर टालमटोल की गई.
अंकित गौराहा ने बताया कि इस मामले में पहले भाजपा नेता केन्द्रीय मंत्री ने कलेक्टर से शिकायत की थी. उस समय कलेक्टर ने जांच का आदेश जिला शिक्षा विभाग को दिया. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया.
इस टीम में बिल्हा और मस्तूरी के बीईओ को शामिल किया गया. जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव को क्लीन चिट दे दी गई. गौरहा का आरोप है कि तकनीकी रूप से कोई बीईओ जिला शिक्षा अधिकारी की जांच नहीं कर सकता. इसके बावजूद ऐसी जांच कराकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई.
संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित नई तीन सदस्यीय जांच समिति पर भी अब विवाद खड़ा हो गया है. अंकित गौरहा ने कहा कि समिति में शामिल बिल्हा विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक पहले भी उस दो सदस्यीय जांच टीम के सदस्य रह चुके हैं. जिसने जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव को क्लीन चिट दी थी.
उनका कहना है कि जिस अधिकारी ने पहले ही आरोपित अधिकारियों को निर्दोष बताकर रिपोर्ट दे दी. वही अब दोबारा जांच समिति में शामिल होकर निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते है. इससे पूरी जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अंकित गौरहा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस जांच समिति के गठन पर गंभीर आपत्ति है. उन्होंने संयुक्त संचालक से मांग किया है कि भूपेंद्र कौशिक को समिति से अलग कर किसी अन्य अधिकारी को शामिल करते हुए नई तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई जाए. ताकि जांच निष्पक्ष और विश्वसनीय हो सके.
इसके साथ ही गौरहा ने यह भी मांग रखी है कि जांच प्रक्रिया के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव को विभागीय कार्यों से पूरी तरह दूर रखा जाए. उनका कहना है कि जब तक आरोपित अधिकारी अपने पद पर बने रहेंगे. तब तक निष्पक्ष जांच की संभावना पर सवाल बने रहेंगे.
अंकित गौरहा ने चेतावनी दी है कि अगर जांच समिति में बदलाव नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हुई. तो संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
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