छह महीने में ढह गई अरबों की सड़क, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा की लागत से हुआ निर्माण, भ्रष्टाचार की काली परत उजागर

Road worth billions collapsed in six months, constructed at a cost of more than 2 crores for the President's adopted sons, dark layer of corruption exposed

छह महीने में ढह गई अरबों की सड़क, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा की लागत से हुआ निर्माण, भ्रष्टाचार की काली परत उजागर

भ्रष्टाचार की खुली पोल, पहली ही बारिश में उखड़ी सड़क

तखतपुर : बैगा आदिवासी (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र) के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 2 करोड़ 6 लाख की लागत से बनाई गई सड़क पहली ही बारिश में उखड़ और धंसने लगी है. बता दें कि निर्माण कार्य शुरु होते ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे और अब सड़क की बुरी हालत ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी है. कांग्रेस नेता और क्षेत्रवासियों ने ठेकेदार और अधिकारी पर सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है.
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया. निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले ठेकेदार सुरेश अग्रवाल और संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण किया गया और पहली ही बारिश में इसकी परतें उखड़ गई.
इस मामले में स्थानीय प्रशासन और प्रधानमंत्री जनमन सड़क विभाग के अधिकारी ठेकेदार का बचाव करते नजर आ रहे हैं. निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई थी. फाइलों में सब कुछ सही बताया गया. लेकिन हकीकत अब सबके सामने है. योजना के तहत बनने वाली अन्य परियोजनाओं पर भी अब निगरानी की मांग उठ रही है.
इस मामले में कांग्रेस प्रदेश महासचिव रामेश्वर पूरी गोस्वामी का कहना है कि ये आदिवासियों के साथ विकास के नाम पर धोखा है. ऐसे भ्रष्टाचारियों पर नकेल नहीं कसी गई तो पूरे अभियान की साख पर सवाल उठ जाएगा. ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. वहीं कुछ संगठनों ने इस योजना के तहत बन रही अन्य सड़कों की भी गुणवत्ता जांच कराने की मांग उठाई है.
क्षेत्र क्रमांक एक के जनपद सदस्य श्याम सिंह मरावी ने भी दो करोड़ से ज्यादा की लागत से प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनी गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण से संबंधित अधिकारी और ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है. मरावी ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन सड़क निर्माण वहां निवास कर रहे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा आदिवासियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए कराया गया है. लेकिन संबधित ठेकेदार ने इस सड़क निर्माण में जमकर भ्रष्ट्राचार किया है. पहली ही बारिश में कुछ महीने पहले बनी सड़क उखड़ने और धसने लगी है. ये सड़क भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई है. उन्होंने शासन-प्रशासन से घटिया सड़क निर्माण के जिम्मेदार ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करते हुए सड़क को दोबारा अच्छे से बनाने की मांग की है.
इस मामले में प्रधानमंत्री ग्राम जनमन सड़क योजना के कार्यापालन अभियंता परीक्षित सूर्यवंशी ने मौके पर जाकर ही कुछ बता पाने की बात कही। वह गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण होने की बात करते हुए ठेकेदार का बचाव करते रहे. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सड़क पूरी बन गई और जिम्मेदार दफ्तर में ही बैठकर फाइल देखकर बिल पास कर दे रहे हैं. जरुरी नहीं समझते कि मौका निरीक्षण कर सड़क की गुणवत्ता की जांच कर ली जाए. जिससे एक बड़े भ्रष्ट्राचार को रोका जा सके.
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छह महीने में ढह गई अरबों की सड़क, भ्रष्टाचार की सबसे काली परत उजागर

रायगढ़ : लैलूंगा क्षेत्र की बहुप्रचारित लैलूंगा-बाकरुमा सड़क अब सड़क कम, मौत का मैदान ज्यादा बन चुकी है. महज़ छह महीने पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क इतनी बुरी तरह बिखर गई है कि हर मोड़ पर भ्रष्टाचार के गड्ढे और लूट की दरारें साफ दिखाई दे रही हैं. यह महज डामर के बहने की कहानी नहीं. बल्कि व्यवस्था के सड़ने की बदबूदार गाथा है, जिसे शासन-प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत ने जन्म दिया है.
ग्रामीणों का सवाल बेहद स्पष्ट है कि क्या कोई सड़क छह महीने में यूं ही टूट सकती है? अगर नहीं, तो फिर इसके पीछे किसकी साजिश थी?
सड़क निर्माण के दौरान बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे. उद्घाटन के वक्त माला पहनने की होड़ थी. लेकिन आज जब सड़क कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गई है. तो कोई नेता, अधिकारी या इंजीनियर सामने नहीं आ रहा है.
बाकरुमा निवासी किसान झिंगुर राम सिदार का कहना है कि  “हमारे खेत काटकर सड़क बनाई गई. लेकिन न मुआवज़ा मिला. न रास्ता छोड़ा. अब यह सड़क टूटी पड़ी है. फसल लाने का रास्ता भी नहीं बचा. ये सड़क नहीं. हमारे हिस्से की मौत है.”
सड़क पर डामर नहीं बचा. कीचड़ की मोटी परत जमी है. बारिश की पहली बूंद ने ही घटिया सामग्री और तकनीकी लापरवाही की परतें उधेड़ दीं.ग्रामीणों का आरोप है कि PWD अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से महज खानापूर्ति कर सड़क बनाई गई. घटिया गिट्टी, कम डामर, और सड़क किनारे नाली तक नहीं छोड़ी गई. अब हर दिन दर्जनों दोपहिया वाहन फिसलते हैं. लोग गिरकर घायल हो रहे हैं, और ट्रैक्टर-गाड़ियां कीचड़ में धँस रही हैं.
इस सड़क निर्माण के लिए कई किसानों की उपजाऊ ज़मीन अधिग्रहित की गई. लेकिन अधिकांश को आज तक मुआवज़ा नहीं मिला. ग्रामीण बताते हैं कि
न तो कोई ठोस सर्वे हुआ.
न दस्तावेज़ दिए गए,
खेतों में जाने के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता छोड़ा गया
 “सरकार ने कहा विकास होगा. लेकिन अब खेत तक जाने के लिए भी गांव वालों को तीन किलोमीटर घूमना पड़ता है. फसलें बर्बाद हो रही हैं. अफसर कान में तेल डालकर बैठे हैं.”
इस जर्जर सड़क से स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज, बुजुर्ग, किसान सभी जान हथेली पर रखकर गुजर रहे हैं. रोज हादसे हो रहे हैं। कहीं बाइक सवार खाई में गिर रहा है. तो कहीं ऑटो पलटकर घायल यात्री अस्पताल पहुंच रहे हैं. लेकिन अब तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया. न मरम्मत हुई और न ही किसी की जिम्मेदारी तय की गई.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क का उद्घाटन हुआ था. स्थानीय विधायक से लेकर सरपंच तक फोटो खिंचवाने दौड़े थे. अब जब सड़क बर्बाद हो गई. जनता हादसों का शिकार हो रही है. तो ये सभी गूंगे और बहरे क्यों हो गए?
“क्या जनता सिर्फ चुनाव जीतने की सीढ़ी है. या सच में उनकी कोई जिम्मेदारी भी है?”
जनता की मांगें – अब सिर्फ मरम्मत नहीं, सीधा एक्शन चाहिए
ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से स्पष्ट और ठोस मांगें रखी हैं:
सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय न्यायिक या तकनीकी जांच कराई जाए
जिम्मेदार ठेकेदार और PWD अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज हो
प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवज़ा दिया जाए
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच हो – किसके संरक्षण में यह लूट हुई.
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि “अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सड़कों पर चक्का जाम होगा. तहसील कार्यालय का घेराव होगा और रायगढ़ कलेक्टरेट तक पदयात्रा निकाली जाएगी. अब चुप नहीं बैठेंगे.
लैलूंगा-बाकरुमा मार्ग अब भ्रष्टाचार, शासन की विफलता और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है. अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सड़क पूरी व्यवस्था की कब्रगाह बन जाएगी, जिसमें आम जनता के सपने हर रोज़ दफन होते रहेंगे.
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