बरगद की कटाई पर गांव में बवाल, 3 हजार का दंड, नहीं देने पर पटेल परिवार का हुक्का-पानी बंद, पीड़ित ने धमतरी कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार, जांच शुरु
Village uproar over banyan tree felling, fine of 3,000, Patel family cut off from food and water supply if not paid, victim appeals to Dhamtari collector for justice, investigation begins
धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में दबंगों द्वारा कमजोर लोगों का हुक्कापानी बंद करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक बार फिर दबंगों ने एक परिवार का हुक्कापानी बंद कर दिया है. जिससे पीड़ित परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसी परेशानी को लेकर पीड़ित परिवार ने इंसाफ की गुहार कलेक्टर से लगाई है.
पेड़ कटाई से नाराज थे दबंग लोग
मिली जानकारी के मुताबिक धमतरी जिले के सिवनी खुर्द गांव के प्रमुखों की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित ईश्वर पटेल ने बताया कि उनकी लगानी जमीन पर एक पुराना बरगद का पेड़ था और जो सूख गया था. इस पेड़ के ऊपर से एक हाई टेंशन तार गुजर रहा था. साथ ही उसमें मधुमक्खी का भी छत्ता था. जिससे आसपास के लोगों और राहगीरों को काफी परेशानी हो रही थी. ऐसे में किसी भी हादसे को रोकने के लिए उनके द्वारा बरगद पेड़ को काट दिया गया. जिससे गांव के लोग काफी नाराज हो गए.
पेड़ काटने पर हुक्का पानी बंद
पीड़ित ने बताया कि इस मामले को लेकर गांव में दबंग परिवार की तरफ से बैठक आयोजित की गई. बैठक में कहा गया कि जिस पेड़ को तुम काटे हो उसमें देवता का वास था. काटने से देवी देवता रुष्ट हो गए हैं और बैठक में ईश्वर पटेल को 3 हजार रुपये दंड देने के लिए कहा गया. वहीं दंड की राशि नहीं देने पर पूरे परिवार का गांव में हुक्का पानी बंद कर दिया गया है.
ईश्वर पटेल का बेटे शेष नारायण ने कहा कि हुक्कापानी बंद होने से गांव में कोई भी हमसे बातचीत नहीं कर रहा है. हमें दुकानदार सामान देने से मना कर रहे हैं. काफी परेशानी में जीवन यापन करना पड़ रहा है.
धमतरी के अपर कलेक्टर पवन कुमार प्रेमी ने इस मामले में कहा कि इस केस की जांच की जा रही है. जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
पीड़ित परिवार परेशान
दूसरी तरफ पीड़ित परिवार का कहना है कि गांव के फरमान की वजह से उनके घर में कोई भी मजदूर काम करने के लिए नहीं आ रहा है. हमारा पूरा परिवार काफी प्रताड़ित महसूस कर रहा है. ऐसे में हमने प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई है. फिलहाल सिवनी खुर्द में आस्था और व्यवहारिकता के बीच उपजा यह विवाद अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है और गांव की निगाहें आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं.
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