घायल तेंदुए ने खेत की बाड़ी में सो रहे किसान पर किया हमला, संघर्ष के बाद बचा ग्रामीण, रेस्क्यू के दौरान तेंदुआ की मौत
An injured leopard attacked a farmer sleeping in the field, the villager was saved after a struggle, the leopard died during the rescue
गरियाबंद/धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी और गरियाबंद जिलों की सीमा से लगे सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रिसगांव के मासूलखोई गांव में मंगलवार को एक भयावह घटना सामने आई. खेत की रखवाली कर रहे 55 वर्षीय बुजुर्ग किसान रंजीत नेताम पर एक घायल तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व के रिसगांव (कोर) परिक्षेत्र की मासुलखोई बीट अंतर्गत तेंदुए द्वारा सुबह करीब 11:30 बजे खेत की लाडी में सो रहे रंजीत नेताम पिता बुधु राम उम्र 55 सालपर हमला कर घायल कर दिया। जिससे उनके चेहरे पर चोट आई. हमले के बाद तेंदुआ लाडी में ही बैठ गया. जिसके बाद पेट्रोलिंग श्रमिक एवं ग्रामीणों द्वारा तेंदुए के घायल / अस्वस्थ होने की खबर उपनिदेशक को दी गयी.
रंजीत नेताम को वनरक्षक भोजराज नेताम के साथ शासकीय वाहन में इलाज के लिए नगरी चिकित्सा केंद्र भेजा गया. जहा प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गयी. तेंदुआ के रेस्क्यू के लिए जंगल सफारी के डॉक्टर जय किशोर जडिया, उपनिदेशक वरुण जैन, सहायक संचालक उदंती श्री गोपाल कश्यप, रेंजर रिसगांव शैलेश बघेल, रेंजर दक्षिण उदंती चन्द्रबली ध्रुव, रेंजर इन्दागांव सुशिल सागर, ड्रोन पायलट सुधांशु वर्मा, राकेश मार्कंडेय, राजेंद्र सिन्हा एवं 15 स्टाफ मौजूद थे.
तेंदुआ चलने में असमर्थ था और ड्रोन से देखने पर उसकी गर्दन के पीछे घाव दिखाई दिया. जिसके बाद उसे उठाकर रेस्क्यू वाहन में रखा गया. जिसके बाद रास्ते में ही तेंदुए ने दम तोड़ दिया.
रेस्क्यू ऑपरेशन में खबर मिलते हुए भी सहायक संचालक सीतानदी एम आर साहू नदारद थे. तेंदुए के शव परीक्षण में उसकी पीठ पर किसी जंगली जानवर शायद किसी अन्य तेंदुए के दांत के निशान और 5-7 दिन पुराना 2 इंच का घाव पाया गया जिससे टेरिटरी के लिए आपसी संघर्ष के मामले की संभावना है.
मृत नर तेंदुए की उम्र करीब 4 साल आंकी गयी है. शव विच्छेदन कल सुबह किया जाएगा. जिससे तेंदुए की मौत के बारे में साफ जानकारी मिल सकेगी. ग्रामीणों को अलर्ट एप्प के जरिए एवं मुनादी कर लगातार जंगली जानवरों और सर्प दंश से बचने के लिए समझाइश दी जा रही है. वन्य प्राणियों के सुरक्षित रहवास और पीने के पानी के लिए झिरिया एवं तालाब की व्यवस्था की गयी गयी है. जिससे विगत 2 साल में मानव-वन्यप्राणी द्वन्द में कमी आई है.
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