स्वामी आत्मानंद स्कूल में फैला करंट, 300 से ज्यादा बच्चे कर रहे थे पढ़ाई, मचा हड़कंप, शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला

Current spread in Swami Atmanand School more than 300 children were studying panic ensued teachers evacuated the children safely

स्वामी आत्मानंद स्कूल में फैला करंट, 300 से ज्यादा बच्चे कर रहे थे पढ़ाई, मचा हड़कंप, शिक्षकों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला

दुर्ग : दुर्ग जिले के तितुरडीह स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में आज करंट फैलने की घटना सामने आई. जिससे हड़कंप मच गया. घटना के समय स्कूल में प्राइमरी के 300 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे थे. करंट फैलने पर शिक्षकों ने सूझबूझ से सभी बच्चों को सुरक्षित स्कूल ग्राउंड में बाहर निकाला. वहीं घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे.
मिली जानकारी के मुताबिक तितुरडीह के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में हर दिन की तरह आज भी क्लास लगी. इस दौरान मॉर्निंग स्कूल में 300 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे थे. तभी स्कूल में अचानक स्कूल की दीवार में करंट फैल गया. वहीं शिक्षकों ने फौरन प्रतिक्रिया देते हुए सभी बच्चों को स्कूल ग्राउंड में बाहर निकाला. सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं.
परिजनों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा तो शिक्षकों ने कहा कि मुख्य स्विच ऑफ कर दिया गया है. और स्थिति अब नियंत्रण में है. इस घटना की जानकारी लगते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली.
बताया जाता है कि स्कूल की बिल्डिंग जर्जर है. इसी वजह से करंट पूरी दीवार में फैल गया. स्कूल मैनेजमेंट ने बताया कि करंट की खबर लगते ही एक प्राइवेट इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर सब चेक कराया गया. इस दौरान पता चला कि एक पंखे की वजह से करंट फैल गया था. इसकी सूचना स्कूल शिक्षा विभाग को भी भेज दी गई है.
गौरतलब है कि इसकी जानकारी लगते ही जिला प्रशासन तत्काल हरकत में आया था. जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा खबर देखने के बाद सीधे स्कूल पहुंचे. इस दौरान उन्होंने स्कूल के प्रीसिपल सहित स्टाफ से बातचीत की और उन्हें फटकार भी लगाई. इतना ही नहीं, उन्होने मौके पर बिजली विभाग के अधिकारियों को बुलाया और तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करवाई.
दरअसल यह पूरा मामला एक दिन पहले का था. अचानक दीवार पर करंट दौडने लगा तो स्कूल मैनेजमेंट ने बच्चों को पहले बाहर निकलवा दिया गया. उसके कुछ देर के बाद स्कूल की छुट्टी हो गई. प्रारंभिक रूप से स्थानीय टेक्नीशियन को बुलवाकर थोडी देर के लिए खतरा टाल दिया गया. लेकिन, जब आज यानी 22 अगस्त को बच्चे स्कूल में पढाई करने पहुंचे तो पहले उन्हें बाहर बिठाया गया, फिर बारिश का मौसम बनते देख अंधेरे में पढ़ाई कराई गई. बता दें, जिस बिल्डिंग में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था वो पूरी तरह से जर्जर हो गई है. इसे डिस्मेंटल करना जरूरी था. बावजूद इसके उसे डिस्मेंटल न कर 3 लाख रुपये की लागत से सिर्फ पॉलिश कर इतिश्री कर ली गई.
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