पालिकाध्यक्ष के घर मेहमानों को खाना न परोसना पड़ा भारी, महिला कर्मचारी को नौकरी से किया बर्खास्त, कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार
Failure to serve food to guests at the Municipal Chairman's home proved costly; female employee dismissed from job, appeal to Collector for justice
बालोद : नगरपालिका बालोद में एक दिलचस्प मामला सामने आया हैं. पालिकाध्यक्ष द्वारा एक महिला प्लेसमेंट कर्मचारी को काम से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया उनके घर में खाना बनाने के बाद मेहमानों को खाना परोसने के लिए भही रुकी. जिससे नाराज होकर अध्यक्ष मैडम ने उस महिला प्लेसमेंट कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया. जिसकी शिकायत पीड़ित महिला कर्मचारी ने कलेक्टर से की हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन में नगरपालिका परिषद बालोद में कार्यरत प्लेसमेंट महिला कर्मचारी वार्ड-18 शिकारीपारा निवासी वनिता यादव ने कलेक्टर को अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें बिना सूचना अवैध तरीके से नगर पालिका बालोद के प्लेसमेंट कर्मचारी के पद से हटाया गया है. जिस बारे में इंसाफ दिलाने की मांग उन्होंने की हैं.
उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौपकर बताया कि उनके पति स्व पंचुराम यादव नगर पालिका बालोद में करीब 10 सालकाम किए. जिनकी नगर पालिका बालोद में काम के दौरान कैंसर होने के कारण मौत हो गई थी. जिनके स्थान पर वह विगत 11 साल से नगर पालिका बालोद में प्लेसमेंट कर्मचारी के तौर पर काम कर रही थी.
उनकी नियुक्ति के बाद करीब 3-4 साल गंगा सागर तालाब गार्डन में ड्यूटी के बाद नगर पालिका के अध्यक्ष के घर में खाना बनाने के लिए ड्यूटी लगाई गई थी. और वर्तमान में पिछले 6 महीने से नए नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी के घर में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी.
सुबह साढ़े 8 बजे घर से उनके यहां खाना बनाने जाती थी. और रात 7 बजे तक घर वापस आती थी. इसी दौरान बीते महीने 10 दिसंबर को अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी के घर में मेहमान आने वाले थे. जिन्हें खाना परोसने के लिए रात 9 बजे तक रुकने के लिए अध्यक्ष द्वारा उन्हें कहा गया था. लेकिन वनिता यादव की बेटी घर में अकेली होने के कारण अध्यक्ष के घर का पूरा काम करने के बाद रात 7 बजे वनिता अपने घर आ गई. जिस बात से नाराज होकर अध्यक्ष द्वारा वनिता को नगर पालिका के नौकरी से निकलवा दिया गया.
वनिता का कहना है कि उनके पति कि मौत हो गई है और उनके बुजुर्ग माता-पिता और नाबालिग बेटी उन पर ही आश्रित हैं. लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष के दबाव में उन्हें नौकरी से निकालने की वजह से उमके परिवार की हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई है. उन्होंने कलेक्टर से निवेदन किया है कि उनके आवेदन पर फौरन संज्ञान लेते नौकरी वापस दिलाई जाए.
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