पेड़ कटाई के खिलाफ ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने किया उग्र प्रदर्शन, फिल्म सिटी परियोजना पर पुनर्विचार की मांग, आंदोलन की चेतावनी
Green Army Chhattisgarh staged a protest against tree felling, demanding reconsideration of the Film City project and warning of agitation.
रायपुर : पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले 9 साल से लगातार सक्रिय संस्था ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने नवा रायपुर में प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया. संस्था के सैकड़ों कार्यकर्ता हरित क्षेत्र की रक्षा के लिए इकठ्ठा हुए और साफ चेतावनी दी कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश स्वीकार नहीं किया जाएगा. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर शासन-प्रशासन ने समय रहते फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन और व्यापक रुप लेगा.
ग्रीन आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे ने कहा कि उनकी संस्था ने पिछले नौ साल में तालाब संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और जनजागरण के जरिए हजारों लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक किया है. उन्होंने कहा कि नवा रायपुर जैसे सुनियोजित शहर में, जिसे हरित और संतुलित विकास का मॉडल माना जाता है. अगर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर कंक्रीट संरचनाएं खड़ी की जाएंगी तो यह आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा. उन्होंने शासन से मांग किया कि परियोजना से पहले संपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन सार्वजनिक किया जाए और वैकल्पिक भूमि पर गंभीरता से विचार हो.
रायपुर जिला अध्यक्ष गुरदीप टुटेजा ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्थानीय नागरिकों की भावनाओं की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है. उन्होंने कहा कि हर पेड़ केवल लकड़ी नहीं बल्कि जीवन, ऑक्सीजन और जल संतुलन का आधार है. अगर हजारों पेड़ों पर आरा चलेगा तो शहर का तापमान बढ़ेगा. भूजल स्तर प्रभावित होगा और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी. उन्होंने साफ कहा कि ग्रीन आर्मी शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन जारी रखेगी.
मालूम हो कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर क्षेत्र में लगभग 70 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी विकसित करने की योजना प्रस्तावित है. जिसका मकसद फिल्म निर्माण, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देना बताया जा रहा है. लेकिन प्रस्तावित स्थल पर बड़ी तादाद में पेड़ों की कटाई की संभावना ने ग्रीन आर्मी, स्थानीय निवासियों सामाजिक संगठनों में चिंता उत्पन्न कर दी है. कई रिपोर्टों में सैकड़ों से लेकर हजारों पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. जिससे हरित क्षेत्र में कमी, स्थानीय तापमान वृद्धि, जल संरक्षण पर असर और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास के नुकसान जैसी चिंताएं सामने आ रही हैं.
ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने शासन से अपील किया है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए. पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएं और जनता की सहमति के बिना किसी भी तरह की कटाई न की जाए. संस्था ने साफ किया है कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि सिर्फ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के हित में किया जा रहा है.
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