राजिम कुंभ कल्प मेला में होगा सुवा, कर्मा, ददरिया, कत्थक नृत्य, बॉलीवुड पार्श्व गायक असीत त्रिपाठी ने दी प्रस्तुति, कबीर के कत्थक ने दर्शकों का जीता दिल
Rajim Kumbh Kalp Mela will have Suva, Karma, Dadriya, Kathak dance, Bollywood playback singer Asit Tripathi performed, Kabir's Kathak won the hearts of the audience.
सांस्कृतिक मंच पर सुवा, कर्मा, ददरिया, कत्थक नृत्य, लोकमंच जैसे कार्यक्रमों की होगी प्रस्तुति
राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर प्रतिदिन सुप्रसिद्ध कलाकारों की शानदार प्रस्तुति हो रही है। सांस्कृतिक मंच पर छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों से पहुंचे कलाकार अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे है। बुधवार 19 फरवरी को सांस्कृतिक मंच पर लीलाधर साहू एवं उनकी टीम द्वारा लोक कला मंच से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की महक बिखेरेंगें। मंच पर शाम 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक ममता शिंदे और ईश्वर कुमार देवांगन की टीम लोककला मंच से दर्शकों का मनोरंजन करेगें।
इसी तरह सांस्कृतिक मंच क्र. 2 में दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक सुवा, कर्मा, ददरिया से अपने कलाकृति का प्रदर्शन करेगें। दाऊ राम दीवान की टीम द्वारा फाग गीत, पुसऊ चक्रधारी की मंडली जस झांकी, संतु कुर्रे मंगल भजन की प्रस्तुति देगें। डॉ गुंजन तिवारी कत्थक नृत्य, भुवन दास मानिकपुरी की मंडली मानस गान करेंगें। गंगा सागर की टीम लोक कला मंच, योगेश्वरी की टीम पंथी नृत्य से सतनाम घासीदास बाबा का संदेश मंच के माध्यम से देगी। प्रकाश साहू जस गीत से भक्तिमय माहौल बनाएंगे। लुकेश ठाकुर भजन संध्या, संजू सेन वाद्ययंत्र में जुगलबंदी करेंगे। टिकेश्वर निर्मलकर की टीम मानस गान और केशव राम साहू लोकमंच की प्रस्तुति देंगे।
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राजिम कुंभ कल्प के मंच पर बॉलीवुड पार्श्व गायक असीत त्रिपाठी ने दी प्रस्तुति
राजिम कुंभ कल्प के छठवें दिन रात्रिकालीन कार्यक्रम में बॉलीवुड पार्श्व गायक असीत शर्मा ने सुमधुर भजनों से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने गणेश वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद बजाओ नगाड़ा ढोल मेरे श्री राम आएं हैं..., श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी...हे नाथ नारायण.., हर प्राण में वास हैं तेरा मैया... बांके बिहारी नजर न लग जाए..., केसरी के लाल मेरा छोटा सा काम.., तोला बंदव शारदा मैया... बड़े दूर से आए हैं..., मोर अंगना पधारो महारानी..., जैसे मनमोहक भजनों की प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
मंच पर पिंकी वर्मा की मंडली ने मानस गान के माध्यम से श्री राम के आदर्श चरित्र का वर्णन कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। किरण शर्मा की टीम ने लोककला मंच से गणपति जगवंदन..., राधे -राधे -राधे बरसाने वाली राधे.., ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम का.., हरे राम हरे कृष्ण.., अंगना में भारत माता के .., सोन के चिरैया बोले... जैसे सुपर हिट गीतों की धमाकेदार प्रस्तुति से दर्शक झूमने लगे। वर्षा देवांगन ने कत्थक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।
कुंभ कल्प के स्थानीय मंच पर गांव-गांव से पहुंच रहे हैं हुनर
राजिम कुंभ कल्प मेला के सांस्कृतिक मंच पर गांव-गांव से हुनरमंद प्रतिभाएं पहुंच रही है। ग्रामीण क्षेत्रो के कलाकारो को कुंभ कल्प के मंच पर स्थान मिलने से उनका मनोबल बढ़ा है। कम संसाधन और अवसर की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के कलाकारों की कला परवान चढ़ने से पहले ही मुरझाकर दम तोड दिया करती थी, लेकिन कुंभ कल्प के आयोजन में इन कलाकारों को मंच मिलने से क्षेत्र की प्रतिभा उभर कर सामने आ रही है। स्थानीय मंच पर भखारा से आए अखाड़ा दल ने मंच पर अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए। ऐसे-ऐसे करतब दिखाए की देखने वालो ने अपने दांतो तले ऊँगली दबा ली। अखाड़ा दल में छोटे बच्चो ने वाद्ययंत्र बजाकर दर्शको से खूब तालियां बटोरी। वाद्ययंत्र की धुन पर दल के जांबाज युवकों ने एक से बढ़कर एक करतब दिखाए।
कबीर के कत्थक ने दर्शकों का जीता दिल
सांस्कृतिक मंच में कबीर ने कत्थक नृत्य के माध्यम से माता पार्वती द्वारा शिव की आराधना किए जाने के प्रसंग को लेकर अपनी प्रस्तुति दी। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और कत्थक नृत्य की काफी प्रशंसा की। पंडवानी गायिका पार्वती साहू ने महाभारत के पात्र भीम से संबंधित कई प्रसंग की मिली-जुली प्रस्तुति दी। उनके ओज से भरे शौर्यपूर्ण प्रस्तुति से सुनने वालों के रोंगटे खडे हो गए। पितईबंद से आई रतजगा टीम ने माता के भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे पंडाल में भक्ति पूर्ण माहौल बना दिया। जय चंडी मानस मंडली की महिलाओं ने राम चरित मानस पर भक्ति के प्रकारों की व्याख्या के साथ अपनी प्रस्तुति दी। पुनाराम यादव के राउत नाचा ने पूरे माहौल का रंग बदलते हुए दोहों की बौछार कर दी। जिसे देखकर दर्शक भी राउत नाचा के रंग में रंग कर झुमने लगे।
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लोमष ऋषि आश्रम का प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं के मन को कर रहा मोहित
राजिम कुंभ कल्प मेला में घूमने प्रतिदिन दूर-दूर से मेलार्थी पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु इस बार पहले से अधिक आकर्षक धर्म-अध्यात्म और संस्कृति की झलक देख कर गदगद हो रहे है। नवीन मेला मैदान से लेकर पुराने मेला स्थल तक के विस्तृत परिसर में मेला की भव्यता देखते ही बन रही है। राजिम मेला का आनंद लेने के बाद शाम 7 बजते ही महानदी आरती में शामिल होने अपनी जगह सुनिश्चित कर लेते हैं।
उड़ीसा से पहुंचे सूरज साव और बस्तर से आए अशोक खापरडे ने बताया कि मेला घूमने के बाद लोमष ऋषि आश्रम में आकर उन्हें मानसिक शांति मिल रही है। यहां का प्राकृतिक वातावरण मन को मोहित कर रहा। चारों तरफ घूमने के बाद यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। रविवार को नागा साधुओं ने भी इसी लोमश ऋषि आश्रम में अपने ईष्ट दत्तात्रेय भगवान की पूजा-आरती कर अपनी धर्मध्वजा की स्थापना कर इष्ट देवताओं का आह्वान किया था। श्रद्धालु भी इन नागा साधुओं के दर्शन के लिए यहाँ पहुंच रहे है।
कहा जाता है कि भगवान श्री राम वनगमन के दौरान कुछ दिनों तक राजिम स्थित लोमष ऋषि के आश्रम में ठहरे थे। आज भी धमतरी क्षेत्र में कुलेश्वरनाथ मंदिर के पास लोमश ऋषि का आश्रम विद्यमान है। यहां उनकी एक आदमकद प्रतिमा स्थापित हैं जिनकी नित्य पूजा अर्चना वहां के पुजारी किया करते हैं। यहां पर बेल के अत्यधिक पेड़ होने के कारण इसे बेलाही घाट भी कहा जाता हैं। प्राकृतिक दृष्टि से भी यह बहुत मनोहारी है यहां आने से एक प्रकार की शांति का अनुभव होता है। आश्रम के प्रवेश द्वार ऐसे बने है जैसे वे हर दर्शनार्थियो के स्वागत के लिए खड़े है। उनके दोनों किनारों में बने बाग-बगीचे विभिन्न रंगो में खिले फूल मन को अति प्रसन्न करते है। राजिम कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था, श्रद्धा और आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां आकर मेलार्थी घंटो समय व्यतीत कर रहे है।
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राजिम कुंभ कल्प मेला में विभिन्न विभागों की लगी प्रदर्शनी
जल संसाधन विभाग की प्रदर्शनी में राजिम बैराज परियोजना का बनाया जीवंत मॉडल
राजिम कुंभ कल्प मेला में नवीन मेला स्थल पर गरियाबंद जिले के विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई है। मुख्य मंच के समीप बने विशाल डोम में विभिन्न विभागों के लगे प्रदर्शनी में कई जानकारियां लोगों को मिल रही है। शिक्षा विभाग के स्टॉल में नवाचारी शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दर्शाया गया हैं। प्रदर्शनी के माध्यम से खेल-खेल में ज्ञानार्जन प्राप्त करने के माध्यमों को विस्तार पूर्वक बताया जा रहा है। यह शिक्षा का सबसे अच्छा माध्यम हो सकता हैं। उद्यानिकी विभाग की प्रदर्शनी को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया है जिसमें रंग- बिरंगी फूलों की बागवानी अत्यंत ही मनमोहक दिख रही हैं। वहीं फसल उत्पादन के लिए किसान, बीज और कृषि भूमि का सुंदर समन्वय किया गया हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्टाल में काननू और सड़क सुरक्षा संबंधित जानकारीयां दी जा रही है। इस स्टॉल में सड़क सुरक्षा को लेकर सेल्फी जोन भी बनाया गया है। जिसमें कई मेलार्थि सेल्फी लेकर जागरूक हो रहे हैं। हस्तशिल्प कला केन्द्र की प्रदर्शनी में हाथ से बने सुंदर कुर्सी, चटाई, पेन स्टैंड, पाटा और सोफे आदि बनाएं गए हैं जो बहुत ही आकर्षक दिखाई दे रहा है। इसी तरह कोसा उद्योग में कोसा बनाने की विधि को बताया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न वैरायटी के कोसा की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
जल संसाधन विभाग की प्रदर्शनी में त्रिवेणी संगम में बारहमासी जल भराव, नौका विहार एवं वाटर स्पॉट्स, राजिम एवं नवापारा हेतु सहकारिता जल प्रदाय के लिए प्रस्तावित राजिम बैराज परियोजना का जीवंत मॉडल बनाया गया हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में महिला सुरक्षा हेतु विभिन्न जानकारीयां मिल रही हैं। बिहान रसोई में छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाया जा रहा है, जिसका स्वाद मेलार्थी बड़े ही चाव से ले रहे हैं। पशुधन संरक्षण विभाग में मछली पालन के विभिन्न उपाय दर्शाए गए हैं। डोम में लगभग 25 स्टॉल में विभिन्न प्रदर्शनी सजाई गई है, जो मेलार्थियों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं।
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जूना अखाड़ा के पदाधिकारियों का चुनाव संपन्न: उमेशानंद गिरी बने अध्यक्ष
राजिम कुंभ कल्प मेला में 21 फरवरी से 26 फरवरी तक संत समागम का आयोजन होगा। संत समागम में शामिल होने नागा साधु-संतों का आना प्रारंभ हो चुका है। लोमष ऋषि आश्रम में बड़ी संख्या जूना अखाड़ा के नागा साधु, संत पहुंचे हुए हैं। मेला सम्पन्न कराने जूना अखाड़ा में पदाधिकारियों का चुनाव किया गया है । जिसमें उमेशानंद गिरी महाराज को सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं गोपाल गिरी महाराज उपाध्यक्ष चुने गए।
इसी प्रकार दिगम्बर संतोष गिरी महाराज को संरक्षक, गोकुलगिरी को सचिव, सिद्धेश्वरी पुरी पद्मनीपुरी को कारोबारी, कमलेश्वर नंद सरस्वती को अन्य महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। नवनियुक्त पदाधिकारियो ने अखाड़े की परम्परा और अनुशासन को बनाये रखने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि साधु-संत और भक्तजन सुचारू रूप से अध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सके। लोमष ऋशि आश्रम में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में नागा संतों, महंतों एवं बड़ी संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही। बैठक में मौजूद संत समाज ने धार्मिक परम्पराओ के निर्वाहन के साथ ही भविष्य की योजनाओ पर भी चर्चा की।
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हैंग चैलेज खेल युवाओं को कर रहा आकर्षित
राजिम कुंभ कल्प मेला में मनोरंजन के भरपूर साधन आए हुए हैं। नवीन मेला मैदान में मीना बाजार के अलावा मेला स्थल क्षेत्र में कई प्रकार के चैलेंजिंग गेम्स भी लगे हुए हैं, जो मनोरंजन के साथ इनाम पाने का अच्छा मौका दे रहे है। इन्ही में मेला स्थल में अलग अलग जगहों पर हैंग चैलेंज लगाया गया है, जिसमें दो मिनट तक लटके रहने पर एक हजार रुपए का इनाम दिया जा रहा है।
दुकानदार ने बताया कि प्रतिभागी को मात्र 100 रुपए देकर दो मिनट तक लोहे के हैंगर में लटकना होगा। यदि वह चौलेंज पूरा कर लेता है, तो उसे एक हजार रुपए इनाम के तौर पर दिया जाता है। इस खेल में युवाओं की अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है। मेला में आया हर युवा एक बार यहां रूककर खेल जरूर देख रहा है। इसमें कोई चौलेंज स्वीकार करता, तो कई युवक ट्राई करके छोड़ देते हैं।
लोगों को लुभा रही राउंड सेल्फी
मेले में कई जगहों में लगा राउंड सेल्फी जोन लोगों को काफी लुभा रहा है। यहां हर वर्ग के लोग अपने मनपसंद गानों के साथ सेल्फी वीडियो (रील) बना रहे हैं। मेले में आए लोग खासकर युवाओं और युवतियों को इस पल को यादगार बनाने रील बनाते देखा जा रहा है।
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राजिम कुंभ कल्प में लगा सेल्फी जोनः पुराने जमाने की यादे हो रही ताजा
छत्तीसगढ़ी गहने और वेशभूषा में लोग ले रहे सेल्फी, युवक-युवतियों के लिए अलग अलग वेशभूषा का संग्रह
राजिम कुंभ कल्प में कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास संत समागम के सामने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजती तथा पुनर्जीवित कर उसके संरक्षण के लिए संकल्पित सेल्फी जोन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग वर्ग के लोग भरपूर मनोरंजन करते नजर आ रहे है। साथ ही मेले में बिताए अपने हर पर को यादगार बनाने के लिए वहां के हर एक सामग्री के साथ सेल्फी लेकर उसे अपने कैमरे में कैद कर रहें है। सेल्फी जोन ग्रामीण जीवन शैली पर आधारित बनाया है जहां बैलगाड़ी की तरफ सबसे ज्यादा भीड़ है। लोग किसान का वेश पहनकर सेल्फी ले रहे हैं।
इस सेल्फी जोन में सभी पुराने गहने और वेशभूषा संग्रहित है। स्टाल में पर्रा, टोकरी, पारंपरिक गहने बिछिया, करधन, सुता ऐठी, सुर्रा, किला साडी, खुमरी, राउत वेशभूषा आदि छत्तीसगढ़ी आभूषण लोगो के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है।
सेल्फ़ी जोन की संचालिका गिनिज बुक आफ वर्ड रिकार्ड (बायो आर्ट) एवं तीन बार सीएम अवार्ड से सम्मानित रानी निषाद ने बताया कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी संस्कृति की पहचान कराने के लिए यह सेल्फी जोन बनाया गया है। जोन में युवक, युवतियों और महिलाओं के लिए अलग अलग वस्त्र और आभूषण रखे गए है। युवकों के लिए भी धोती, जैकेट, कलगी , सुता , खुमरी , राउत डंडा संग्रहित किया गया है। वहीं युवतियों और महिलाओं के लिए भी विभिन्न प्रकार के पारंपरिक गहने और वस्त्रों का संकलन रखा गया है।
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राजिम कुंभ मेला सांस्कृतिक मंच पर कवि सम्मेलन का आयोजन
राजिम कुंभ कल्प मेला में 19 फरवरी बुधवार को नवीन मेला मैदान स्थित सांस्कृतिक मंच में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन संध्या 5 बजे किया गया है। जिसमें स्थानीय कवि कविता प्रस्तुत करेंगे। जिला रत्नांचल साहित्य समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार साहिर ने बताया कि इस कवि सम्मेलन में टीकमचंद सेन दिवाकर, संतोष कुमार सोनकर मंडल, गोकुल सेन, संतोष सेन, जितेंद्र सुकुमार, नूतन लाल साहू, डॉ.मुन्नालाल देवदास, बीएल श्रीवास, भोज साहू, मकसूदन राम साहू बरीवाला, मोहनलाल मानिकपन, संतोष प्रकृति, डॉ. रमेश सोनसायटी, नरेंद्र साहू पार्थ, रोहित साहू, किशोर निर्मलकर, छग्गुयास आडिल कविता प्रस्तुत करेंगे



