दो पूर्व विधायक की पत्नी-बहु और भाई हारे चुनाव, दो आदिवासी नेताओं ने रचा इतिहास, भीमाधर सोम बने सरपंच, विधायक भी नहीं बचा पाए अपनी साख

Wife, daughter-in-law and brother of two former MLAs lost the elections, two tribal leaders created history, Bhimadhar Som became Sarpanch, even the MLA could not save his reputation

दो पूर्व विधायक की पत्नी-बहु और भाई हारे चुनाव, दो आदिवासी नेताओं ने रचा इतिहास, भीमाधर सोम बने सरपंच, विधायक भी नहीं बचा पाए अपनी साख

ग्राम पंचायत छैलडोंगरी के सरपंच चुनाव में भीमाधर सोम ने मारी बाजी

गरियाबंद/मैनपुर : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव गरियाबंद और मैनपुर विकासखंड में 17 फरवरी को संपन्न हुआ. जहां दोनों विकासखंड में मतदाताओं ने 86.06 प्रतिशत मतदान किया. दोनों विकासखंड के 136 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान हुआ. इन दोनों विकासखंड के एक लाख 36 हजार 512 मतदाताओं की मतदान किया. जिसमें मैनपुर ब्लॉक के 74 ग्राम पंचायत के लिए 81 हजार 234 मतदाताओं ने तो वहीं गरियाबंद विकासखंड के लिए 55 हजार 278 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. मैनपुर ब्लॉक के कुछ बूथ अति संवेदनशील थे.

मैनपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत छैलडोंगरी में सरपंच पद के लिए प्रत्याशी भीमाधर सोम चुनावी मैदान पर उतरे थे और और पूरे दम-खम के साथ पूरी ताकत लगाकर संघन प्रचार प्रसार किया और सभी मतदाताओं का दिल जीत लिया और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारत राम ध्रुव और अबिराम सोम को 305 वोट से मात देकर विजयी हुए.
भीमाधर सोम पंचमुखी काली माई जी के पुजारी भी है. और ग्राम के पटेल, झांकर भी हैं. इस गांव और क्षेत्र में उनका काफ़ी मान सम्मान भी है. और पूर्व में भी उनकी धर्म पत्नी 2015 सन् मे सरपंच रह चुकी हैं. सभी लोगों के दुःख सुख में सहयोग करते हुए। इनका कहना है कि ये जीत मेरी नही बल्कि सभी मतदाताओं की जीत है और कार्यकर्ताओं की मेहनत है. जिसके कारण आज मैं इस चुनावी मैदान पर जीत हासिल किया हूं और मैं भीमाधर सोम ग्राम पंचायत छैलडोंगरी के सभी मतदाताओं का तह दिल से शुक्रिया अदा करता हूं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI

दो पूर्व विधायक की पत्नी-बहु और भाई हारे चुनाव, दो आदिवासी नेताओं ने रचा इतिहास

गरियाबंद जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कड़े बड़े उलट फेर देखने को मिला. इस चुनाव में दो बड़े आदिवासी चेहरों ने जिला पंचायत की सीट बदलकर चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की है। तो वहीं कई बड़े नेताओं के रिश्तेदार और करीबी हार गए.
इसके अलावा एक विधायक भी अपने करीबियों को नहीं जिता पाए, जबकि उनके पक्ष में जोर-शोर से प्रचार किए थे. दरअसल गरियाबंद जिले में प्रथम चरण में गरियाबंद और मैनपुर ब्लॉक के 315 बूथों पर सफलता पूर्वक मतदान सम्पन्न हुआ. जिला पंचायत के 4 क्षेत्र के मतदान में दो भाजपा एक कांग्रेस अधिकृत प्रत्याशी के खाते में तो एक निर्दलीय के खाते में गया.
जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष संजय नेताम ने इस बार क्षेत्र क्रमांक 7 से चुनाव लड़ा।संजय को हराने कांग्रेस से ही दो पदाधिकारियों को मैदान में विरोधियों ने उतार दिया था, जिसका ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा. कांग्रेस अधिकृत संजय को कुल 14877 मत मिले. जबकि कांग्रेस के महिला कांग्रेस अध्यक्ष को 5719 मत मिले थे. अपने ही विरोधी बने प्रतिद्वंदी से संजय ने 9158 मतों से जीत दर्ज की। विरोधियों को पटकनी देने संजय के पुराने रणनीतिकार और उनके युवा टीम की भूमिका अहम रही.
जिला पंचायत में लोकेश्वरी तीसरी बार बनी सदस्य
पिछली दो बार क्षेत्र क्रमांक 7 से चुनाव लड़कर जीत दर्ज कराने वाली आदिवासी महिला नेत्री लोकेश्वरी नेताम ने इस बार क्षेत्र क्रमांक 8 से लड़कर अपनी बादशाहत कायम रखा. निर्दलीय लड़ने वाली लोकेश्वरी ने कुल 19293 मत हासिल किए. जबकि भाजपा की प्रयासी सूरोती ध्रुवा को 6405 मत लेकर दूसरी तरफ कांग्रेस की सरस्वती नेताम 6213 मत लेकर तीसरे स्थान पर रही.
जिला पंचायत में भाजपा ने 2 सीटों पर खोला खाता
पहली बार राजनीतिक मैदान में उतर 34 साल के युवा चेहरा गौरीशंकर कश्यप को क्षेत्र क्रमांक 9 से 7065 मतों के अंतर से जीत हासिल की। पार्टी के अधिकृत होने के बाद से गौरी को अपने ही पार्टी के कई बड़े नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा था. संघ व विहिप ने मोर्चा संभाल कर गौरी की जीत पक्की कर दी. गौरी एस सी केटेगिरी में आते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि वे अध्यक्ष के प्रबल दावेदार हो सकते है. वहीं क्षेत्र क्रमांक 6 से भाजपा की लालिमा ठाकुर मैदान में थी. 18746 मत हासिल किया. जबकि प्रतिद्वंदी सुरेखा नागेश 11622 मत हासिल कर सकी. 5500 मतों से लालिमा ने जीत दर्ज की है.
कई बड़े नेताओं के साख पर उठने लगे सवाल
क्षेत्र क्रमांक 9 से जीतकर जिला पंचायत अध्यक्ष रही कांग्रेस की महिला नेता स्मृति ठाकुर ने इस बार यूथ कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष उमेश डोंगरे को मैदान में उतारा था, लेकिन उमेश को सिर्फ 4124 मत मिले। यहां भाजपा के बागी अरुण ठाकुर दूसरे स्थान पर रहे. वहीं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूर्व विधायक डमरुधर पुजारी के भाई दशरथ पुजारी अपने प्रतिद्वंदी से 411 मतों से सरपंच चुनाव हार गए.
इसी तरह पूर्व विधायक गोवर्धन मांझी की धर्मपत्नी हिमादी मांझी सरपंच चुनाव और बहू पूर्व जनपद अध्यक्ष नूरमति मांझी जनपद सदस्य का चुनाव हार गईं। मैनपुर में भी विधायक जनक ध्रुव अपने कई करीबियों के लिए चुनाव प्रचार किया था. लेकिन उनमें से ज्यादातर को हार का सामना करना पड़ा. गरियाबंद जिला सरपंच संघ अध्यक्ष रहे बलदेव राज ठाकुर इस बार पंच की कुर्सी नहीं बचा सके.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI