23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद की सजा, 21 दिन में सरेंडर या जेल!, 78 पन्नों के फैसले की बड़ी बात

The High Court has issued a significant verdict in the 23-year-old Jaggi murder case, sentencing Amit Jogi to life imprisonment. He must surrender within 21 days or face jail time. The key takeaway from the 78-page verdict is the

23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद की सजा, 21 दिन में सरेंडर या जेल!, 78 पन्नों के फैसले की बड़ी बात

बिलासपुर . छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में दो दशक बाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा दी है. अदालत ने साफ किया कि जब सभी आरोपियों पर एक ही जुर्म में शामिल होने के आरोप हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग या पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जा सकता है.  78 पेज में डिवीजन बेंच का यह फैसला आया है.
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ समान प्रकार के सबूत मौजूद हैं तो किसी एक को बरी करना और बाकी को उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है. अदालत ने यह भी जोड़ा कि ऐसा तभी संभव है जब किसी आरोपी को अलग से राहत देने के लिए ठोस और विशिष्ट कारण मौजूद हों.
कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया। इसके तहत उन्हें उम्रकैद के साथ 1000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का अहमपड़ाव माना जा रहा है. इससे पहले हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी माना था और तीन हफ्ते में सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं.
आरोपी अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी वर्तमान में जमानत पर हैं. उनकी जमानत आज से तीन हफ्ते की अवधि तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा। ऐसा न करने पर ट्रायल कोर्ट उन्हें हिरासत में ले लेगा और सजा पूरी करने के लिए उन्हें जेल भेज देगा.
रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह इस फैसले की एक प्रति, आरोपी अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी को भेजे, और उन्हें खबर करे कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के सामने इस फैसले को चुनौती देने का हक है. रजिस्ट्रार (न्यायिक) को यह निर्देश दिया गया है कि इस फैसले की प्रमाणित प्रति और मूल रिकॉर्ड एक हफ्ते के भीतर संबंधित निचली अदालत को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए.
अब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के दो फैसलों पर 20 अप्रैल को सुनवाई करेगा. सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 25 मार्च 2026(जिसमें अपील दायर करने की अनुमति दी गई) और दो अप्रैल 2026 (जिसमें अपील को स्वीकार किया गया) को संयुक्त रुप से स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है.
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में जोगी को आख़री फैसले के खिलाफ अपील 20 अप्रैल 2026 से पहले दायर करने के निर्देश दिए हैं ताकि सभी मामलों की उसी दिन संयुक्त रूप से अंतिम सुनवाई हो सके.
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजीव मेहता की पीठ ने की. अमित अजीत जोगी की तरफ़ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे मौजूद रहे. 
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उच्च न्यायालय की तरफ़ से पारित उपरोक्त दोनों फैसलों में प्राकृतिक न्याय के मौलिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय के छह नवंबर 2025 के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन करते हुए  अमित जोगी को बिना सुनवाई का कोई अवसर दिए ही दोनों फैसले पारित कर दिए.
इस बारे में कोर्ट को यह भी बताया गया कि दो अप्रैल 2026 का उच्च न्यायालय का फैसला, जिसमें पैरा 37 में यह दर्ज है कि यह बिना अमित जोगी को सुने पारित किया गया और आज ही (6 अप्रैल 2026) सुबह उच्च न्यायालय की वेबसाइट में अपलोड किया गया. इस बारे में रजिस्ट्रार (न्यायिक) ने उनके अधिवक्ता को फोन से सूचना दिया था। जोगी ने आज के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए पूरा विश्वास जताया कि उनके साथ हुआ यह गंभीर अन्याय  सर्वोच्च न्यायालय की ओर जरूर सुधार किया जाएगा.
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