रायपुर पुलिस की अवैधानिक कार्यवाही का विरोध, सड़कों पर उतरे आक्रोशित मुस्लिम समाज के हजारों लोग, धरना प्रदर्शन और मौन जुलूस
Thousands of angry Muslim community members took to the streets to protest against the illegal actions of Raipur police, staging demonstrations and silent processions.
रायपुर : रायपुर में 23 दिसंबर 2025 को रायपुर शहर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में रायपुर में शहर सीरतुन्नबी कमेटी के आह्वान पर मुस्लिम समाज का एक विशाल, शांतिपूर्ण एवं आक्रोशित धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस प्रदर्शन में सैकड़ों की तादाद में समाज के लोग इकठ्ठा हुए और एक आवाज में पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने साफ किया कि विरोध पुलिस की वैधानिक जिम्मेदारियों से नहीं। बल्कि उनके अमानवीय, एकतरफा और भय उत्पन्न करने वाले तौर-तरीकों से है.
मिली जानकारी के मुताबिक जुमे की नमाज के बाद राजीव गांधी चौक (सुभाष स्टेडियम के सामने) में मुस्लिम समाज ने 23 दिसंबर को हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ धरना और मौन जुलूस का आयोजन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुबह 4 बजे रायपुर शहर पुलिस द्वारा मुस्लिम समाज के सम्मानित पुरुषों, महिलाओं और विशेष रुप से बुज़ुर्गों को करीब 120 लोगों को उनके घरों से उठाकर पुलिस थानों में ले जाया गया. और पूरे दिन थाने में रखा. जहां न तो उचित व्यवस्था थी और न ही भोजन-पानी की सुविधा. कई लोग सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहे.
उन्होंने कहा कि इस दौरान कड़ाके की ठंड में 70 साल से ज्यादा उम्र के बुज़ुर्गों और महिलाओं को पुलिस वाहनों में बैठाकर ऐसे ले जाया गया. मानो वे कोई गंभीर अपराधी हों. करीब 150 लोगों को इसी प्रक्रिया से गुज़ारा गया और बाद में सिर्फ दस्तावेज़ सत्यापन के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया. इस पूरी कार्रवाई से समाज में यह भावना प्रबल हुई कि आगे सिर्फ पूछताछ ही मकसद था तो इसके लिए नोटिस, समन या सम्मानजनक कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शहर सीरतुन्नबी कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल सेठी ने कहा कि मुस्लिम समाज को किसी जांच या कानूनी प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन यह प्रक्रिया कानूनसम्मत, मानवीय और सम्मानजनक होनी चाहिए.
वरिष्ठ अधिवक्ता फैसल रिज़वी ने कहा कि भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालयों की स्पष्ट गाइडलाइंस के मुताबिक महिलाओं और बुज़ुर्गों को रात में या बिना ठोस आधार के हिरासत में नहीं लिया जा सकता. इस मामले में प्रथम दृष्टया संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच जरुरो है.
इस धरना प्रदर्शन में मुस्लिम समाज के साथ-साथ अन्य समाजों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया और संवैधानिक, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक मार्ग पर चलने का आह्वान किया.
धरना स्थल से प्रशासन के जरिएएसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया. जिसमें मांग की गई कि किसी एक समुदाय को लक्ष्य बनाकर ऐसी कार्रवाई न की जाए और भविष्य में पूछताछ के लिए विधिवत सूचना एवं प्रक्रिया का पालन हो.
आयोजकों ने कहा कि मुस्लिम समाज सदैव अमन, भाईचारा और कानून का पालन करने में विश्वास रखता है और प्रशासन को हर संभव मदद देने को तैयार है. लेकिन निर्दोष लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. धरना और मौन जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ.
प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया. धरना-प्रदर्शन के बाद मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई.
आयोजक: रायपुर मुस्लिम समाज एवं सहयोगी संगठन
(TNRAT छत्तीसगढ़ (तहफ्फुज-ए-नामूस-ए-रिसालत एक्शन ट्रस्ट), शहर सीरत कमेटी, राष्ट्रीय हुसैनी सेना, प्रदेश मुस्लिम समाज कल्याण सोसाइटी, ऑल मुस्लिम वेल्फेयर फाउंडेशन, 36गढ़ मुस्लिम महासभा, गौसुल आज़म कमेटी, गौसिया यंग कमेटी, रायपुर मेमन जमात)
धरना प्रदर्शन में प्रमुख रुप से पूर्व अध्यक्ष सीरत कमेटी नौमान अकरम हामिद, अलीम रज़ा,राष्ट्रीय हुसैनी सेना अध्यक्ष राहिल रउफी, महासचिव रफीक गौटिया,मो. आमिर (जनाब), सैयद सूफ़ी ओवैस,ऑल मुस्लिम वेल्फेयर फाउंडेशन से फैसल रिज़वी (वरिष्ठ अधिवक्ता), मो. सिराज,36गढ़ मुस्लिम महासभा से एजाज़ कुरैशी, मो. फहीम शेख, अज़ीम खान कुरैशी, जमात मो. अलीम कुरैशी, आफताब कुरैशी, मेमन जमात से इदरीस लोया, आसिफ़ मेमन, फारुख बेलिम, याक़ूब मुकाती,बोहरा समाज से मोइज़ सैफी एवं साथीगण,सिया समाज से हाजी मोहसिन अली सुहैल, हैदर अली (मुतवल्ली, हैदरी मस्जिद), ईरानी समाज से बाबर भाई, सरफराज ईरानी, मसीह समाज से मनीष दयाल,सतनामी, बौद्ध, सिख और उत्कल समाज के प्रतिनिधि मंडल, स्थानीय समाज के गणमान्य सदस्य, एजाज़ खान, शेख जावेद, फहीम खान, अब्दुल नादिर खान, फिरोज़ खान, शेख शकील, इसरार, नासिर खान, शफीक खान, आतिफ़ सेठी, अयान सेठी, गुड्डा सेठी, सद्दाम, हसन खान, अशफाक खान सहित हजारों की तादाद में नागरिक मौजूद रहे.
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मालुम हो कि कुछ दिन पहले सुबह सुबह 4 बजे से रायपुर पुलिस द्वारा मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था. सुबह से शाम तक उन्हें भूखा प्यासा बैठाल कर पूछ ताछ करते रहे. उन्हें किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा नहीं बताया गया कि उन्हें किस वजह से लाया गया है. शाम को एक प्रतिबंधित विदेशी ऐप IMO पर चैटिंग करने का कारण बताते हुए उन्हें पूछ ताछ कर छोड़ दिया गया. लेकिन मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि अगर IMO ऐप बैन कर दिया गया है तो वह प्ले स्टोर पर अवेलेबल क्यों है? मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों को भी थाना ले जाकर पुलिस ग्राउंड में पूछताछ की गई. जो कि अवैधानिक तरीका है. इसी बात को लेकर आज मुस्लिम समाज का गुस्सा फूटा और रायपुर पुलिस को मंच से चेतावनी देते हुए कहा गया कि पुलिस अपना यह रवैया सुधारे अन्यथा और उग्र आंदोलन किया जाएगा.
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अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ बीजापुर में जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
बीजापुर : रज़ा यूनिटी फाउंडेशन, जिला बीजापुर (बस्तर संभाग, छत्तीसगढ़) के जिला अध्यक्ष सरफराज खान के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में देश-विदेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते अन्याय, हिंसा और एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाइयों पर गहरी चिंता जताई गई और इंसाफ की गुहार लगाई गई.
रज़ा यूनिटी फाउंडेशन जिला अध्यक्ष सरफराज खान ने बताया कि ज्ञापन में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही लगातार हिंसा की कड़ी निंदा की गई. संगठन ने भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप कर वहां शांति, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मुस्लिम समुदाय के करीब 120 लोगों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की गई.
बिहार में एक मुस्लिम महिला का हिजाब खींचे जाने की घटना को महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग उठाई गई.
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल रोकथाम, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और समुदाय की सुरक्षा की अपील की गई.
रज़ा यूनिटी फाउंडेशन जिला अध्यक्ष सरफराज खान ने जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान सभी को समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है. किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव अस्वीकार्य है. संगठन ने प्रशासन से सभी मुद्दों पर शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की. ताकि देश में सौहार्द और शांति बनी रहे.
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