223 आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग किसके भरोसे?, देवभोग के 90 से ज्यादा केंद्रों में छुआछूत, SC सहायिकाओं के हाथ का भोजन नहीं खा रहे ग्रामीण
Who is overseeing the 223 Anganwadi centers? Untouchability prevails in over 90 centers in Devbhog; villagers refuse to eat food prepared by SC helpers.
गरियाबंद : ओडिशा सीमा से लगे देवभोग ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. 94 गांवों के 223 आंगनबाड़ी केंद्रों में 9584 हितग्राहियों के लिए संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन पिछले एक साल से स्थायी परियोजना अधिकारी के बिना किया जा रहा है. वहीं 9 रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया भी साल भर से लंबित है.
90 से ज्यादा केंद्रों में छुआछूत बनी बड़ी चुनौती
देवभोग ब्लॉक के 90 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाएं कार्यकर्ता या सहायिका के रूप में कार्यरत हैं. इसके बावजूद कई गांवों में सामाजिक भेदभाव के कारण उनके हाथ का बना भोजन स्वीकार नहीं किया जाता है. ऐसे मामलों में अतिरिक्त मजदूर रखकर भोजन बनवाया जाता है या फिर सूखा राशन वितरित किया जाता है.
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं चला अभियान
छुआछूत का यह मुद्दा समाधान शिविर की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने भी उठ चुका है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए थे. लेकिन अधिकारियों की कमी के कारण अभियान प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पाया.
मैनपुर परियोजना की स्थिति भी चिंताजनक
देवभोग की तरह मैनपुर ब्लॉक के 358 आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रभारी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रहे हैं. विभागीय योजनाएं पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से संचालित होती हैं. इसलिए दूसरे विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपना आसान नहीं माना जाता.
क्या कहते हैं जिला कार्यक्रम अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने बताया कि जिले की पांच परियोजनाओं में से दो परियोजनाओं में परियोजना अधिकारी के पद रिक्त हैं. प्रभारी अधिकारियों के जरिए योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. पदों की पूर्ति होते ही लंबित नियुक्तियों और अन्य कार्यों को गति दी जाएगी. जनपद अध्यक्ष पद्मलया निधि का आरोप है कि विभाग योजनाओं का प्रभावी संचालन नहीं. बल्कि सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर रहा है
देवभोग परियोजना अधिकारी का पद करीब एक साल से रिक्त है. पिछले छह महीने से जिला परियोजना अधिकारी समीर सौरभ को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है. हालांकि उन्हें रायपुर संचालनालय में सहायक संचालक की जिम्मेदारी भी सौंपी जा चुकी है. ऐसे में रायपुर से करीब 225 किलोमीटर दूर स्थित देवभोग परियोजना की नियमित निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
सुपरवाइजर को सौंपा गया प्रशासनिक प्रभार
परियोजना अधिकारी नहीं होने की स्थिति में सुपरवाइजर सुंदर ठाकुर को प्रशासनिक प्रभार दिया गया है. जबकि परियोजना में सुपरवाइजर के चार पद पहले से खाली हैं. ऐसे में फील्ड मॉनिटरिंग और प्रशासनिक जिम्मेदारियां एक साथ संभालना चुनौती बन गया है.
9 रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया ठप
देवभोग ब्लॉक के 15 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता और सहायिका के पद खाली हैं. कुल 9 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पिछले एक साल से अटकी हुई है. विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूर्व में हुई भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच के दौरान गंभीर गड़बड़ियां सामने आई थीं. दो अभ्यर्थियों को जेल तक जाना पड़ा था। इसके बाद से भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई.
कई केंद्रों में योजनाएं हो रही प्रभावित
रिक्त पदों की वजह सेण कई आंगनबाड़ी केंद्रों में विभागीय योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है. कार्यकर्ता और सहायिकाओं की कमी का सीधा असर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हितग्राहियों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है.
बच्चों के भोजन और पोषण आहार पर असर
जनपद अध्यक्ष पद्मलया निधि ने बताया कि कई केंद्रों में बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराने में दिक्कतें आ रही हैं. गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार वितरण और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा संबंधी गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने चेतावनी दिया कि स्थिति नहीं सुधरी तो ग्रामीण क्षेत्र के कई हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं.
क्या कहते हैं जिला कार्यक्रम अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने बताया कि जिले की पांच परियोजनाओं में से दो परियोजनाओं में परियोजना अधिकारी के पद रिक्त हैं. प्रभारी अधिकारियों के माध्यम से योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. पदों की पूर्ति होते ही लंबित नियुक्तियों और अन्य कार्यों को गति दी जाएगी.
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