जिला अस्पताल गरियाबंद में अमानवीयता का आरोप, इलाज के दौरान मरीज के परिजन से पैसों की मांग, कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार

Allegations of inhumanity at the Gariaband District Hospital, demands for money from the patient's family during treatment, appeals to the Collector for justice

जिला अस्पताल गरियाबंद में अमानवीयता का आरोप, इलाज के दौरान मरीज के परिजन से पैसों की मांग, कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल गरियाबंद से एक चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है. जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक मरीज के परिजन ने अस्पताल की नर्सों पर इलाज के दौरान पैसे मांगने और असंवेदनशील व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया. पीड़ित परिवार ने इस बारे में कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर उचित कार्रवाई की मांग की है.
मिली जानकारी के मुताबिक वार्ड नम्बर 8 डाकबंगला निवासी गायत्री यादव ने अपने आवेदन में बताया कि उनके पिता रविंद्र यादव को 27 अप्रैल 2026 की रात करीब 9 बजे नाजुक हालत में जिला अस्पताल गरियाबंद लाया गया था. अस्पताल में भर्ती के बाद इलाज के दौरान ड्यूटी पर मौजूद नर्सों द्वारा मरीज को नाक में थिटर पाइप (नासोगैस्ट्रिक ट्यूब) लगाने के लिए पैसे की मांग की गई.
पीड़िता के मुताबिक जब उन्होंने आर्थिक असमर्थता जताई और पैसे देने से मना किया तो नर्सों ने कथित रुप से बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अमानवीय टिप्पणी करते हुए कहा कि थिटर पाइप लगाओ या मत लगाओ. हमें क्या करना है. मरीज को कुछ होगा तो जिम्मेदारी तुम्हारी होगी. इस कथित बयान ने न सिर्फ परिजनों को मानसिक रूप से आहत किया. बल्कि अस्पताल की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कलेक्टर से शिकायत
आवेदन में यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिला अस्पताल में इस तरह की आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया के लिए किसी तरह का शुल्क निर्धारित नहीं है. इसके बावजूद अगर मरीज के परिजनों से पैसे मांगे जा रहे हैं तो यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है. बल्कि गरीब और असहाय मरीजों के साथ अन्याय भी है.
गायत्री यादव ने अपने आवेदन में दो नर्सों- भारती साहू और कुसुमलता का नाम लेते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं और आम जनता का भरोसा कमजोर करती हैं.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. क्या अस्पताल में मरीजों से अवैध वसूली का यह कोई अकेला मामला है या फिर यह एक व्यापक समस्या का हिस्सा है? यह जांच का विषय बन गया है.
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कार्रवाई करते हैं.
जनता की नजरें प्रशासन पर टिकीं
इस पूरे मामले ने आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही आखिरी सहारा होते हैं. ऐसे में अगर वहीं पर इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं. तो यह व्यवस्था के लिए एक बड़ा सवाल है. अब सबकी नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
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