फंगस वाले OT में मोतियाबिंद का ऑपरेशन!, 10 मरीजों की हालत बिगड़ी, डॉ गीता नेताम सस्पेंड, नेत्र सहायक दिप्ती टोप्पो और स्टाफ नर्स ममता वैदे सस्पेंड

Cataract operation in OT with fungus condition of 10 patients deteriorated commotion ensued investigation team will reveal the secret Dr Geeta Netam suspended

फंगस वाले OT में मोतियाबिंद का ऑपरेशन!, 10 मरीजों की हालत बिगड़ी, डॉ गीता नेताम सस्पेंड, नेत्र सहायक दिप्ती टोप्पो और स्टाफ नर्स ममता वैदे सस्पेंड

रायपुर/दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की बड़ी लापरवाही सामने आई है. जिला अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 10 ग्रामीणों की आंख में संक्रमण हो गया. वहां 22 अक्टूबर को 20 लोगों का ऑपरेशन किया था. उसके बाद गुरुवार को 10 लोगों ने आंख में संक्रमण की शिकायत की. तब एक मरीज को जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज और 9 को रायपुर के अंबेडकर हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया. रायपुर में भर्ती होने के 3 घंटे के भीतर सभी मरीजों की आंख का दोबारा ऑपरेशन कर दिया गया. देर शाम जगदलपुर में भर्ती मरीज को भी रायपुर भेज दिया गया.
मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान मरीजों के आंखों में संक्रमण की घटना के बारे में जांच दल गठित कर जांच कराई गई. जांच  प्रतिवेदन के अनुसार जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में मोतियाबिंद सर्जरी के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का समुचित रुप में पालन नहीं किया गया था. जिसके बाद डॉ गीता नेताम नेत्र सर्जन जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. महिला डाक्टर के साथ अब नेत्र सहायक और स्टाफ नर्स को भी सस्पेंड कर दिया है. राज्य सरकार ने नेत्र सर्जन डॉ गीता नेताम के अलावे नेत्र सहायक दिप्ती टोप्पो और स्टाफ नर्स ममता वैदे को भी सस्पेंड कर दिया है..
मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को जिला अस्पताल में 20 नेत्र रोगियों की सर्जरी की गई थी. इस सर्जरी के अगले दिन के बाद ही रोगियों को आंखों में काफी परेशानी होने लगी. रोगियों ने इस बात की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी. इधर अस्पताल प्रबंधन ने 10 रोगियों को हो रही परेशानी के बीच भी इस बात की जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी और न ही उनके रोग दूर करने की दिशा में कोई कोशिश की गई.
इस बीच सारे मामले की जानकारी किसी कर्मचारी ने सीएमएचओ डॉ.अजय रामटेके को दे दी. डॉ. रामटेके ने इसकी जानकारी तत्काल कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को दी और बिना देरी किए पीड़ित नेत्र रोगियों को राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में शिफ्ट कराया गया.
9 मरीजों का उपचार फिलहाज मेकाहारा में जारी है तो वहीं एक मरीज को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में भर्ती कराया गया है. प्रभावित होने वालों में पालनार से आयतु, मंगू, हड़मामुंडा से कुमा,उडेली से वेली सहित 10 रोगी शामिल हैं.
पा फिल्टर्स खराब, दीवार पर थी फंगस 
इधर कुछ महीनें पहले ही केंद्र से पहुंची दो सदस्यीय एक टीम ने ओटी का निरीक्षण किया था. जांच में उन्होंने पाया था कि ओटी में लगे हेपा फिल्टर्स खराब हो चुके हैं और इन्हें फौरन बदला जाए. वहीं इस टीम ने यह भी पाया था कि ओटी की दीवारों पर जगह-जगह फंगस जमी हुई है. इसका भी ट्रीटमेंट कराया जाए. लेकिन तात्कालीन सीएस डॉ. कपिल कश्यप ने केंद्र की इस टीम के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया और आज स्थिति ये बन गई थी कि कुछ मरीजों के जीवन में अंधकार छा सकता था.
अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डा. संतोष सोनकर ने बताया कि एक-दो दिन बाद ही मरीजों की आंखों की हालत का पता चल सकेगा. फिलहाल उन्हें नेत्र रोग विभाग में अलग वार्ड में रखा गया है. जूनियर डाक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है.
सिविल सर्जन आरएल गंगेश का दावा है कि ऑपरेशन के बाद संक्रमण को देखते हुए 10 लोगों को रेफर किया गया है. लेकिन आंख की रोशनी नहीं जाएगी. दूसरी तरफ राज्य राज्य में मोतियाबिंद सर्जरी की नोडल अफसर डा. निधि ग्वालरे का कहना है कि मरीजों की आंखों में दिक्कत है. लेकिन ये क्यों और कैसे जांच के बाद ही साफ हो सकेगा.
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही का नतीजा नेत्र रोगी वृद्धजनों को उठाना पड़ रहा है. जहां प्रबंधन की लापरवाही के चलते दर्जन भर से ज्यादा लोगों को अपनी आंखें तक गंवानी पड़ सकती थी. गनीमत रही कि समय रहते मामले की जानकारी कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को मिली. जिसके बाद आनन-फानन में नेत्र रोगियों को राजधानी रायपुर और मेकाज पहुंचाया गया. फिलहाल सभी की स्थिति सामान्य बताई जा रही है. इस मामले का बाद दंतेवाड़ा से लेकर रायपुर तक हड़कंप मच गया है. आरोप है कि मरीजों के ऑपरेशन के पहले ऑपरेशन थियेटर को सैनेटाइज करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं किया गया.
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