Bollywood News : इंद्र सेन जौहर  जिन्हें आईएस जौहर के नाम से जाना जाता है .

Bollywood News : असल जिंदगी में मस्तमौला और बेबाक आई.एस. जौहर की शख्सियत इतनी कमाल थी कि अपनी हाजिर जवाबी से वो बड़ों-बड़ों की बोलती बंद कर देते थे। सरकार उनके रवैये से इस कदर परेशान रहती थी कि उनकी फिल्मों पर बैन लगा दिया जाता था। बॉलीवुड का वो एक्टर जिसने 5 शादियां की लेकिन पांचों बार तलाक हो गया।

Bollywood News : इंद्र सेन जौहर  जिन्हें आईएस जौहर के नाम से जाना जाता है .

Bollywood News : असल जिंदगी में मस्तमौला और बेबाक आई.एस. जौहर की शख्सियत इतनी कमाल थी कि अपनी हाजिर जवाबी से वो बड़ों-बड़ों की बोलती बंद कर देते थे। सरकार उनके रवैये से इस कदर परेशान रहती थी कि उनकी फिल्मों पर बैन लगा दिया जाता था। बॉलीवुड का वो एक्टर जिसने 5 शादियां की लेकिन पांचों बार तलाक हो गया। रिश्ते में वो करण जौहर के चाचा लगते है लेकिन एक तरफ करण की एक भी शादी नहीं हुई जबकि उनके चाचा की 5 शादियां की।  आईएस जौहर जो बॉलीवुड में जानें मानें एक्टर, डायरेक्टर और फिल्म राइटर भी रहें। आईएस जौहर अपने दौर में हमेशा सुर्खियों में रहते थे।

Is johar married 5 times got divorce dramatically each offers heroin role  to pakistani former pm benazir bhutto strange story - करण जौहर के ताऊ ने  रचाई थी 5 बार शादी, तलाक

आईएस जौहर अपनी फिल्मों को लेकर जितनी चर्चा में रहे, उससे ज्यादा सुर्खियां उन्हें अपनी निजी जिंदगी को लेकर बटोरीं। आईएस जौहर ने अपनी जिंदगी में 5 बार शादी की। इतना ही नहीं आईएस जौहर ने अपनी पांचों पत्नियों को तलाक भी दे दिया था। अपनी पहली पत्‍नी रम्‍मा बैन से जब उन्‍होंने तलाक लिया तो ये देश का शुरुआती तलाक था। आईएस जौहर ने भारत में तलाक का ट्रेंड भी सेट किया था। आईएस जौहर ऐसे इंसान थे जिन्होंने आजाद भारत के पहले रजिस्टर्ड तलाकों में अपना नाम दर्ज कराया था। आलम ये रहा है कि वो अपनी जिंदगी में मोहब्बत के लिए तरसते रहे।

Indra Sen (I.S) Johar Birthday Interesting Facts; Five Marriages, Divorced  5 Times | अपनी मौत राज रखना चाहते थे आई.एस.जौहर: फिल्मों से डरकर सरकार लगा  देती थी बैन, बेनजीर भुट्टो को ...

12 फिल्में डायरेक्ट कीं और चार फिल्में तो खुद ही प्रॉड्यूस भी कीं। उन्होंने पहली फिल्म बनाई 'जोहर मेहमूद इन गोवा' जो काफी हिट हुई। इसके बाद उन्होंने ऐसी सात फिल्म बनाई जिनके टाइटल में उनका नाम था। जिससे उन्हें लगने लगा की उनके नाम से लोग उनकी फिल्म को देखने आएंगे। आईएस जौहर का एक जुड़वा भाई भी था, जो बिल्कुल उनकी तरह दिखता था। उस भाई की वजह से कई बार उनकी पिटाई भी हुई थी। वहीं, एक बार तो जेल की हवा भी खानी पड़ गई थी। दरअसल, आईएस जौहर के उस भाई ने क्राइम किया था और पुलिस ने एक जैसी शक्ल की वजह से उन्हें पकड़ लिया था।

आई.एस.जौहर, हिंदी सिनेमा के सबसे पढ़े-लिखे कलाकार कहे जाते थे। उन्होंने इकोनॉमिक्स और पॉलिटिक्स में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद LLB की पढ़ाई की थी। आजादी से पहले इतनी पढ़ाई करना आम नहीं था. आई.एस.जौहर को राजनीति में ऐसी दिलचस्पी थी कि ये अपनी फिल्मों के जरिए किसी भी राजनीतिक कैंपेन या बड़े फैसलों का मजाक बनाते थे। जब गोवा को आजाद करवाने की बात की जा रही थी तो इन्होंने इसी मुद्दे पर जौहर इन गोवा बना डाली। वहीं कश्मीर मुद्दे पर इन्होंने जौहर इन कश्मीर बनाई। बांग्लादेश का विवाद हुआ तो इन्होंने जय बांग्लादेश फिल्म से नेताओं का खूब मजाक बनाया।

70 के दशक में कांग्रेस सरकार ने जनसंख्या पर काबू पाने के लिए नसबंदी कैंपेन की शुरुआत की थी। इस कैंपेन को संजय गांधी ने शुरू किया था, जिसकी लीडर रुकसाना सुल्ताना (अमृता सिंह की मां) थीं। ये बर्थ कंट्रोल की एक नाकाम कोशिश थी। इस मुद्दे पर आई.एस.जौहर ने नसबंदी फिल्म बनाई थी। फिल्म से सरकार का मजाक न बन जाए, इस डर से कांग्रेस सरकार ने फिल्म पर रोक लगा दी थी। कुछ समय बाद जब पाकिस्तान के जनरल जिया उल हक ने पाक के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार भुट्टो को फांसी देने का षड्यंत्र रचा तो आई.एस.जौहर ने इस पर भुट्टो प्ले लिखा था, लेकिन भारत सरकार ने उनके इस प्ले पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

1971 में हुए इंडो-पाक युद्ध में पाकिस्तान को हार मिली थी, जिसके बाद 1972 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार भुट्टो शिमला समझौते के लिए भारत आए थे। वो अपने साथ अपनी 18 साल की बेटी बेनजीर भुट्टो को भी साथ लाए थे। आई.एस.जौहर को भी उनसे मिलने का मौका मिला था। वो इस कदर बेबाक थे कि इतने संजीदा मुद्दे के बीच उन्होंने बेनजीर भुट्टो को अपनी फिल्म में काम करने का ऑफर दे दिया था।

आई.एस.जौहर 1984 में काफी बीमार रहने लगे थे। 5 शादियां करने वाले आई.एस.जौहर अकेले पड़ चुके थे। पहली पत्नी से हुए उनके दो बच्चे अंबिका और अनिल साथ ही रहते थे। एक दिन उन्होंने अपने दोनों बच्चों को पास बुलाया और कहा, मैं नहीं चाहता कि मेरे मरने की खबर किसी तक पहुंचे। बच्चों ने तब तो उनकी बात को संजीदगी से नहीं लिया, लेकिन दो दिनों बाद ही 10 मार्च 1984 को आई.एस.जौहर का निधन हो गया।

उनके बच्चों ने उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी मौत की खबर किसी को नहीं दी। गंभीर बीमारी के बीच भी उनके मजाकिया अंदाज में कोई कमी नहीं आई। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मौत से पहले बेटे से ये भी कहा था कि अगर उनके मरने की खबर अखबारों में छपे तो वो अखबार उन तक जरूर पहुंचाया जाए.