मतदाता सूची से नाम कटने पर कॉलोनी के लोगों ने पंचायत चुनाव का किया बहिष्कार, नाराज महिलाओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
People of the colony boycotted the Panchayat elections after their names were removed from the voter list, angry women submitted a memorandum to the Chief Electoral Officer.
मतदाता सूची से नाम कटने पर कॉलोनी के लोगों ने पंचायत चुनाव का किया बहिष्कार
रायपुर/दोंदेखुर्द : रायपुर राजधानी से सटे दोंदेखुर्द के वार्ड क्रमांक-8 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के लोगों ने पंचायत चुनाव बहिष्कार का फैसला ले लिया है. इस बारे में बड़ी तादाद में महिलाओं ने को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है.
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के लोगों ने ज्ञापन में बताया गया है कि पिछले पंचायत, लोकसभा, विधानसभा चुनाव में उन्होंने मतदान किया है लेकिन बिना किसी सर्वे के पंचायत चुनाव 2025 की मतदाता सूची से मोहल्ले के लोगों का नाम हटा दिया गया है. जबकि न किसी की मौत हुई है और न ही किसी का स्थानांतरण हुआ है. वहीं बहुत से लोगों का नाम बिना वजह अन्य वार्ड में जोड़ दिया गया है. मतदाताओं ने चुनाव आयोग से कहा कि ग्राम पंचायत दोंदेखुर्द के वार्ड क्रमांक-8 की जांच कर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराई जाए.
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रायपुर/सीलियारी : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर गांव-गांव में चुनावी माहौल चरम पर है। प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ जमकर प्रचार कर रहे हैं. तो दूसरी ओर राजधानी रायपुर के धरसींवा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत टोर के आश्रित ग्राम गिधौरी के ग्रामीणों पंचायत चुनाव बहिष्कार कर रहे हैं. जिसके बाद गांव में मायूसी छाई हुई है. प्रत्याशी भी इस गांव में चुनाव प्रचार करने हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. बता दें ग्रामीण बाकायदा अपने घरों की दीवारों में पोस्टर लगाकर चुनाव का प्रचार-प्रसार ना करने का प्रत्याशियों को निवेदन किया है.
आपको बता दें कि एक हफ्ता पहले नायब तहसीलदार राजेंद्र चंद्राकर और पटवारी सिलतरा पुलिस गांव पहुंचकर चुनाव बहिष्कार नहीं करने के बारे में समझाइश दी थी. लेकिन नाराज ग्रामीणों के सामने प्रशासन की एक नहीं चली. उल्टे ग्रामीणों ने आए हुए अधिकारी 20 साल से गांव में विकास कार्य नहीं होने की और गिधौरी को अलग पंचायत गठन करने समस्या गिनाई थी.
बता दें कि 365 लोगों का हस्ताक्षर युक्त समर्थन ज्ञापन रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह और निर्वाचन आयोग तथा रिटर्निंग ऑफिसर धरसींवा बाबूलाल कुर्रे से मुलाकात कर गांव में हो रही समस्याएं को लेकर और नया पंचायत गठन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था.
अधिकारियों को कहा था वे किसी भी प्रत्याशी को गांव में घुसने नहीं देंगे. और न ही चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे. ग्रामीणों का कहना था कि आश्रित गांव होने के चलते 20 साल से विकास कार्य नहीं हो रहा है. ग्रामीण मूलभूत सुविधाएं से वंचित हैं. केंद्र सरकार मनरेगा कार्य इस गांव में नहीं चल रहा है. आश्रित ग्राम गिधौरी में करीब 600 के आसपास वोटर हैं.
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