सब्सिडी लोन के नाम पर लूट गए 166 किसान, थाने में भी रक्षक निकले भक्षक, FIR के लिए पुलिस ने मांगे पैसे!, IG की दखल पर अब दर्ज हुआ केस

166 farmers were robbed in the name of subsidy loans. Even at the police station, the protectors turned out to be predators. Police demanded money for an FIR. A case has now been registered following the IG's intervention.

सब्सिडी लोन के नाम पर लूट गए 166 किसान, थाने में भी रक्षक निकले भक्षक, FIR के लिए  पुलिस ने मांगे पैसे!, IG की दखल पर अब दर्ज हुआ केस

दुर्ग-भिलाई : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सब्सिडी लोन के नाम पर धोखाधड़ी के शिकार उन किसानों की प्राथमिकी आईजी के दखल के बाद दर्ज कर ली गई है. जो एफआईआर दर्ज कराने के एवज में पैसे देकर थाना प्रभारी के धोखे के शिकार हुए थे. पीड़ितों से मामले में FIR दर्ज करने के लिए थाना प्रभारी द्वारा 52 हजार रुपए की वसूले गए थे.
सब्सिडी लोन के नाम पर बैंक कर्मचारी और एजेंट के हाथों ठगे गए किसानों को पुलिस से उम्मीद थी कि वह आरोपियों को सलाखों के पीछे डालेगी. लेकिन रक्षक की जगह पुलिस भी भक्षक निकली. धमधा थाना प्रभारी ने रिश्वत लेकर भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया.
मिली जानकारी के मुताबिक धमधा  जिले से सब्सिडी लोन के नाम पर कुल 166 किसानों के धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोप हैं कि एक निजी बैंक कर्मचारी की मदद से एक एजेंट ने किसानों को पशुपालन/डेयरी योजना के तहत 40 फीसदी सब्सिडी दिलाने के नाम पर निजी लोन दिला दिया था.
अपने साथ हुए धोखेधड़ी की शिकायत लेकर जब पीड़ित किसान थाने पहुंचे तो आरोप है कि धमधा थाना प्रभारी ने FIR दर्ज करने के एवज में पीड़ित किसानों से 52 हजार रुपए वसूल लिया. लेकिन फिर भी पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं की. हारकर किसान IG ऑफिस पहुंचे. तब जाकर सोमवार देर शाम धोखाधड़ी को लेकर आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया.
सब्सिडी लोन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एजेंट और निजी बैंक कर्मचारी ने किसानों से कहा कि उन्हें पशुपालन योजना से लोन मिलेगा. जिसमें शुरुआती छह महीने में सिर्फ किश्तें चुकानी होंगी और पांच साल बाद 40–50% सब्सिडी काटकर बाकी रकम देनी होगी.
गौरतलब है धमधा क्षेत्र के कुल 166 किसानों को साल 2024 में पशुपालन लोन के नाम पर ठगा गया था. किसानों ने बैंक कर्मचारी विकास सोनी और बैंक एजेंट मधु पटेल पर आरोप लगाया  है कि दोनों ने मिलकर सब्सिडी लोन धोखाधड़ी की साजिश रची थी. लेकिन सब्सिडी लोन की जगह उन्हें निजी लोन दिला दिया गया था.
पीड़ित किसानों ने बताया कि उन्होंने भरोसा करते हुए निजी बैंक से 5–10 लाख रुपए तक का लोन लिया था और बदले में आरोपियों ने लोन दिलाने के नाम पर उनसे 10 फीसदी पैसा कमीशन ले लिया. वहीं बीमा के नाम पर उनके अकाउंट से 50 हजार रुपए भी ले लिया. इतना ही नहीं, सिक्योरिटी चार्ज के नाम पर किसानों से तीन-तीन ब्लैंक चेक भी लिया गया.
सिक्योरिटी चार्ज के लिए ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर आरोपियों ने किसानों के खातों में आए लोन के 30-40 राशि को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया. इससे 10 लाख का लोन किसानों को मिला 6–7 लाख, 5 लाख का लोन 3–3.5 लाख का पड़ा. बाकी रकम आरोपियों ने हजम कर लिया. 
किसानों को धोखे का एहसास तब हुआ. जब HDFC बैंक से ऋण चुकाने का नोटिस मिला. बैंक कर्मचारी और एजेंट्स के मुताबिक किसानों को सब्सिडी के बाद की राशि 5 साल बाद चुकानी थी. लेकिन बैंक ने 6 महीने के अंदर ही नोटिस भेज दिया. यह देखकर किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई.
किसानों ने बताया कि दोनों आरोपियों ने ही बैंक में उनके खाते खुलवाए और ऋण प्रक्रिया पूरी की. लेकिन उन्हें बैंक जाने से रोका गया. कई किसानों के घर जाकर ही उन्होंने दस्तावेजों पर दस्तखत करवाए. पूरे मामले में किसानों ने सितंबर 2024 में ही एसपी और आईजी से शिकायत की थी. लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला.
किसानों के मुताबिक वो लगातार धमधा थाना प्रभारी से इंसाफ की गुहार लगाते रहे. लेकिन दो महीने पहले थाना प्रभारी ने FIR दर्ज करने के एवज में 52 हजार रुपए मांगे. किसानों ने आपस में पैसे इकट्ठा थाना प्रभारी को इस उम्मीद में 52 हजार रुपए दिया कि उन्हें इंसाफ मिलेगा. लेकिन थाना प्रभारी ने पैसे लेने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ  FIR दर्ज नहीं किया.
किसानों ने IG रामगोपाल गर्ग को लिखे पत्र में थाना प्रभारी द्वारा FIR के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया. लेकिन रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पीड़ित किसानों को ही धमकाने लगे. मामले को गंभीरता से लेते हुए IG ने एसपी दुर्ग को जांच के निर्देश दिया. जिसके बाद पुलगांव थाना में आरोपियों के खिलाफ जीरो में FIR दर्ज किया गया.
दो महीने पहले धमधा थाना प्रभारी ने FIR दर्ज करने के एवज में 52 हजार रुपए मांगे. किसानों ने पैसे इकट्ठा करके थाना प्रभारी को इस उम्मीद में 52 हजार रुपए दिए कि उन्हें इंसाफ मिलेगा. लेकिन थाना प्रभारी ने पैसे लेने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं किया.
एडिशनल एसपी अभिषेक झा ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद फौरन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम रवाना की गई है. वहीं, थाना प्रभारी द्वारा लिए गए पैसों के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच समिति गठित की जाएगी और एसपी के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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