तेज बहाव में बहा युवक, स्टॉप डैम में पानी का स्तर बढ़ने से फिसलकर डूबा, सिंचाई विभाग की लापरवाही बनी मौत की वजह, ग्रामीणों में भारी रोष

A young man was swept away by the strong current, slipped and drowned due to rising water level in the stop dam, the negligence of the irrigation department became the cause of death, huge anger among the villagers

तेज बहाव में बहा युवक, स्टॉप डैम में पानी का स्तर बढ़ने से फिसलकर डूबा, सिंचाई विभाग की लापरवाही बनी मौत की वजह, ग्रामीणों में भारी रोष

डोंगरगढ़/ बेलगांव : मोहारा मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम कोलेंद्रा-ठाकुर टोला के बीच स्थित नाला में अचानक आई बाढ़ से मार्ग में बने स्टॉप डैम कम रपटा को पार करते समय युवक के बह जाने से उसके खोजबीन में पूरा गांव इकट्ठा हो गया. लेकिन देर रात तक युवक का पता नहीं चल पाया. पूरी रात परिजन परेशान रहे. प्रशासन की तरफ से तैनाद रेस्क्यू टीम को सुबह झाड़ियां में फंसे युवक की बॉडी मिली.
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार शाम को हुई तेज बारिश और डंगोरा डैम में चल रहे उलट की वजह से नाला में अचानक बाढ़ हालत बन गई. ग्राम कोलेंद्रा निवासी मिथिलेश वर्मा पिता शिवप्रसाद वर्मा उम्र 35 साल किसी काम से खैरागढ़ गया था. युवक ठाकुर टोला होते हुए अपने घर पैदल नाला पार करते हुए जा रहा था. तभी युवक का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव वाले पानी की चपेट मैं आकर नीचे गिर गया. नीचे गिरने के बाद युवक लापता हो गया.
गांव वालों ने बताया कि स्टॉप डैम कम रपटा में सात गेट लगे हुए हैं. जिसमें सिर्फ चार गेट ही खुले हैं. बाकी गेट खराब हो चुके हैं. जिसे विभाग द्वारा मरम्मत नहीं कराया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर सभी गेट खुले रहते तो पानी पुलिया के ऊपर नहीं आता. घटना स्थल पर 112 और मोहरा पुलिस की टीम पहुंच चुकी थी.
सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित स्टाफ डैम कम रपटा का निर्माण सालों पहले किया गया था लेकिन जरुरी  मरम्मत का काम नहीं किए जाने की वजह से इसके कई गेट क्षतिग्रस्त होने की वजह से बंद हो गए थे. इसके अलावा सिंचाई विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा अन्य गेटों को खोला नहीं गया था. जिससे पानी का जलस्तर बढ़ गया और पानी रपटा (पुल) के ऊपर से होकर बहने लगा. सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित इस रपटा (पुल) का उपयोग बेलगांव से मोहरा जाने वाले ग्रामीण सालों से करते आ रहे हैं.
बेहद सकरे इस मार्ग से हमेशा नाला में गिरने का खतरा सामान्य दिनों में भी बना रहता है. मार्ग सकरा होने और मार्ग के दोनों और रेलिंग नहीं लगने की वजह से आने-जाने वाले ग्रामीणों को नाले में गिरने का डर हमेशा बना रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि सिचाई विभाग का ये स्टॉप डेम (रपटा ) का गेट अगस्त महीने मे क्यों बंद रखा गया? अगर गेट खुला होता तो ऊपर से पानी नहीं बहता और आज एक युवक की मौत नहीं होती.
बेलगांव से मोहरा के बीच स्थित ग्रामों में ज्यादा बारिश होने के वजह से कई हादसे हो चुके हैं. कुछ दिन पहले ही कोलेंद्रा-ठाकुर टोला मार्ग में बने एक अन्य पुल के धराशाई हो जाने एवं नाले का पानी गांव में घुस जाने से कई मकान क्षतिग्रस्त हुए थे. और कई किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था. दोनों ही घटना के समय क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट नहीं करना, गैर जिम्मेदारना कृत्य के रुप में देखा जा रहा है.
विधायक श्रीमती हर्षिका स्वामी बघेल ने दोनों ही घटनाक्रम को संज्ञान में लेकर संबंधित अधिकारियों को जरुरी दिशा निर्देश दिए गए थे. इसके अलावा किसी भी जनप्रतिनिधि ने इतने बड़े घटनाक्रम को संज्ञान में नहीं लिया. ग्रामीणों को प्रभावहीन पंचायत प्रतिनिधियों के भरोसे छोड़ दिया गया. इससे ग्रामीणों में अत्यधिक आक्रोश व्याप्त है.
ठाकुर टोला नाले में हुई यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है. बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी विफलता का आईना है. सवाल यह उठता है कि मिथिलेश वर्मा की मौत की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? सिंचाई विभाग, प्रशासन या वे जनप्रतिनिधि जो आज तक इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं?
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