श्रीयांश हॉस्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही से प्रसव के बाद महिला की मौत, मासूम के सिर से छिना मां का साया, परिजनों से दुर्व्यवहार
Due to the negligence of doctors in Shriyansh Hospital, a woman died after delivery, an innocent child lost his mother, family members were mistreated
महासमुंद/आरंग : छत्तीसगढ़ में आए दिन प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की प्रसव से पीड़ित महिलाओं की मौतों का सौदा हो रहा है. कहते हैं अस्पताल जीवन देने का केंद्र होता है. लेकिन आरंग का श्रीयांश हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर क्या मौतों का रिसर्च केंद्र बन गया है? मामला उस नवजात बच्ची का है जिसने पैदा होते ही अपने मां को खो दिया. जिसके सवाल का जवाब तलाश रही है वो मासूम नवजात बच्ची.. जिसकी आंखें मां की ममता देखने से पहले ही सूनी हो गई. और वह मां तुलेश्वरी कन्नौजे.. जिसने पहली बार मातृत्व का अनुभव किया और वहीं मौतों के सौदागरों ने उसे मौत की नींद सुला दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक आरंग ब्लॉक के बोरिद गांव की 22 साल की तुलेश्वरी कन्नौजे को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने श्रीयांश हॉस्पिटल में भर्ती कराया. यह उसका पहला प्रसव था। बच्ची को जन्म तो मिल गया. लेकिन मां की जान चली गई. परिजनों के मुताबिक तुलेश्वरी डिलीवरी के बाद भी असहनीय पीड़ा में तड़पती रही. मगर डॉक्टरों और हॉस्पिटल स्टाफ ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई.
आरंग के बोरिद गांव के मृतिका के परिजनों का आरोप है कि तुलेश्वरी की हालत बिगड़ने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने उन्हें कोई सहीं जानकारी नहीं दी. अचानक महिला की मौत की खबर मिली. वो भी तब, जब उसे चोरी-छिपे एक प्राइवेट एम्बुलेंस में रायपुर ले जाने की बात कही गई.
तुलेश्वरी कन्नौजे की मां विमला कन्नौजे ने तुलेश्वरी के शरीर को छुआ जो पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था. मतलब तुलेश्वरी कन्नौजे की मौत हो चुकी थी. जिसे डॉक्टरों ने रायपुर रेफर कर दिया था. इसे देखकर विमला जोर जोर से चिल्ला चिल्लाकर रोने लगी और डॉक्टरों की करतूत देखकर विमला ने डॉक्टरों को चिल्लाना शुरु कर दिया था.
विमला कन्नौजे बेटी की मौत से बदहवास डॉक्टरों से बोलती रही आखिर क्यों झूठ बोला जा रहा था. जब तुलेश्वरी की मौत हो चुकी थी तो सीधा बताते, दूसरे हॉस्पिटल में रेफर करने का नाटक क्यों किया जा रहा था. विमला कन्नौजे के इन सवालों का जवाब नहीं था.
इसी बीच श्रीयांश हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने तत्काल मामले को रफा दफा करने के लिए मृत महिला के पति के कोरे कागज पर दस्खत करवाए और अस्पताल के अन्य कुछ कागजों में जो अंग्रेजी में लिखे हुए थे. उन फार्म ने हस्ताक्षर करवा लिए. हॉस्पिटल प्रबंधन अपनी करनी को छूपाने के लिए पूरी तरह से पूरी कागजी कार्रवाई कर ली.
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मृत महिला को परिजनों को बताए बिना ही स्ट्रेचर पर लिटाकर बाहर ले जाया जा रहा था. जब मृतका की मां ने सवाल किया तो हॉस्पिटल स्टाफ ने बदसलूकी की. धक्का देकर बाहर निकाल दिया.
परिजन स्तब्ध थे. उन्हें उनकी बेटी की मौत के पीछे की सच्चाई नहीं बताई गई. एमएलसी या पुलिस रिपोर्ट का कोई जिक्र नहीं. कोई चिकित्सकीय विवरण नहीं. कोई संवेदना नहीं.
स्थानीय लोगों और परिजनों ने शंका जताई है कि इस अस्पताल में डिलीवरी केसों के जरिए मौत का सौदा किया जा रहा है. जिसमें कुछ मेडिकल दलालों की मिलीभगत भी है. गांव के कुछ लोगों ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है पहले भी यहां इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं.
तुलेश्वरी की नवजात बेटी को जन्म के साथ ही एक ऐसा कलंक मिला. जिसे शायद ज़िंदगी भर वह ना भूल सके. उसने मां को देखा ही नहीं. उसकी मां की मौत पर उठ रहे सवालों का जवाब शायद उसे भी कभी ना मिले..
बता दें कि महासमुंद शहर के नजदीकी ग्राम मोंगरा निवासी विमला कन्नौजे की 22 वर्षीय पुत्री तुलेश्वरी कन्नौजे जिसकी शादी ठीक 15 माह पहले रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक के ग्राम बोरिद निवासी होमन कन्नौजे के साथ हुई थी. जिसकी मौत आरंग स्थित श्रीयांश हॉस्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से हो गई है.
मरीज के परिजनों ने बताया कि आयुष्मान कार्ड में इलाज के बाद 13600 की राशि खर्च कराया. डॉक्टरों ने पैसे के लालच में बिना किसी सुविधा के महिला का सीजर ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन उपरांत तुलेश्वरी ने एक स्वस्थ नवजात बच्ची को जन्म दिया। 14 मई तारीख को पूरा दिन तुलेश्वरी कन्नौजे असहनीय दर्द से जूझती रही. डॉक्टर बिना किसी तरह के इलाज किए परिजनों से कहते रहे कि प्रसव के बाद यह सब नार्मल है. जल्दी ठीक हो जाएगी.
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अब सवाल उठता है कि प्रशासन इस पर चुप क्यों है? आरंग स्वास्थ्य विभाग और जिला कलेक्टर ने इस गंभीर लापरवाही पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या यह अस्पताल जन-स्वास्थ्य के नाम पर मौत का व्यापार चला रहा है?
महिला के माता पिता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच हो, एफआईआर दर्ज की जाए और हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द किया जाए.
मौत के बाद न कोई पोस्टमार्टम, न FIR, न मेडिकल रिपोर्ट, न ही मरीज के इलाज की जानकारी परिजनों को दी जाती है. सवाल ये उठता है कि क्या यह अस्पताल मानवता की हत्या कर रहा है?
अब सवाल उस बच्ची का है, जिसकी आंखें खुलीं तो मां की लाश देखी. पिता पहले ही बेरोजगार हैं. और अब इस मासूम का जीवन प्रशासन और समाज की दया पर निर्भर है.
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य स्वास्थ्य विभाग की नीतियों के मुताबिक प्रसव के दौरान किसी महिला की मौत की हालत में एमएलसी, पोस्टमार्टम, रिपोर्टिंग अनिवार्य है. साथ ही, मरीज को उचित रेफरल प्रक्रिया से ही अन्यत्र भेजा जा सकता है. मगर श्रीयांश हॉस्पिटल ने इन सभी मानकों की खुलेआम अवहेलना की. और हॉस्पिटल प्रबंधन ने उस मृतक महिला का पोस्टमार्टम तक नहीं किया और आरोप ये लगाया जा रहा कि उस महिला को सिक्लिंग की बीमारी थी. जबकि रिपोर्टों में ऐसा कुछ नहीं मिला और लैब रिपोर्टों में भी खेला किया गया है. मतलब साफ है आपको बीमारी कुछ है और रिपोर्ट कुछ बता रही है और तो और हॉस्पिटल में लैब से लेकर सीटी स्कैन मशीन चलाने वाले भी बिना डिग्रीधारी बैठे हैं.
आरंग क्षेत्र में इस घटना के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है. स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों में भी आक्रोश है!
क्या मातृत्व अब सुरक्षित नहीं रहा? क्या हम ऐसे सिस्टम के सामने मौन रहेंगे. जो जीवन देने की जगह लाशें सौंपता है?
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