प्रशासन ने तीन पिकअप समेत जब्त किया 550 क्विंटल से ज्यादा धान, दो समिति प्रबंधक बर्खास्त, जनपद सदस्य पर लगा गंभीर आरोप
The administration seized more than 550 quintals of paddy along with three pickup trucks, dismissed two committee managers, and leveled serious allegations against a district member.
गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत उरमाल में बीती रात अवैध धान तस्करी का बड़ा मामला उजागर हुआ है. बताया जा रहा है कि जनपद सदस्य परमेश्वर जैन (मालु) के द्वारा उड़िसा सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर धान की तस्करी कर उरमाल क्षेत्र में रखवाया जा रहा था.
इस खबर के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तुलसीदास मरकाम, अमलीपदर तहसीलदार सुशील कुमार भोई और देवभोग तहसीलदार अजय कुमार चंद्रवंशी ने संयुक्त रुप से कार्रवाई करते हुए धान को जब्त किया. कार्रवाई मंडी अधिनियम के तहत की गई है.
धान तस्करी में उपयोग किए जा रहे 407 मॉडल के ट्रक नम्बर CG23 M 6922 को मौके पर पकड़ा गया. जिसमें लगभग 250 पैकेट से ज्यादा धान भरा हुआ था. इसके अलावा जनपद सदस्य से जुड़े बताए जा रहे एक गोदाम में छापेमारी कर करीब 300 पैकेट धान और मिला. इस तरह कुल मिलाकर 550 क्विंटल से ज्यादा धान जब्त किए जाने का अनुमान है.
जिला प्रशासन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच में जुट गया है. धान का स्रोत, खरीददार-आपूर्तिकर्ता और तस्करी के नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है. जनपद सदस्य की भूमिका की भी जांच की जाएगी ताकि यह साफ हो सके कि वह इस अवैध कारोबार में सीधे शामिल थे या नहीं.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि के संरक्षण में इस तरह का अवैध कारोबार होना लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है. अगर जनप्रतिनिधि ही कानून तोड़ेंगे तो आम जनता किससे सीख लेगी? यह घटना शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अवैध लाभ कमाने की मंशा को दर्शाता है.
जप्त धान –
1️⃣ तीन पिकअप वाहनों में भरा लगभग 150 कट्टा धान
2️⃣ डम्प किया हुआ लगभग 40 कट्टा धान
➡️ कुल जप्त धान – लगभग 190 कट्टा
जप्त वाहन –
1️⃣ पिकअप वाहन क्रमांक — CG-04-JB-2505
2️⃣ पिकअप वाहन क्रमांक — CG-07-AV-4930
3️⃣ पिकअप वाहन क्रमांक — OD-21-P-6055
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दो समिति प्रबंधक बर्खास्त
लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, पत्रकारों द्वारा लगातार विरोध, कई ज्ञापनों और भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद प्रशासन ने दो बड़े प्रबंधकों पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से मुक्त कर दिया है. यह कार्रवाई खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की तैयारियों से पहले की गई है. ताकि आने वाले सीजन में गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लग सके.
पहली कार्रवाई धवलपुर सहकारी समिति के डाटा एंट्री ऑपरेटर ऋषिकांत मोहरे पर की गई है. जिन्हें शासन की अनिवार्य धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान बिना अनुमति हड़ताल पर जाने, लगातार अनुपस्थित रहने और कई बार चेतावनी मिलने के बावजूद कार्य पर उपस्थित न होने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
लेकिन सबसे गंभीर और चर्चित मामला मुड़गेलमाल सहकारी समिति के प्रबंधक शिवकुमार सिन्हा का रहा. जिनके खिलाफ पिछले कई महीनों से भारी विरोध व गंभीर शिकायतें चल रही थीं.
उन पर आरोप थे कि
अमलीपदर के पत्रकारों को जूता-चप्पल दिखाकर अपमानित करना, धमकाना और जान से मारने की धमकी देना.
पत्रकारों ने इस घटना की शिकायत उप संचालक, कलेक्टर, सांसद, और उच्च अधिकारियों को लिखित में की थी, जिसे बेहद गंभीर माना गया.
सूत्रों से मिली खबर के अनुसार किसानों के पट्टे (दस्तावेज) अपने पास रोककर गलत गतिविधियों में उपयोग करना.
उड़ीसा से अवैध धान मंगवाकर स्थानीय किसानों के नाम पर खरीदी में डालना और इससे बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ कमाना.
यह शिकायतें विभाग तक पहुंच चुकी थीं और लगातार जांच के दायरे में थीं.
किसानों का आरोप था कि समिति में काम बिना पैसे लिए नहीं होता था और प्रबंधक की मनमानी के कारण असली किसानों को धान बेचने में भारी परेशानी होती थी.
इन आरोपों के बाद गरियाबंद जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि अगर शिवकुमार सिन्हा को पद से मुक्त नहीं किया गया. तो जिले के सभी पत्रकार सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे। यह मुद्दा पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बन गया था.
इन सभी पहलुओं को गंभीरता से लेते हुए सहायक आयुक्त, सहकारिता, गरियाबंद ने जांच के बाद शिवकुमार सिन्हा को कर्तव्य में गंभीर चूक, नियम उल्लंघन, अनियमितता और अनुचित बर्ताव के आधार पर पद से हटा दिया.
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की लापरवाही, भ्रष्टाचार या नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों के हित सर्वोपरि हैं और पत्रकारों की सुरक्षा, शिकायतें तथा उनके उठाए सवाल पूर्णतः उचित माने गए.
यह कार्रवाई न सिर्फ प्रशासन की सख्ती का संकेत देती है. बल्कि आने वाले खरीदी सीजन के लिए एक बड़ा संदेश भी है कि भ्रष्टाचार, धमकी और मनमानी का दौर अब खत्म होगा.
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