जंगल में शिकारियों का काला खेल बेनकाब, बिजली के तार से सुअर और भालू की मौत, मौके से पांच आरोपी गिरफ्तार, एक फरार, तलाश जारी

The dark game of hunters in the forest exposed, pig and bear died due to electric wire, five accused arrested from the spot, one absconding, search continues

जंगल में शिकारियों का काला खेल बेनकाब, बिजली के तार से सुअर और भालू की मौत, मौके से पांच आरोपी गिरफ्तार, एक फरार, तलाश जारी

महासमुंद/बागबहारा : जंगल की शांति को भेदती एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे बागबहारा परिक्षेत्र को दहला दिया. बागबहारा के अंतर्गत परिसर जोरातराई स्थित आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 179 में शिकारियों ने मौत का ऐसा जाल बिछाया. जिसने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण को चुनौती दी. बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया.
मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग की टीम ने खुलासा किया कि ग्राम भीमखोज़ और जोरातराई कमार डेरा निवासी कुछ शातिर शिकारी शिकार करने के इरादे से जंगल पहुंचे. उन्होंने 11 केवी विद्युत लाइन में अवैध तरीके से जीआई तार खूंटी लगाकर बिजली करंट का फंदा तैयार किया. यही मौत का जाल एक जंगली सुअर और 12 साल का नर भालू की जान ले बैठा.
खबर मिलते ही उपवनमंडल अधिकारी के नेतृत्व में बागबहारा परिक्षेत्र का पूरा स्टाफ़ और वन विद्यालय महासमुंद के प्रशिक्षु मौके पर पहुंचे. वहां जो नजारा सामने आया. उसने सबको सन्न कर दिया. एक तरफ बिजली के करंट से तड़प-तड़प कर मृत पड़ा भालू, तो दूसरी तरफ जंगली सुअर का अधपका मांस.. यह साबित कर रहा था कि शिकारी पहले ही सुअर का शिकार कर उसकी दावत उड़ाने की तैयारी में थे.
टीम ने तत्काल सर्चिंग अभियान चलाया और घटनास्थल से जीआई तार, अधपका मांस और अन्य साक्ष्य जब्त किया. वन विभाग की कार्रवाई में मौके से पांच आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ लिया गया.
पांचों आरोपित जंगल में करंट से शिकार करने के जुर्म में वन विभाग के हत्थे चढ़ गए। हालांकि. एक अन्य आरोपी मौके से फरार हो गया. जिसकी तलाश अब भी जारी है. वन विभाग ने मामला दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही कर रही है. पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे लंबे समय से इसी तरीके से शिकार करते आ रहे थे. बिजली विभाग की लापरवाही और जंगलों की निगरानी में ढिलाई का फायदा उठाकर ये शिकारी वन्यजीवों को मौत के घाट उतारते थे.
अधिकारियों के मुताबिक यह न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है बल्कि विद्युत अधिनियम के तहत भी यह जुर्म है. शिकारी अब दोहरी कानूनी कार्यवाही के घेरे में आएंगे.
जंगली भालू और सुअर जैसे प्राणी जंगल की जैव विविधता का अहम हिस्सा हैं. लेकिन मानव लालच और शिकार की प्रवृत्ति उन्हें लगातार खतरे में डाल रही है. इस वारदात ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वन्यजीव सुरक्षा पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद जंगलों में करंट और शिकारियों का खेल आखिर कैसे चल रहा है?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की गश्त अक्सर सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है. अगर टीम समय पर सक्रिय रहती तो शायद यह हादसा टल सकता था.
शिकार के पारंपरिक तरीकों से हटकर अब शिकारी बिजली का सहारा लेने लगे हैं. यह न सिर्फ जानवरों के लिए बल्कि जंगल में घूमने वाले चरवाहों और ग्रामीणों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है. वन विभाग ने इस घटना के बाद सख्ती बढ़ाने का आश्वासन दिया है.
यह घटना सिर्फ एक जुर्म नहीं, बल्कि जंगल की आत्मा पर किया गया बड़ा हमला है. भालू और सुअर की मौत से वन्यजीव संरक्षण की नीतियों पर सवाल उठ खड़े हुए हैं. शिकारी भले ही जेल की सलाखों तक पहुंच जाएं. लेकिन सवाल यही है कि कब तक जंगल का राजा और उसके साथी करंट के इस खूनी खेल का शिकार बनते रहेंगे?
गौरतलब है कि एक ही हफ्ते के भीतर यह दूसरा बड़ा शिकार मामला महासमुंद जिले से सामने आया है. लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की गश्त और निगरानी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. अगर इसी तरह शिकारियों का आतंक जारी रहा. तो जिले के जंगलों से वन्यजीवों का नामोनिशान मिट जाएगा.
आरोपी
(1) अगर सिंह पिता चमरु उम्र 40 साल
(2) अर्जुन पिता चमरु उम्र 36 साल
(3) तुलाराम पिता पुनीत राम बिंझवार उम्र 35 साल
(4) चैतराम पिता दुखसिंह
(5) चैतराम पिता इंद्र कुमार
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