10 हजार स्कूलों का समायोजन, 43 हजार पदों पर संकट, युक्तियुक्तकरण से नाराज हजारों शिक्षकों का मंत्रालय घेराव, 23 संगठनों की भागीदारी

Thousands of teachers on the streets against rationalization, a group came out to surround the ministry, demonstration for four demands, participation of 23 organizations

10 हजार स्कूलों का समायोजन, 43 हजार पदों पर संकट, युक्तियुक्तकरण से नाराज हजारों शिक्षकों का मंत्रालय घेराव, 23 संगठनों की भागीदारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर घमासान मचा हुआ है. प्रदेश सरकार द्वारा अपनाई जा रही युक्तियुक्तकरण नीति के विरोध में और वर्ष 2008 के सेटअप के मुताबिक प्रक्रिया को पूरी करने की मांग को लेकर बुधवार को ‘छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच’ के बैनर तले हजारों शिक्षक मंत्रालय का घेराव किया. इस प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षक शामिल हुए.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज प्रदेशभर के शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए. प्रदेश के कई जिलों से पहुंचे शिक्षक रायपुर के माना स्थित तूता धरना स्थल पर जमा हुए और आज सुबह 10 बजे से विरोध प्रदर्शन शुरु किया. 23 शिक्षक संगठनों के नेतृत्व में यह आंदोलन दोपहर 2 बजे मंत्रालय घेराव की चेतावनी के साथ तेज़ हो गया.
धरना स्थल पर बड़ी तादाद में महिला शिक्षकाएं भी मौजूद रहीं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मौजूदा युक्तियुक्तकरण नीति न तो व्यावहारिक है और न ही शिक्षा के हित में है. शिक्षकों ने एक बार फिर से 2008 का शिक्षक सेटअप लागू करने की मांग उठाई है.
2008 के सेटअप को फिर से लागू करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के मुताबिक 2008 में लागू की गई व्यवस्था में प्राथमिक स्कूलों में कम से कम तीन शिक्षक (60 बच्चों पर), मिडिल स्कूलों में पांच शिक्षक और हाई स्कूल-हायर सेकेंडरी में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था थी. कामर्स विषय के लिए दो शिक्षक अनिवार्य माने गए थे. लेकिन मौजूदा युक्तियुक्तकरण में इन जरुरी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है.
शिक्षकों की कमी पर उठाए सवाल
शिक्षक नेताओं ने सवाल उठाया कि हाल के वर्षों में हजारों नई नियुक्तियां और पदोन्नतियां होने के बावजूद प्रदेश में अब भी 212 प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हैं. और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक पदस्थ है. इसके साथ ही 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं भी शिक्षक विहीन हैं और 255 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक विहीन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति के आदेश के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है.
पदोन्नति और पेंशन पर भी जताई चिंता
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने यह भी मांग की कि सालों से एक ही पद पर कार्यरत शिक्षकों को क्रमोन्नति दी जाए और इसके लिए तत्काल जनरल ऑर्डर जारी किया जाए. साथ ही उन्होंने उन शिक्षकों की पेंशन व्यवस्था पर भी चिंता जताई. जो 10 साल से कम सेवा अवधि के कारण शून्य पेंशन पर सेवानिवृत्त हो रहे हैं. शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे शिक्षकों की पूर्व सेवा को भी पेंशन लाभ में जोड़ा जाए.
प्रशिक्षित शिक्षकों को मिले उच्च पद
शिक्षकों ने यह भी जोर देकर कहा कि डीएड और बीएड जैसे प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को उच्च पदों पर पदोन्नति दी जाए. जैसा कि भर्ती और पदोन्नति नियमों में उल्लेखित है.
राजधानी रायपुर में शिक्षक संगठनों का यह व्यापक आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी है. शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाते हुए शिक्षक अब सड़कों पर उतरकर अपने हक और छात्रों के भविष्य दोनों की रक्षा की मांग कर रहे हैं. अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है.

आंदोलन में 21 संघ का समर्थन रहा. प्रान्त संचालक वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा, विकास राजपूत, कृष्ण कुमार नवरंग सहित सभी संघ प्रमुखों ने संबोधन में बताया कि सरकार द्वारा चुनाव पूर्व मोदी की गारंटी में 54 हजार शिक्षक भर्ती की बात कही गई थी. जबकि सरकार करीब 11 हजार को मर्ज कर दिया. वहीं युक्तियुक्तकरण के बहाने प्रदेश में करीब 44 हजार शिक्षक के पद हमेशा के लिए खत्म किये जा रहे हैं.
सभी संघ प्रमुखों ने बताया कि सरकार शिक्षा जैसे मंदिर को बंद कर रही वहीं दूसरी तरफ नई शराब दुकानें खोलने जा रही है. सरकार के लिए शिक्षा से जरुरी शराब हो गई है. उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण बच्चो को अच्छी शिक्षा से वंचित कर रही है. और जो बीएड, डीएड वाले अभ्यर्थियों का रोजगार छीन रही है.
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क्या होता है समायोजन?

युक्तियुक्तकरण का अर्थ है संसाधनों और मानवबल को एक सिस्टम के तहत मर्ज कर, खर्च और संरचना को सुव्यवस्थित करना. जैसे अगर किसी शहर में एक ही संस्था के दो ऑफिस हैं. तो उसे एक में मर्ज कर देना. इससे कंपनी के खर्च घटते हैं. लेकिन कर्मचारियों पर वर्क लोड बढ़ता है और नौकरियां प्रभावित होती हैं. सरकार भी इस प्रक्रिया में कुछ शिक्षकों को सरप्लस दिखाकर उनका ट्रांसफर या पद खत्म कर सकती है.
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