भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार सड़कों पर दिख रहा -सुशील आनंद शुक्ला, 1 नवंबर से हो धान खरीदी, लक्ष्य हो 200 लाख मीट्रिक टन -दीपक बैज
Corruption of BJP government is visible on the streets Sushil Anand Shukla paddy should be purchased from November 1 the target should be 200 lakh metric tons Deepak Baij
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासियों के लिए एक चौंकाने वाली खबर आई है. अब आपको हर सुबह ताजी हवा में मॉर्निंग वॉक करने के लिए पैसे चुकाने होंगे. वीआईपी रोड स्थित ऊर्जा पार्क (राजीव स्मृति वन) में सुबह व्यायाम और टहलने वाले लोगों से हर महीने 500 रुपये वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है. रायपुर के डीएफओ ने यह प्रस्ताव अपने सीसीएफ को भेजा है. जिसका लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर तंज कसते हुए लिखा, “500 रुपए में मिलेगी साँस, हाँ ये सही खबर है।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘विष्णु के सुशासन- मोदी की गारंटी’ वाली सरकार अब रायपुर के नागरिकों से मॉर्निंग वॉक के लिए भी पैसे वसूलने की तैयारी कर रही है.
ऊर्जा पार्क में अब तक सुबह 8 बजे तक आने वाले मॉर्निंग वॉकर्स के लिए प्रवेश मुफ्त था. लेकिन अब हर महीने 500 रुपये की फीस लगाए जाने की खबर से शहरवासियों में बहुत ज्यादा नाराजगी है. बघेल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार मॉर्निंग वॉक करने वाले बुजुर्गों और स्वास्थ्य के प्रति जागरुक लोगों को पार्क से दूर करने के लिए यह शुल्क लगा रही है.
इसके साथ ही उन्होंने रायपुर के तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में हाल ही में हुई चाकूबाजी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है. जिससे लोग वहां जाने से कतरा रहे हैं. बघेल का आरोप है कि यह सरकार प्रदेश के नागरिकों को लूटने में व्यस्त है और इस तरह के निर्णय सिर्फ जनता के हितों के खिलाफ हैं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार सड़कों पर दिख रहा -कांग्रेस
रायपुर : प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा के राज में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो गयी हैं कि सरकार का भ्रष्टाचार अब सड़को पर भी दिखने लगा है.
परिवहन विभाग ने जबरिया सार्वजनिक उगाही शुरु कर दी है. उच्च पदस्थ सत्ताधीशो के संरक्षण की वजह से वसूली बाज अधिकारी इतने निडर और निरंकुश हो गये हैं कि वसूली के लिये किराए के लठैत भी रखे हुये हैं. तकरीबन सभी आर.टी.ओ. अस्थाई चेक पोस्ट बनाकर आधा दर्जन से ज्यादा लठैत हाथों मे लाठियां लेकर वाहनो को रोकते दिख जायेंगे. इन लठैतो की नियुक्ति वेतन आदि की व्यवस्था चेक पोस्ट पर तैनात अधिकारी अपने स्तर पर करते हैं. रायपुर आर.टी.ओ. ने तो अनुपम नगर में अवैध कार्यालय भी खोल लिया है. जहां वसूली की राशि का बंटवारा होता है.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भयादोहन कर अवैध वसूली का आलम यह है कि राजधानी रायपुर से बिलासपुर तक के 115 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक ट्रक को 5 स्थानों पर परिवहन विभाग (आर.टी.ओ.) और ट्रेफिक को इन्ट्री के तौर पर अवैध राशि देनी पड़ती है. इस मार्ग में रायपुर आर.टी.ओ. उड़नदस्ता (उरला सिलतरा क्षेत्र में) रायपुर आर.टी.ओ. बैरियर सिमगा, दुर्ग आर.टी.ओ. (नांदघाट पुल के आगे) बिलासपुर आर.टी.ओ. (नारायणपुर) बिलासपुर ट्रेफिक पुलिस (चकरभाठा) में कैंप लगाकर ट्रकों को रोक कर वसूली करते परिवहन विभाग के अधिकारी और लठैत दिख जायेंगे.
अगर ट्रक छत्तीसगढ़ की है तो आर.टी.ओ. अमले द्वारा वसूली जाने वाली इंट्री राशि 1500 रु. हर महीने होती है. ट्रक छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्य की है तो वसूली जाने वाली इन्ट्री राशि दुगनी 3000 रु. हर महीने हो जाती है. इसके अलावा आर.टी.ओ. अमले द्वारा मैकेनिकल फाइन के नाम पर सभी ट्रकों से अनिवार्य 1400 रु. की हर महीने अवैध वसूली की जाती है. यह हाल सिर्फ एक मार्ग की नहीं है. सरकारी संरक्षण में वसूली का यह काला कारनामा प्रदेश के सभी मुख्य मार्गों पर लगातार जारी है. रायपुर धमतरी मार्ग पर माना के पास, रायपुर उड़ीसा मार्ग में सरायपाली के पास तथा प्रदेश के सभी सीमाओं पर आर.टी.ओ. अमले द्वारा अवैध वसूली की जा रही है.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जबरिया की जाने वाली यह अवैध वसूली भाजपा सरकार में ऊंचे पदो पर बैठे राजनैतिक आकाओं के सीधे संरक्षण में चल रही है. प्रतिवाद करने पर वसूली करने वाले साफ शब्दों में कहते हैं हम क्या करें ऊपर तक पैसा पहुंचाना पड़ता है. इसी वसूली के बल बूते आर.टी.ओ. कर्मचारियों की कमाई वाले क्षेत्रों में पोस्टिंग के लिये लाखों की बोलियां लगाई जाती है. ज्यादा बोली लगाने वाला वसूली की रकम ज्यादा तादाद में पहुंचाने का वचन देने वाला अधिकारी ही मलाईदार पोस्टिंग पाता है.
भाजपा सरकार की इसी जबरिया वसूली की वजह से अन्य प्रांतो की माल वाहक ट्रकें छत्तीसगढ़ आना ही नहीं चाह रहे या फिर ज्यादा भाड़ा में आ रहे है. भाजपा सरकार के संरक्षण में चल रही इस अवैध इस वसूली का हर्जाना छत्तीसगढ़ की जनता को महंगे दामों में दैनिक उपयोग की सामान खरीद कर उठाना पड़ रहा है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
1 नवंबर से हो धान खरीदी, लक्ष्य हो 200 लाख मीट्रिक टन -दीपक बैज
रायपुर : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में अमूमन 1 नवंबर से धान की खरीदी शुरु होती है. इस बार बारिश अच्छी हुई है, फसल भी अच्छी है इसलिए पैदावार ज्यादा होने की उम्मीद है इसलिये सरकार इस साल धान खरीदी 1 नवंबर से चालू करे और खरीदी का लक्ष्य भी बढ़ाकर 200 लाख मीट्रिक टन किया जाए ताकि किसानों की पूरी पैदावार की सरकार खरीदी कर सके.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धान खरीदी के लिये सरकार के द्वारा बनाई गई मंत्रीमंडलीय उपसमिति ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. जिसकी वजह से किसानों में चिंता की लहर है. सरकार अगर 1 नवंबर से धान की खरीदी करती है तो उसके लिये अभी से तैयारी करनी पड़ेगी. तभी धान खरीदी सुचारु रुप से हो पाएगी.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले वर्ष खरीफ फसल 2023 के धान की खरीदी के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार आ गई थी. कांग्रेस की सरकार के सुशासन की वजह से प्रदेश के किसानों के द्वारा इतिहास का सर्वाधिक धान उत्पादन किया गया. इसीलिए समर्थन मूल्य पर अब तक की सर्वाधिक 144 लाख 92 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई. जो अनुमानित मात्रा 130 लाख मीट्रिक टन से 15 लाख मीट्रिक टन ज्यादा थी. राज्य सरकार द्वारा धान की इस मात्रा के भंडारण, मिलिंग तथा चावल के उपार्जन एवं भंडारण की कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई. भारतीय जनता पार्टी की लचर सरकार के कुशासन की वजह से इस पुरे धान की न तो समय पर मिलिंग हुई और न ही खरीदी केन्द्रों और संग्रहण केन्द्रों पर बचे हुए धान की सुरक्षा और रखरखाव की समुचित व्यवस्था की गई. इसका नतीजा यह हुआ है कि सितंबर 2024 की स्थिति में धान खरीदी केन्द्रों से 4 लाख 16 हजार 410 क्विंटल धान का उठाव और संग्रहण केन्द्रों से 21 लाख 77 हजार 470 क्विंटल धान का उठाव नहीं किया जा सका है. खरीदी केन्द्रों पर जो 4 लाख 16 हजार 410 क्विंटल धान बाकी दिख रहा है वह पूरी तरह से नष्ट हो चुका है. इस धान की कुल लागत 166 करोड़ 56 लाख रुपये होती है. यह शुद्ध रुप से राष्ट्रीय क्षति है. संग्रहण केन्द्रों में बाकी धान 21 लाख 77 हजार 470 क्विंटल की कुल लागत 870 करोड़ 99 लाख रुपये होती है. इसमें से भी ज्यादातर धान पानी से डैमेज हो चुका है. इसलिए कस्टम मीलिंग के लिए राईस मिलर्स इसका उठाव नहीं कर रहे हैं. अगर उठाव नहीं होगा तो इस साल धान खरीदी में बाधा आएगी.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb



