धान खरीदी से वंचित किसानों के पंजीयन व खरीदी अवधि बढ़ाने की मांग, टोल प्लाजा के पास आरंग में चक्का जाम कर जमकर प्रदर्शन
Demand for registration of farmers deprived of paddy procurement and extension of procurement period, massive protest by blocking the road near the toll plaza in Arang
आरंग : छत्तीसगढ़ के किसानों द्वारा द्वारा धान खरीदी अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर रायपुर-महासमुंद नेशनल हाइवे रसनी टोल प्लाजा के पास आरंग में चक्का जाम कर प्रदर्शन किया. किसान, किसान नेता और कांग्रेस के कार्यकर्ता मिलकर पंजीकृत सभी किसानों के धान खरीदने की तारीख बढ़ाने की मांग की. मंचीय कार्यक्रम के बाद किसान हाईवे पर उतरकर चक्काजाम किया. किसानों में प्रदेश सरकार के रवैए को लेकर भारी नाराजगी है.
किसानों का कहना है कि इस वर्ष सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदने का नियम बनाया है, लेकिन लगभग 21% किसानों का धान सत्यापित होने के बावजूद टोकन जारी नहीं किया गया. जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
इस मौके पर किसान नेता पारसनाथ साहू, राधेश्याम शर्मा, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत ) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, महासमुंद जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, गरियाबंद जिला महासचिव योगेंद्र कुमार साहू, भूनूराम साहू, कृष्ण कुमार चंद्राकर, प्रवीण कुमार चंद्राकर, गोविन्द चंद्राकर ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन वर्ष 2025-26 में एक एक तहसील के सैकड़ों किसान तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से धान बेचने से वंचित रह गए हैं. एग्री स्टेक पोर्टल, समिति मॉड्यूल एवं तहसील मॉड्यूल में पंजीयन के बावजूद कई किसानों का रकबा प्रदर्शित नहीं हुआ. वहीं ट्रस्ट भूमि, रेहगहा /अधिया पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन ही नहीं हो पाया। इसके अलावा सर्वर समस्याओं एवं तकनीकी त्रुटियों के कारण अनेक किसानों के टोकन कट नहीं पाए, जिससे वे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान विक्रय से वंचित रह गए हैं. एक-एक तहसील में सैकड़ों किसान इस समस्या से प्रभावित हैं. जिससे किसानों को मानसिक एवं आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर जल्द समाधान नहीं किया गया तो किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है.
किसानों ने शासन से मांग किया है कि धान खरीदी से वंचित किसानों का पुनः पंजीयन कराया जाए, और किसानों के हित में धान खरीदी की अवधि बढ़ाई जाए. ताकि सभी पात्र किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेच सकें.
किसानों की प्रमुख मांगें हैं-
1. केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में की जाने वाली वृद्धि का लाभ किसानों को हर साल मिलना चाहिए।
2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा, इसे बंद किया जाए।
3. सहकारी समितियों किसानों का जमा अमानत राशि पर ब्याज दिया जाए।
4. धान भराई की राशि सीधे किसानों के खाते में जमा की जाए।
5. धान खरीदी नीति में सुधार किया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी.
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